{"_id":"5f357da58ebc3e3d125c03aa","slug":"cyber-police-station-cug-number-released-staff-deployed-basti-news-gkp3617020129","type":"story","status":"publish","title_hn":"साइबर थाना: सीयूजी नंबर जारी,स्टाफ तैनात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साइबर थाना: सीयूजी नंबर जारी,स्टाफ तैनात
विज्ञापन
आईजी कैंप कार्यालय खुला साइबर थाना।
- फोटो : BASTI
साइबर थाना: सीयूजी नंबर जारी, स्टाफ तैनात
रेंज कार्यालय पर शुरू हुआ अस्थाई कार्यालय
नया थाना बनने तक आईजी कैंप कार्यालय में चलेगा थाना
आईजी बोले, योजनाओं में घपले की हो सकेगी जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। ऑनलाइन फ्राड के बढ़ते दायरे के बीच रेंज कार्यालय पर साइबर थाना सक्रिय कर दिया गया है। रेंज के तीनों जिले से इंस्पेक्टर सहित 18 पुलिसकर्मियों का स्टाफ तैनात कर दिया गया। इंस्पेक्टर राहुल यादव को पहला थाना प्रभारी बनाया गया है। मंडल मुख्यालय पर प्रस्तावित थाने का भवन जब तक बनकर तैयार नहीं होता, तब तक तीनों जिले (बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर) में साइबर अपराध के मामले यहीं दर्ज किए जाएंगे। बुधवार को शासन स्तर से सीयूजी नंबर (7839876672) और ई-मेल आईडी जारी कर दी गई है।
शासन के संज्ञान में आया कि कोविड-19 महामारी के समय साइबर अपराधी अपराध के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। प्रधानमंत्री केयर्स फंड के नाम पर धोखाधड़ी, रोजमर्रा के सामान की ऑनलाइन खरीदारी में धोखाधड़ी की शिकायतें आ रही हैं। महामारी से राहत दिलाने के लिए सरकार की तरफ से चलाई जा रही योजनाओं में व्यापक पैमाने पर धोखाधड़ी पकड़ी जा रही है। बैंक खाते, ऑनलाइन लेनदेन, रेलवे टिकट के बाद अब सरकारी योजनाओं पर नजर गड़ाए हैं। यहां तक कि आयुष्मान भारत कार्ड बनाने के नाम पर जालसाजी की जाने लगी है। आईजी एके रॉय का कहना है कि थानों को पूर्णतया क्रियाशील करा दिया गया है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि साइबर थानों में तैनात प्रभारी अधिकारियों के सीयूजी नंबर का सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाय, ताकि आम जनता को इसकी जानकारी प्राप्त हो सके। साइबर अपराधियों की धरपकड़ करना, आतंकी घटनाओं की तफ्तीश और आरोपितों की गिरफ्तारी, क्रेडिट व डेबिट कार्ड से हेराफेरी और फ्राड, इंटरनेट बैंकिंग से फ्राड, ऑनलाइन शापिंग में फ्राड, कंप्यूटरीकृत बैंक खातों में की जारी वाली हेराफेरी और सरकारी साइटों को हैक करने के मामलों की जांच साइबर थानों के माध्यम से होगी।
क्या है साइबर क्राइम
ऑनलाइन क्रियाकलापों में तकनीकी के सहारे धोखाधड़ी या अन्य गैर कानूनी गतिविधियों को साइबर क्राइम की श्रेणी में रखा गया है। कैशलेस ट्रांजेक्शन का ट्रेंड बढ़ने से साइबर के मामले भी बढ़ते गए। ऑनलाइन आर्डर, ऑनलाइन बुकिंग, ऑनलाइन पेमेंट, अकाउंट आईडी हैक, सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाने, वीडियो और फोटो एडिट कर युवतियों और महिलाओं को ब्लैकमेल करने सहित अन्य कई रूपों में साइबर क्राइम से जुड़ी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे मामलों में पुलिस मुकदमा तो दर्ज कर लेती है लेकिन छानबीन करने में उसके हाथ बंध जाते हैं। ऐसे में साइबर थाने काफी अहम कदम माना जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
रेंज कार्यालय पर शुरू हुआ अस्थाई कार्यालय
नया थाना बनने तक आईजी कैंप कार्यालय में चलेगा थाना
आईजी बोले, योजनाओं में घपले की हो सकेगी जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। ऑनलाइन फ्राड के बढ़ते दायरे के बीच रेंज कार्यालय पर साइबर थाना सक्रिय कर दिया गया है। रेंज के तीनों जिले से इंस्पेक्टर सहित 18 पुलिसकर्मियों का स्टाफ तैनात कर दिया गया। इंस्पेक्टर राहुल यादव को पहला थाना प्रभारी बनाया गया है। मंडल मुख्यालय पर प्रस्तावित थाने का भवन जब तक बनकर तैयार नहीं होता, तब तक तीनों जिले (बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर) में साइबर अपराध के मामले यहीं दर्ज किए जाएंगे। बुधवार को शासन स्तर से सीयूजी नंबर (7839876672) और ई-मेल आईडी जारी कर दी गई है।
शासन के संज्ञान में आया कि कोविड-19 महामारी के समय साइबर अपराधी अपराध के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। प्रधानमंत्री केयर्स फंड के नाम पर धोखाधड़ी, रोजमर्रा के सामान की ऑनलाइन खरीदारी में धोखाधड़ी की शिकायतें आ रही हैं। महामारी से राहत दिलाने के लिए सरकार की तरफ से चलाई जा रही योजनाओं में व्यापक पैमाने पर धोखाधड़ी पकड़ी जा रही है। बैंक खाते, ऑनलाइन लेनदेन, रेलवे टिकट के बाद अब सरकारी योजनाओं पर नजर गड़ाए हैं। यहां तक कि आयुष्मान भारत कार्ड बनाने के नाम पर जालसाजी की जाने लगी है। आईजी एके रॉय का कहना है कि थानों को पूर्णतया क्रियाशील करा दिया गया है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि साइबर थानों में तैनात प्रभारी अधिकारियों के सीयूजी नंबर का सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाय, ताकि आम जनता को इसकी जानकारी प्राप्त हो सके। साइबर अपराधियों की धरपकड़ करना, आतंकी घटनाओं की तफ्तीश और आरोपितों की गिरफ्तारी, क्रेडिट व डेबिट कार्ड से हेराफेरी और फ्राड, इंटरनेट बैंकिंग से फ्राड, ऑनलाइन शापिंग में फ्राड, कंप्यूटरीकृत बैंक खातों में की जारी वाली हेराफेरी और सरकारी साइटों को हैक करने के मामलों की जांच साइबर थानों के माध्यम से होगी।
विज्ञापन
क्या है साइबर क्राइम
ऑनलाइन क्रियाकलापों में तकनीकी के सहारे धोखाधड़ी या अन्य गैर कानूनी गतिविधियों को साइबर क्राइम की श्रेणी में रखा गया है। कैशलेस ट्रांजेक्शन का ट्रेंड बढ़ने से साइबर के मामले भी बढ़ते गए। ऑनलाइन आर्डर, ऑनलाइन बुकिंग, ऑनलाइन पेमेंट, अकाउंट आईडी हैक, सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाने, वीडियो और फोटो एडिट कर युवतियों और महिलाओं को ब्लैकमेल करने सहित अन्य कई रूपों में साइबर क्राइम से जुड़ी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे मामलों में पुलिस मुकदमा तो दर्ज कर लेती है लेकिन छानबीन करने में उसके हाथ बंध जाते हैं। ऐसे में साइबर थाने काफी अहम कदम माना जा रहा है।
विज्ञापन