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बाल श्रम रोकने का आह्वान

अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 13 Jun 2016 01:02 AM IST
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विकास भवन के सभागार में अंतरराष्ट्रीय बालश्रम विरोध दिवस के अवसर पर संबोधित करते सीडीओ सोबरन सिंह।
विकास भवन के सभागार में अंतरराष्ट्रीय बालश्रम विरोध दिवस के अवसर पर संबोधित करते सीडीओ सोबरन सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। विकास भवन के सभागार में रविवार को अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम विरोध दिवस पर जनजागरण और जागरूकता विषय पर गोष्ठी का आयोजन हुआ। सीडीओ सोबरन सिंह ने कहा कि बाल श्रम गरीबी नहीं, बल्कि गरीबों के शोषण की देन है। कहा कि बाल श्रम गरीबी को कम नहीं करता बल्कि गरीबी और बढ़ाता है।
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बाल श्रम रोजगार नहीं देता, वयस्कों की बेरोजगारी बढ़ाता है। कहा कि बाल श्रम नियोजकों की दया नहीं, सस्ता श्रम और शोषण की देन है। इस लिए आज हम सभी को बाल श्रम रोकने के लिए संकल्प लेना है। कहा कि बाल श्रम रोकना केवल श्रम विभाग का ही कार्य नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का दायित्व भी है। इसे सिर्फ जनजागरण और जागरूकता के जरिए ही रोका जा सकता है। उन्होंने इसके लिए स्कूली बच्चों के, श्रम विभाग, समाज कल्याण विभाग सहित इस कार्य में लगे एनजीओ को रैलियों और गोष्ठियों के जरिए जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है। 


एडीएम राकेश कुमार सिंह ने कहा कि बाल श्रमिकों को जब तक मुख्य धारा से नहीं जोड़ा जाएगा तब तक बाल श्रम की समस्या बनी रहेगी। जरूरत है कि जनजागरण और जागरूकता की। एडीएम ने इसके लिए सभी अपील की, कि जहां भी बाल श्रमिक दिखाई दे, पहले तो खुद उसे रोकने का प्रयास करे, उसके बाद इसकी जानकारी श्रम विभाग को दें। कहा कि छह से 14 साल के बच्चों को श्रम करने से रोकने के लिए समाज के सभी वर्गो को सामने आना होगा। कामरेड केके तिवारी ने बाल श्रम रोक न पाने के लिए सरकारी व्यवस्था को जिम्मेदार बताया। सहायक श्रम उपायुक्त गौतम गिरी ने बाल श्रम को रोकने के लिए विभाग की ओर से उठाए जा रहे, कदमों की जानकारी दी। 

कहा कि बाल श्रम को रोकने के लिए सजा तक का प्रावधान है। कहा कि विभाग की ओर से घरेलू और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में  बाल श्रम को रोकने के लिए कार्रवाई कर रहा है। गोष्ठी में चाइल्ड होम न होने का मामला भी उठा और कहा गया कि अगर किसी बाल श्रमिक को रखना और उसे मुख्य धारा से जोड़ना हो तो कैसे जोड़ा जाए? 
 

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