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अभाव के प्रभाव देख हैरान रह गए डीएम

Sat, 18 Jun 2016 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 18 Jun 2016 12:15 AM IST
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DM realises crisis affect in jail
जिला जेल का डीएम नरेंद्र सिंह पटेल और एसपी कृपा शंकर सिंह ने किया निरीक्षण। - फोटो : रमेश मिश्र
बस्ती। जिला कारागार में क्षमता से कई गुना बंदियों की तादाद बढ़ने से पैदा हुई अव्यवस्था का डीएम नरेंद्र सिंह पटेल व एसपी कृपाशंकर सिंह ने शुक्रवार को जायजा लिया। जिला प्रोवेशन अधिकारी प्रदीप कुमार और प्रभारी जेल अधीक्षक/एसडीएम (प्रशिक्षु) के साथ आला-अफसरों का दल दोपहर करीब एक बजे जेल के भीतर जा पहुंचा। 
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11 जून को जेल में नहाने के पानी के लिए दो बंदियों में घमासान हुआ। जिसमें एक बंदी की बृहस्पतिवार को मौत होने के बाद भी प्रशासनिक मशीनरी के कान पर जूं तक नहीं रेंगा। इस उदासीनता और इसके चलते बंदियों में बंढ रहे आक्रोश को अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में प्रकाशित रिपोर्ट में जेल के भीतर के हालात को प्रमुखता से उजागर किया तब जाकर अफसरों की तंद्रा टूटी। 
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नतीजन दोपहर करीब एक बजे भारी पुलिस बल के साथ पहुंची अफसरों की टीम जेल में जा धमकी। पहुंचते ही बैरकों की तलाशी लेना शुरू किया। बंदियों के रहने के कक्ष के अलावा भंडार, रसोई, अस्पताल, स्नानागार आदि का भी बारीकी से मुआयना करने के बाद जेलर बीके मिश्र के साथ बैठक किया। जिसमें संख्या बढ़ने के चलते आ रही समस्याओं की चर्चा हुई और उनका निदान क्या हो सकता है,इस संभावना पर विचार किया गया। 
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रिहाई से कम करेंगे दबाव ः ओवर क्राउड का दबाव कम करने के लिए उत्तर प्रदेश बंदी प्रोबेशन एक्ट और सीआरपीसी की धारा 1973 के प्रावधान 432 का इस्तेमाल करके हर छह माह में उम्रदराज बंदियों को शर्तों के आधार पर रिहा करने का अधिकार है। इसका इस्तेमाल करते हुए यहां के तीन बंदियों मिथिलेश तिवारी, चिंता और दिलीप कुमार के रिहा किए जाने की कवायद शुरू हो गई है। रिहाई नामित करने वाली अधिकार प्राप्त कमेटी कमेटी के अध्यक्ष डीएम, एसपी, जेल अधीक्षक और प्रोवेशन अधिकारी ने तीनों से बयान लिया। डीएम ने बताया कि यह रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। अनुमति मिलते ही तीनों रिहा कर दिए जाएंगे। 


डीएम नरेंद्र ‌िससिंह पटेल ने बताया ‌कि बस्ती के साथ संतकबीरनगर जिले के बंदियों को भी यही रखने की वजह से ओवर  क्राउडिंग र्हु है। जेल में जितने सुविधा और संसाधन उपलब्ध हैँ,उसमें भी  बेहतर इंतजाम पाया गया। रही बात संख्या घटाने की तो संतकबीरनगर जिले की  निर्माणाधीन जेल का काम पूरा होते ही दिक्कत खत्म हो जाएगी। 
 
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