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बच्चों को नहीं मिला दूध, शिक्षकों को कड़ी चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 12 May 2016 12:20 AM IST
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बीएसए ने सल्टौआ ब्लॉक के चार स्कूलों के साथ ही साथ ही बीआरसी का निरीक्षण किया।
- फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। बीएसए डाक्टर संतोष कुमार सिंह ने बुधवार को सल्टौआ ब्लॉक के तीन प्राथमिक स्कूलों और एक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के साथ ही बीआरसी का निरीक्षण किया। विद्यालयों में शिक्षक तो मिले मगर बच्चों की संख्या काफी थी।
हैरानी की बात यह थी कि तीनों स्कूलों के बच्चों को दूध नहीं दिया गया था, जबकि बुधवार को बच्चों को एमडीएम के साथ दूध भी देना है। बीएसए ने तीनों प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को कड़ी चेतावनी दी। कहा कि प्रत्येक बुधवार को हर हाल में बच्चों को दूध मिलना चाहिए। उन्होंने गांव में संपर्क कर बच्चों को स्कूल तक लाने का निर्देश दिया। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय सल्टौआ के निरीक्षण में अंश कालिक अध्यापिका स्म़ृति पाठक के नियमित नदारद रहने पर उन्हें अंतिम चेतावनी दी गई। बीआरसी सल्टौआ की जांच में वैसे सब कुछ ठीक मिला, मगर कुर्सी और मेज सहित फर्श पर चटाई बिछाने का निर्देश दिया।
सबसे पहले बीएसए प्राइमरी विद्यालय नरायनपुर पहुंचे। यहां काफी दिनों से शिक्षकों और हेड मास्टर में विवाद चल रहा था। बीएसए ने दोनों का पक्ष सुना और चेतावनी दी कि अगर पठन-पाठन कोई बाधा आई तो सबके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हेड मास्टर को विद्यालय को बेहतर शैक्षणिक माहौल के लिए जिम्मेदार बताया। इस स्कूल का इंडिया मार्क टू हैंड पंप दो साल से खराब है और हैंडपंप से पीला पानी दे रहा है। विद्यालय में बाउंड्रीवाल नहीं बनी थी। इसके लिए प्रस्ताव देने को कहा। 83 बच्चों में 31 मौजूद थे। हेड मास्टर रामउग्रह, अंशु शुक्ला, कामिनी पांडेय, चक्रपाणि पांडेय मौजूद रहे।
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बच्चों को दूध नहीं मिला था। प्राथमिक विद्यालय अगया में 97 नामांकित बच्चों में से मात्र 10 बच्चे ही मौजूद थे। बीएसए ने हेड मास्टर सहित शिक्षकों को फटकार लगाई। सुरेंद्र मणि त्रिपाठी, रामकिशुन यादव, राम कृष्ण यादव, सीमा वर्मा व यशवीर सिंह मौजूद मिले। यहां पर भी बच्चों को दूध नहीं मिला था। प्राथमिक विद्यालय बांसापार में 116 बच्चों के सापेक्ष मात्र 34 बच्चे ही मिले। बच्चों को दूध नहीं मिला। शिक्षक प्रद्युम्न, उषा एवं राकेश कुमार मौजूद थे। इस स्कूल में बाउंड्रीवाल न होने पर बीएसए ने एसडीएम भानपुर से फोन पर बात की और प्रधान को ग्राम निधि से बाउंड्रीवाल का प्रस्ताव देने को कहा।
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के निरीक्षण में कई कक्षों में पंखा नहीं चल रहा था। गर्मी से बच्चे परेशान थे। बीएसए ने कई बच्चों से पढ़ाई और उनके भविष्य के बारे में पूछा, किसी ने डाक्टर तो किसी ने नर्स बनने की बात कही। बताया गया कि अंशकालिक अध्यापिका स्मृति नियमित नहीं आ रही हैं। बीआरसी की जांच में सब ठीक मिला। कुर्सी और मेज एवं कालीन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया।
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हैरानी की बात यह थी कि तीनों स्कूलों के बच्चों को दूध नहीं दिया गया था, जबकि बुधवार को बच्चों को एमडीएम के साथ दूध भी देना है। बीएसए ने तीनों प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को कड़ी चेतावनी दी। कहा कि प्रत्येक बुधवार को हर हाल में बच्चों को दूध मिलना चाहिए। उन्होंने गांव में संपर्क कर बच्चों को स्कूल तक लाने का निर्देश दिया। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय सल्टौआ के निरीक्षण में अंश कालिक अध्यापिका स्म़ृति पाठक के नियमित नदारद रहने पर उन्हें अंतिम चेतावनी दी गई। बीआरसी सल्टौआ की जांच में वैसे सब कुछ ठीक मिला, मगर कुर्सी और मेज सहित फर्श पर चटाई बिछाने का निर्देश दिया।
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सबसे पहले बीएसए प्राइमरी विद्यालय नरायनपुर पहुंचे। यहां काफी दिनों से शिक्षकों और हेड मास्टर में विवाद चल रहा था। बीएसए ने दोनों का पक्ष सुना और चेतावनी दी कि अगर पठन-पाठन कोई बाधा आई तो सबके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हेड मास्टर को विद्यालय को बेहतर शैक्षणिक माहौल के लिए जिम्मेदार बताया। इस स्कूल का इंडिया मार्क टू हैंड पंप दो साल से खराब है और हैंडपंप से पीला पानी दे रहा है। विद्यालय में बाउंड्रीवाल नहीं बनी थी। इसके लिए प्रस्ताव देने को कहा। 83 बच्चों में 31 मौजूद थे। हेड मास्टर रामउग्रह, अंशु शुक्ला, कामिनी पांडेय, चक्रपाणि पांडेय मौजूद रहे।
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बच्चों को दूध नहीं मिला था। प्राथमिक विद्यालय अगया में 97 नामांकित बच्चों में से मात्र 10 बच्चे ही मौजूद थे। बीएसए ने हेड मास्टर सहित शिक्षकों को फटकार लगाई। सुरेंद्र मणि त्रिपाठी, रामकिशुन यादव, राम कृष्ण यादव, सीमा वर्मा व यशवीर सिंह मौजूद मिले। यहां पर भी बच्चों को दूध नहीं मिला था। प्राथमिक विद्यालय बांसापार में 116 बच्चों के सापेक्ष मात्र 34 बच्चे ही मिले। बच्चों को दूध नहीं मिला। शिक्षक प्रद्युम्न, उषा एवं राकेश कुमार मौजूद थे। इस स्कूल में बाउंड्रीवाल न होने पर बीएसए ने एसडीएम भानपुर से फोन पर बात की और प्रधान को ग्राम निधि से बाउंड्रीवाल का प्रस्ताव देने को कहा।
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के निरीक्षण में कई कक्षों में पंखा नहीं चल रहा था। गर्मी से बच्चे परेशान थे। बीएसए ने कई बच्चों से पढ़ाई और उनके भविष्य के बारे में पूछा, किसी ने डाक्टर तो किसी ने नर्स बनने की बात कही। बताया गया कि अंशकालिक अध्यापिका स्मृति नियमित नहीं आ रही हैं। बीआरसी की जांच में सब ठीक मिला। कुर्सी और मेज एवं कालीन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया।