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12 हजार में बिक गई एक एकड़ की मिट्टी
basti
Updated Sun, 09 Sep 2018 11:36 PM IST
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नगरपालिका की ओर से प्रस्तावित मॉल का मॉडल।
- फोटो : amar ujala
बस्ती। शहर में खूबसूरत मल्टीप्लेक्स का सपना नगरपालिका ने बुना था। करीब ढाई वर्ष पहले इसे धरातल पर उतारने की कवायद भी शुरू हुई। पालिका कार्यालय के पीछे करीब एकड़ भर जमीन में इसके निर्माण की शुरुआत हुई। सबसे पहले इसे खोदा गया, जिसमें से काफी मिट्टी निकली, मगर इस मिट्टी की कीमत मात्र 12 हजार तय कर उसे ठेकेदार को बेच दी गई। मिट्टी के खरीदार ने इसे रातोंरात अमहट घाट पर पालिका की पार्क निर्माण योजना में खपा दिया।
नगर पालिका ने शहर को मल्टीप्लेक्स देने की योजना 2016 की शुरुआत में बनाई। इस योजना के तहत मुंबई के बिल्डर से अनुबंध हुआ। अनुबंध के बाद ठेकेदार ने काम शुरू किया। सबसे पहले एक एकड़ भूमि की मिट्टी खोदकर मल्टीप्लेक्स के लिए अंडरग्राउंड निर्माण शुरू हुआ। इसी बीच बारिश शुरू हो गई और काम बंद हो गया। इधर, एक एकड़ की मिट्टी को बगैर मोलतोल किए ही साठगांठ कर दूसरे ठेकेदार को बेचा गया। अनुबंधित ठेकेदार इस निर्माण पर तब तक लाखों रुपये खर्च कर चुका था, मगर उसे अपना धन फंसता नजर आया तो वह काम बंद करने के बाद गायब हो गया। नतीजतन, पालिका के मल्टीप्लेक्स की योजना खटाई में पड़ गई। करीब दो वर्ष से यहां की जमीन में यह गड्ढा खतरनाक बन चुका है। इसी के निकट स्थित प्राथमिक विद्यालय है, जिसके बच्चे गड्ढे के बगल खेलते-कूदते हैं। बच्चों पर तो खतरा मंडरा ही रहा है। साथ ही स्कूल भी खतरे में पड़ गया है। इसका एक हिस्सा गड्ढे के किनारे है। जिससे इसके गिरने की आशंका स्कूल के प्रधानाचार्य कई बार नगर पालिका को जता चुके हैं। हालांकि पालिका इसे लेकर अब तक नोटिस पर नोटिस दिए जा रहा है, मगर ठेकेदार की सेहत पर इसका कोई असर नहीं है।
खबर है कि जिस ठेकेदार ने मिट्टी खरीदी थी उसका उपयोग उसने अमहट घाट स्थित पार्क में किया है। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि अमहट घाट में प्रयोग मिट्टी का भुगतान भी पालिका से कराया जा चुका है। नगर पालिका के ईओ डॉ. मणि भूषण त्रिपाठी ने कहा कि मल्टीप्लेक्स की मिट्टी कहां गई। यह जांच का विषय है। रही निर्माण में देरी की बात तो ठेकेदार को दो बार नोटिस दिया जा चुका है। अंतिम नोटिस भी उसे भेजा जा रहा है। इसके बाद उसका अनुबंध समाप्त कर उसकी धरोहर राशि जब्त कर ली जाएगी। मिट्टी गोलमाल की जांच भी कराई जाएगी।
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नगर पालिका ने शहर को मल्टीप्लेक्स देने की योजना 2016 की शुरुआत में बनाई। इस योजना के तहत मुंबई के बिल्डर से अनुबंध हुआ। अनुबंध के बाद ठेकेदार ने काम शुरू किया। सबसे पहले एक एकड़ भूमि की मिट्टी खोदकर मल्टीप्लेक्स के लिए अंडरग्राउंड निर्माण शुरू हुआ। इसी बीच बारिश शुरू हो गई और काम बंद हो गया। इधर, एक एकड़ की मिट्टी को बगैर मोलतोल किए ही साठगांठ कर दूसरे ठेकेदार को बेचा गया। अनुबंधित ठेकेदार इस निर्माण पर तब तक लाखों रुपये खर्च कर चुका था, मगर उसे अपना धन फंसता नजर आया तो वह काम बंद करने के बाद गायब हो गया। नतीजतन, पालिका के मल्टीप्लेक्स की योजना खटाई में पड़ गई। करीब दो वर्ष से यहां की जमीन में यह गड्ढा खतरनाक बन चुका है। इसी के निकट स्थित प्राथमिक विद्यालय है, जिसके बच्चे गड्ढे के बगल खेलते-कूदते हैं। बच्चों पर तो खतरा मंडरा ही रहा है। साथ ही स्कूल भी खतरे में पड़ गया है। इसका एक हिस्सा गड्ढे के किनारे है। जिससे इसके गिरने की आशंका स्कूल के प्रधानाचार्य कई बार नगर पालिका को जता चुके हैं। हालांकि पालिका इसे लेकर अब तक नोटिस पर नोटिस दिए जा रहा है, मगर ठेकेदार की सेहत पर इसका कोई असर नहीं है।
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खबर है कि जिस ठेकेदार ने मिट्टी खरीदी थी उसका उपयोग उसने अमहट घाट स्थित पार्क में किया है। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि अमहट घाट में प्रयोग मिट्टी का भुगतान भी पालिका से कराया जा चुका है। नगर पालिका के ईओ डॉ. मणि भूषण त्रिपाठी ने कहा कि मल्टीप्लेक्स की मिट्टी कहां गई। यह जांच का विषय है। रही निर्माण में देरी की बात तो ठेकेदार को दो बार नोटिस दिया जा चुका है। अंतिम नोटिस भी उसे भेजा जा रहा है। इसके बाद उसका अनुबंध समाप्त कर उसकी धरोहर राशि जब्त कर ली जाएगी। मिट्टी गोलमाल की जांच भी कराई जाएगी।
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