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जिसकी हत्या में कई लोगों पर केस दर्ज हुआ, वह मिला जिंदा
बस्ती (ब्यूरो)
Updated Mon, 12 Feb 2018 12:21 AM IST
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जिसकी हत्या में कई लोगों पर केस दर्ज हुआ, वह मिला जिंदा
- फोटो : अमर उजाला
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भानपुर (बस्ती)। जिस दामाद की हत्या के आरोप में ससुराल पक्ष के छह लोग दो साल से परेशान थे, वह पुलिस की विवेचना के दौरान जीवित पकड़ा गया है। पुलिस युवक को सोमवार को न्यायालय में पेश करेगी। फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाले पिता के खिलाफ कार्रवाई की कवायद भी शुरू कर दी गई है। मामला वर्ष 2016 का सोनहा थाना क्षेत्र के परसौना गांव से जुड़ा है।
सोनहा पुलिस के मुताबिक परसौना गांव के रामतेज चौधरी ने अपने बेटे विजय कुमार की हत्या के आरोप में ससुराल वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
इस मामले की जांच सोनहा पुलिस कर रही है। रामतेज ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि उनके बेटे विजय कुमार की शादी वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के बालेडीहा गांव के जयराम की पुत्री मीरा से 2009 में हुई थी। इसके बाद उसका आना - जाना लगा रहा। रामतेज का आरोप था कि मीरा स्वतंत्र विचार की थी। वह अक्सर अपनी मर्जी से घर से निकल कर चली जाती और देर शाम लौटती थी। पूछने पर झगड़ा करने लगती थी। वह ससुराल में नहीं रहना चाहती थी। तहरीर में उन्होंने यह भी कहा है कि 10 जून 2016 को विजय के ससुराल से जयराम, रामसागर, बुद्धिसागर, राजमन, मीरा, कुसुम उसके घर आए। बेटा विजय को रोजगार कराने की बात कहकर अपने साथ ले गए। जब वह विजय से बात करना चाहते थे तो उनकी बात टाल दी जाती थी। पूछने पर उसका पता भी नहीं बताते थे। इन्हीं बातों से परेशान होकर विजय की हत्या की आशंका जताते हुए कोर्ट के माध्यम से जुलाई 2016 मुकदमा दर्ज कराया।
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सोनहा पुलिस के मुताबिक परसौना गांव के रामतेज चौधरी ने अपने बेटे विजय कुमार की हत्या के आरोप में ससुराल वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
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इस मामले की जांच सोनहा पुलिस कर रही है। रामतेज ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि उनके बेटे विजय कुमार की शादी वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के बालेडीहा गांव के जयराम की पुत्री मीरा से 2009 में हुई थी। इसके बाद उसका आना - जाना लगा रहा। रामतेज का आरोप था कि मीरा स्वतंत्र विचार की थी। वह अक्सर अपनी मर्जी से घर से निकल कर चली जाती और देर शाम लौटती थी। पूछने पर झगड़ा करने लगती थी। वह ससुराल में नहीं रहना चाहती थी। तहरीर में उन्होंने यह भी कहा है कि 10 जून 2016 को विजय के ससुराल से जयराम, रामसागर, बुद्धिसागर, राजमन, मीरा, कुसुम उसके घर आए। बेटा विजय को रोजगार कराने की बात कहकर अपने साथ ले गए। जब वह विजय से बात करना चाहते थे तो उनकी बात टाल दी जाती थी। पूछने पर उसका पता भी नहीं बताते थे। इन्हीं बातों से परेशान होकर विजय की हत्या की आशंका जताते हुए कोर्ट के माध्यम से जुलाई 2016 मुकदमा दर्ज कराया।
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