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Basti News: क्रिटिकल केयर यूनिट का भवन तैयार, आईसीयू सुविधा की आस अधूरी
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मेडिकल कॉलेज बस्ती में बनकर तैयार हुआ क्रिटिकल केयर यूनिट भवन संवाद
बस्ती। महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज में 18.52 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 50 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) के संचालन का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। भवन बनकर तैयार है और कार्यदायी संस्था इसे मेडिकल कॉलेज प्रशासन को हैंडओवर भी कर चुकी है, लेकिन अभी तक यूनिट में जीवनरक्षक उपकरण और पर्याप्त मैनपावर उपलब्ध नहीं हैं। बिजली कनेक्शन भी नहीं हो पाया है।
मेडिकल कॉलेज के कैली परिसर में करीब एक साल पहले क्रिटिकल केयर यूनिट का निर्माण पूरा हो गया था। इसमें 50 बेड की व्यवस्था है। इनमें 20 बेड आईसीयू और 20 बेड हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) के लिए प्रस्तावित हैं। गंभीर मरीजों के इलाज के साथ गंभीर प्रसव के मामलों में भी यहां सुविधा उपलब्ध कराई जानी है। मरीजों की 24 घंटे निगरानी के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण और जांच सुविधाएं भी उपलब्ध होनी हैं।
यूनिट का संचालन शुरू न होने से गंभीर मरीजों को अभी हायर सेंटर रेफर करना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी और ऑपरेशन थिएटर में भी गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर समेत जरूरी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। फिलहाल साधारण एमआईसीयू के सहारे काम चलाया जा रहा है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को तत्काल गोरखपुर या लखनऊ रेफर कर दिया जाता है।
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मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने क्रिटिकल केयर यूनिट के संचालन के लिए शासन से चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ, मैनपावर और जीवनरक्षक उपकरणों की मांग की है। अधिकारियों के अनुसार, उपकरण और मैनपावर उपलब्ध होने के बाद ही यूनिट पूरी क्षमता से संचालित हो सकेगी। बिजली कनेक्शन का काम भी लगभग पूरा होने की बात कही जा रही है।
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रोजाना 10 से 12 गंभीर मरीज हो रहे रेफर
जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और सीएचसी से गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। यहां पहुंचने के बाद कई मरीजों को बेड उपलब्ध न होने या वेंटिलेटर सुविधा नहीं मिलने के कारण हायर सेंटर भेज दिया जाता है। आंकड़ों के अनुसार रोजाना करीब 10 से 12 गंभीर मरीज मेडिकल कॉलेज से रेफर होते हैं। इनमें ज्यादातर मरीज गोरखपुर और लखनऊ जाते हैं। कई मरीजों को निजी अस्पतालों का भी रुख करना पड़ता है।
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वेंटिलेटर की जरूरत बताकर किया रेफर, रास्ते में मौत
केस-1
वाल्टरगंज क्षेत्र के गौरा निवासी 67 वर्षीय आरएन यादव को सांस लेने में तकलीफ होने पर परिजन करीब 22 दिन पहले मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे थे। जांच के बाद चिकित्सकों ने वेंटिलेटर की जरूरत बताई और उन्हें रेफर कर दिया। परिजन मरीज को बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर लेकर जा रहे थे, इसी दौरान रास्ते में उनकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में आईसीयू और वेंटिलेटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध होतीं तो शायद मरीज की जान बचाई जा सकती थी।
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केस-2
शहर निवासी 60 वर्षीय बाबूलाल को सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ होने पर करीब एक सप्ताह पहले मेडिकल कॉलेज लाया गया। चिकित्सकों ने वेंटिलेटर की जरूरत बताते हुए उन्हें भर्ती किया, लेकिन बेड उपलब्ध न होने पर रेफर कर दिया। परिजन उन्हें लेकर लखनऊ पहुंचे, जहां तीनों बड़े सरकारी अस्पतालों में बेड उपलब्ध नहीं मिला। इसके बाद वे वापस बस्ती लौट आए और मरीज को मेडिकल कॉलेज के कैली परिसर में मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया। तब से उनका उपचार वहीं चल रहा है।
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दो-तीन दिन में हो सकता है बिजली कनेक्शन
डॉ. अनिल यादव, उप प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज, बस्ती ने बताया कि क्रिटिकल केयर यूनिट के संचालन के लिए शासन से मैनपावर और जीवनरक्षक उपकरणों की मांग की गई है। अभी उपकरण प्राप्त नहीं हुए हैं। सभी कार्य एनएचएम के माध्यम से होने हैं। बिजली कनेक्शन का काम लगभग पूरा है और दो-तीन दिन में कनेक्शन होने की उम्मीद है। मैनपावर मिलते ही यूनिट का संचालन शुरू कराया जाएगा।
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कोट
50 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट मेडिकल कॉलेज प्रशासन को हैंडओवर कर दी गई है। इसका संचालन मेडिकल कॉलेज प्रशासन को ही करना है।
-डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती।
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मेडिकल कॉलेज के कैली परिसर में करीब एक साल पहले क्रिटिकल केयर यूनिट का निर्माण पूरा हो गया था। इसमें 50 बेड की व्यवस्था है। इनमें 20 बेड आईसीयू और 20 बेड हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) के लिए प्रस्तावित हैं। गंभीर मरीजों के इलाज के साथ गंभीर प्रसव के मामलों में भी यहां सुविधा उपलब्ध कराई जानी है। मरीजों की 24 घंटे निगरानी के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण और जांच सुविधाएं भी उपलब्ध होनी हैं।
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यूनिट का संचालन शुरू न होने से गंभीर मरीजों को अभी हायर सेंटर रेफर करना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी और ऑपरेशन थिएटर में भी गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर समेत जरूरी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। फिलहाल साधारण एमआईसीयू के सहारे काम चलाया जा रहा है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को तत्काल गोरखपुर या लखनऊ रेफर कर दिया जाता है।
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मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने क्रिटिकल केयर यूनिट के संचालन के लिए शासन से चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ, मैनपावर और जीवनरक्षक उपकरणों की मांग की है। अधिकारियों के अनुसार, उपकरण और मैनपावर उपलब्ध होने के बाद ही यूनिट पूरी क्षमता से संचालित हो सकेगी। बिजली कनेक्शन का काम भी लगभग पूरा होने की बात कही जा रही है।
रोजाना 10 से 12 गंभीर मरीज हो रहे रेफर
जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और सीएचसी से गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। यहां पहुंचने के बाद कई मरीजों को बेड उपलब्ध न होने या वेंटिलेटर सुविधा नहीं मिलने के कारण हायर सेंटर भेज दिया जाता है। आंकड़ों के अनुसार रोजाना करीब 10 से 12 गंभीर मरीज मेडिकल कॉलेज से रेफर होते हैं। इनमें ज्यादातर मरीज गोरखपुर और लखनऊ जाते हैं। कई मरीजों को निजी अस्पतालों का भी रुख करना पड़ता है।
वेंटिलेटर की जरूरत बताकर किया रेफर, रास्ते में मौत
केस-1
वाल्टरगंज क्षेत्र के गौरा निवासी 67 वर्षीय आरएन यादव को सांस लेने में तकलीफ होने पर परिजन करीब 22 दिन पहले मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे थे। जांच के बाद चिकित्सकों ने वेंटिलेटर की जरूरत बताई और उन्हें रेफर कर दिया। परिजन मरीज को बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर लेकर जा रहे थे, इसी दौरान रास्ते में उनकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में आईसीयू और वेंटिलेटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध होतीं तो शायद मरीज की जान बचाई जा सकती थी।
केस-2
शहर निवासी 60 वर्षीय बाबूलाल को सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ होने पर करीब एक सप्ताह पहले मेडिकल कॉलेज लाया गया। चिकित्सकों ने वेंटिलेटर की जरूरत बताते हुए उन्हें भर्ती किया, लेकिन बेड उपलब्ध न होने पर रेफर कर दिया। परिजन उन्हें लेकर लखनऊ पहुंचे, जहां तीनों बड़े सरकारी अस्पतालों में बेड उपलब्ध नहीं मिला। इसके बाद वे वापस बस्ती लौट आए और मरीज को मेडिकल कॉलेज के कैली परिसर में मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया। तब से उनका उपचार वहीं चल रहा है।
दो-तीन दिन में हो सकता है बिजली कनेक्शन
डॉ. अनिल यादव, उप प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज, बस्ती ने बताया कि क्रिटिकल केयर यूनिट के संचालन के लिए शासन से मैनपावर और जीवनरक्षक उपकरणों की मांग की गई है। अभी उपकरण प्राप्त नहीं हुए हैं। सभी कार्य एनएचएम के माध्यम से होने हैं। बिजली कनेक्शन का काम लगभग पूरा है और दो-तीन दिन में कनेक्शन होने की उम्मीद है। मैनपावर मिलते ही यूनिट का संचालन शुरू कराया जाएगा।
कोट
50 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट मेडिकल कॉलेज प्रशासन को हैंडओवर कर दी गई है। इसका संचालन मेडिकल कॉलेज प्रशासन को ही करना है।
-डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती।