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ननिहाल पहुंचे दिव्यांशी, प्रिंस, छलकीं आंखें

Sat, 18 Nov 2017 11:44 PM IST
basti
basti Updated Sat, 18 Nov 2017 11:44 PM IST
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divyanshi and prince reached matrernal house
घ्‍ाटना - फोटो : amar ujala
परशुरामपुर। 
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हर्रैया थाना क्षेत्र के बसेवा पांडेय गांव में शुक्रवार शाम अज्ञात कारणों से लगी आग में मां-बेटे के जलने और बचाने में झुलसने के कारण हुई पिता की मौत से दो मासूम यतीम हो गए। ननिहाल पक्ष दोनों बच्चों को अपने यहां ले आया है। उनके पहुंचते ही पास-पड़ोस के लोगों की भी आंखें छलक पड़ीं।

 बसेवा पांडेय में लगी आग के पीछे कारण क्या था। यह तो रहस्य ही बना हुआ है लेकिन इलाज के दौरान पति नंदकुमार ने भी दम तोड़ा दिया। पति-पत्नी के रूप में रह रहे ललिता और नंद कुमार का जीवन किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। दोनों पति-पत्नी के रूप में रहते थे। परशुरामपुर थाना क्षेत्र के बैरागपुर गांव के बाबूराम पांडे ने करीब 11 साल पहले बसेवा पांडेय गांव के रविंद्र कुमार से ललिता की शादी की थी। दोनों से दो बच्चे दिव्यांशी (8) और प्रिंस (5) पैदा हुए। 2012 में सांप के डंसने से रविंद्र की मौत हो गई। विधवा ललिता देवी कैसे और किन परिस्थितियों में परशुरामपुर क्षेत्र के निपनिया निवासी नंद कुमार के संपर्क में आई यह भी रहस्य है। नंद कुमार का आना-जाना ललिता के घर हो गया तो दोनों पति-पत्नी की तरह बसेवा पांडेय गांव में रहने लगे। इस बीच छह माह पहले ललिता तथा नंद कुमार से एक बच्चे का जन्म हुआ। इसको अर्पित नाम दिया गया। शुक्रवार की शाम ललिता अपने बच्चे अर्पित के साथ कमरे में सो रही थी, तभी कमरे में लगी आग में दोनों की झुलसने से मौत हो गई। बुझाने और बचाने के प्रयास में नंद कुमार भी 70 फीसदी जल गया। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान शुक्रवार की देर रात उसने भी दम तोड़ दिया। प्रथम दृष्टया पुलिस भी मामले को हादसा मानकर चल रही है। लेकिन घर पर ही मौजूद ललिता के पूर्व पति के दो बच्चे दिव्यांशी और प्रिंस का बचकर निकलना तथा पक्के मकान में इस कदर आग फैल जाना कि उसमें से कोई निकलकर भाग नहीं सका। यह बात भी सभी को चौंका रही है। कारण जो भी रहा हो लेकिन माता-पिता को खो चुके दिव्यांशी और प्रिंस का क्या होगा। इसे लेकर सभी चिंतित हैं। फिलहाल, बाबूराम पांडे दोनों बच्चों दिव्यांशी और प्रिंस को बसेवा से अपने घर बैरागपुर ले आए हैं।
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