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करोड़ों की संपत्ति ने ली हृदयराम, सुनीता की जान
basti
Updated Sun, 07 Jan 2018 12:02 AM IST
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अपराध्ा
- फोटो : amar ujala
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हर्रैया।
दोहरे हत्याकांड की जड़ हृदयराम चौहान के नाम महूघाट और पूना में करोड़ों की संपत्ति है। 20 वर्ष पहले ब्याहता मालती की मौत के बाद डेढ़ साल से हृदयराम के साथ पत्नी बनकर रह रही सुनीता की नजर करोड़ों की संपत्ति पर थी। इसके लिए अक्सर विवाद होता रहता था। शुक्रवार की रात को हुई घटना को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।
महूघाट निवासी 62 वर्षीय हृदयराम की पहली पत्नी से चार बेटे रामजतन, राजेंद्र, वीरेंद्र और राजेश हैं। दो बेटियां भी हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। नाती, पोते वाले हृदयराम पूना में रहकर राजगीर का कार्य करते थे। धीरे-धीरे काम बढ़ने पर बेटों को भी अपने साथ पूना लेते गए। सभी की लगन और मेहनत से राजगीर का कार्य ज्यादा बढ़ गया। बाद में घर बनाने का ठेका लेने लगे। आपस में मिल-जुलकर ठेका लेने से समय के साथ इन्होंने काफी संपत्ति अर्जित कर ली। पूना में आलीशान कोठी बनाने के बाद जमीन भी खरीद ली। पैतृक गांव महूघाट में भी जमीन और प्रापर्टी है। इसकी कीमत करोड़ों में है। संपत्ति की देखभाल के लिए हृदयराम घर पर रहने लगा। साथ में बारी-बारी से दो बहुएं भी बच्चों के साथ सेवा करने के लिए रहने लगीं। गांववालों में चर्चा के मुताबिक अंतर्मुखी स्वभाव वाले हृदयराम करीब डेढ़ साल पहले सुनीता के संपर्क में आए और घर पर बतौर पत्नी रखने लगे तो घरवालों ने शुरू में ही ऐतराज जताया। इसका कोई फर्क हृदयराम पर नहीं पड़ा और सुनीता के साथ ही रहने की जिद पर अड़ गए। पिता की जिद के आगे सभी पुत्रों ने सौतेली मां को तो स्वीकार कर लिया मगर सुनीता जब हृदयराम की जमीन और अन्य संपत्तियों को अपने नाम कराने का दबाव बनाने लगी तो रिश्तों में तल्खी आ गई। सूत्रों की मानें तो सुनीता अक्सर अपने बहन के घर जाकर रहती थी और हृदयराम पर जमीन और जायदाद बेचकर रकम अपने नाम जमा करने के लिए दबाव बनाने लगी। इसके बाद हृदयराम कुछ दिन पहले पूना का घर बेचने गया था। बेटों की मान मनौव्वल के बाद वह वापस महूघाट तो आ गया लेकिन शुक्रवार को फिर सौतेली मां के साथ खड़े पिता हृदयराम का पुत्रों से संपत्ति को लेकर झगड़ा हुआ। हृदयराम ने अपनी सारी संपत्ति सुनीता के नाम करने की धमकी देते हुए बेटों और बहुओं को घर से निकल जाने के लिए कहा। बात आगे बढ़ गई और अपनों के ही हाथों पिता और सौतेली मां को जान से हाथ धोना पड़ा। संपत्ति के लिए सगे पिता और सौतेली मां के हत्यारोपी पुत्रों को अपने जघन्य कृत्य पर कोई पछतावा नहीं है। यही नहीं घर पर मौजूद महिलाओं के चेहरों पर भी कोई शिकन नहीं दिखी।
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दोहरे हत्याकांड की जड़ हृदयराम चौहान के नाम महूघाट और पूना में करोड़ों की संपत्ति है। 20 वर्ष पहले ब्याहता मालती की मौत के बाद डेढ़ साल से हृदयराम के साथ पत्नी बनकर रह रही सुनीता की नजर करोड़ों की संपत्ति पर थी। इसके लिए अक्सर विवाद होता रहता था। शुक्रवार की रात को हुई घटना को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।
महूघाट निवासी 62 वर्षीय हृदयराम की पहली पत्नी से चार बेटे रामजतन, राजेंद्र, वीरेंद्र और राजेश हैं। दो बेटियां भी हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। नाती, पोते वाले हृदयराम पूना में रहकर राजगीर का कार्य करते थे। धीरे-धीरे काम बढ़ने पर बेटों को भी अपने साथ पूना लेते गए। सभी की लगन और मेहनत से राजगीर का कार्य ज्यादा बढ़ गया। बाद में घर बनाने का ठेका लेने लगे। आपस में मिल-जुलकर ठेका लेने से समय के साथ इन्होंने काफी संपत्ति अर्जित कर ली। पूना में आलीशान कोठी बनाने के बाद जमीन भी खरीद ली। पैतृक गांव महूघाट में भी जमीन और प्रापर्टी है। इसकी कीमत करोड़ों में है। संपत्ति की देखभाल के लिए हृदयराम घर पर रहने लगा। साथ में बारी-बारी से दो बहुएं भी बच्चों के साथ सेवा करने के लिए रहने लगीं। गांववालों में चर्चा के मुताबिक अंतर्मुखी स्वभाव वाले हृदयराम करीब डेढ़ साल पहले सुनीता के संपर्क में आए और घर पर बतौर पत्नी रखने लगे तो घरवालों ने शुरू में ही ऐतराज जताया। इसका कोई फर्क हृदयराम पर नहीं पड़ा और सुनीता के साथ ही रहने की जिद पर अड़ गए। पिता की जिद के आगे सभी पुत्रों ने सौतेली मां को तो स्वीकार कर लिया मगर सुनीता जब हृदयराम की जमीन और अन्य संपत्तियों को अपने नाम कराने का दबाव बनाने लगी तो रिश्तों में तल्खी आ गई। सूत्रों की मानें तो सुनीता अक्सर अपने बहन के घर जाकर रहती थी और हृदयराम पर जमीन और जायदाद बेचकर रकम अपने नाम जमा करने के लिए दबाव बनाने लगी। इसके बाद हृदयराम कुछ दिन पहले पूना का घर बेचने गया था। बेटों की मान मनौव्वल के बाद वह वापस महूघाट तो आ गया लेकिन शुक्रवार को फिर सौतेली मां के साथ खड़े पिता हृदयराम का पुत्रों से संपत्ति को लेकर झगड़ा हुआ। हृदयराम ने अपनी सारी संपत्ति सुनीता के नाम करने की धमकी देते हुए बेटों और बहुओं को घर से निकल जाने के लिए कहा। बात आगे बढ़ गई और अपनों के ही हाथों पिता और सौतेली मां को जान से हाथ धोना पड़ा। संपत्ति के लिए सगे पिता और सौतेली मां के हत्यारोपी पुत्रों को अपने जघन्य कृत्य पर कोई पछतावा नहीं है। यही नहीं घर पर मौजूद महिलाओं के चेहरों पर भी कोई शिकन नहीं दिखी।
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