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फोटो... संयमित खुद नहीं,पुलिस पर ठीकरा

Sun, 29 Jul 2018 10:49 PM IST
Updated Sun, 29 Jul 2018 10:49 PM IST
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फोटो... संयमित खुद नहीं,पुलिस पर ठीकरा
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संयमित खुद नहीं, पुलिस पर ठीकरा
हेलमेट, सीट बेल्ट छोड़िए, साइड देने में कोताही
बाइक-ऑटो वालों से ध्वस्त हुई ट्रैफिक व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। खराब यातायात व्यवस्था का ठीकरा सिर्फ पुलिस-प्रशासन पर फोड़ना इसलिए गलत है क्योंकि लोग खुद मामूली एहतियात बरतने में कोताही करते हैं। बाइक चलाते समय हेलमेट लगाने की बात हो या ट्रैफिक सिगनल पर लाल-नीली-पीली बत्ती देखकर रुकने और चलने को लेकर चौक पर चिकचिक का सवाल हो। सभी में पहली चूक पब्लिक की पाई जाती है।
यकीन न आए तो कंपनीबाग चौराहे पर दिन में किसी भी वक्त 10 मिनट खड़े होकर खुद देख लें। शहर के एक मात्र लालबत्ती वाले चौराहे पर बिना-लाल नीला देखे कभी महुली रोड से दनदनाते कोई शहर में एंट्री मारते दिखेगा तो कभी कटरा फव्वारा तिराहे से आकर कचहरी की तरफ मुड़ लेता है। भले ही चौकी पर मौजूद पुलिस टीमें व चौराहे के चारों ओर खड़े होमगार्ड्स चिल्लाते रहें, मगर नियम को ताक पर रखकर हेकड़ी दिखाते हुए गुजरने वालों को शिकन तक नहीं होती। सीओ ट्रैफिक आलोक सिंह के अनुसार चालान-जुर्माना भी अब लोग नजरअंदाज करते हैं। इससे चौराहे की व्यवस्था ही नहीं, शहर में भी समस्याएं खड़ी होती हैं।
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जगह-जगह जाम की सबसे बड़ी वजह
भीगे मौसम में चौराहों पर जाम कितना कष्टकारी है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। मगर यहां के चौराहों पर अक्सर यह स्थिति देखी जाती है। आगे बिना साइड-सुविधा के कहीं कोई भारी वाहन अटकाए दिखता है तो कभी बेतरतीब पार्किंग से जाम लग जा रहे हैं। गलियों में बड़े वाहन घुसने से बाइक वालों को समस्या आती है। प्रत्येक साल नवंबर में सड़क सुरक्षा अभियान चलाया जाता है। इसमें यातायात पुलिस, परिवहन विभाग और प्रशासन बाइक, कार, बस, स्कूल बस, आदि चलाते समय सावधानियां और नियम-कानून से आगाह करता रहता है। लेकिन असर न के बराबर दिखता है।
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स्नातक छात्र आदर्श पांडेय का कहना है कि ट्रैफिक नियम भंग करना खुद के लिए ही नहीं सामने वाले की जान भी खतरे में डाल देता है। सेफ ड्राइविंग करने वाला भी हादसे का शिकार हो जाता है। जबकि वह ट्रैफिक रूल्स के सारे नियमों का पालन भी कर रहा होता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश प्रताप सिंह के अनुसार पुलिस या परिवहन विभाग के निरीक्षण का मकसद केवल नौकरी की जवाबदेही तक होता है। मगर नियम तोड़ने वाले की जान पर जोखिम होता है। इसलिए जान बचाने का उपाय पहले से किया जाना जरूरी होता है।
स्कूटी लेकर कॉलेज जाने वाली बीएएसी छात्रा राजश्री सिंह कहती हैं कि नियम-कानून अपनी जगह हैं लेकिन यातायात नियम का पालन करना खुद के जान की हिफाजत जैसा है। गाड़ी की देखरेख से पहले सुरक्षा का ख्याल होना चाहिए। इसमें कोई कोताही ठीक नहीं होती है।

इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के माहिर कारीगर शंभूनाथ मिश्र का कहना है कि चौराहे, हाईवे या अन्य जगह से होकर नियम-कानून रौंदते हुए मोटर-बाइक लेकर जाते देखा जाता है। भले ही वे इसमें शान समझते हों लेकिन उन्हें शर्म आनी चाहिए। नियम विरुद्ध कुछ भी ठीक नहीं है।

बाक्स...
तोड़ने पर लग सकता है ये जुर्माना
बिना हेलमेट के गाड़ी चलाने पर 500 रुपये
बिना रजिस्ट्रेशन गाड़ी चलाना में 2000 रुपये
बिना सीट बेल्ट के ड्राइविंग पर 100 रुपये
पीयूसी के बिना गाड़ी चलाने पर 100 रुपये
प्रेशर हॉर्न का प्रयोग करने पर 100 रुपये
टू-व्हीलर पर तीन सवारी बैठाने पर 100 रुपये
शराब पीकर गाड़ी चलाने पर 2000 रुपये
बिना लाइसेंस गाड़ी चलने पर 500 रुपये
इंश्योरेंस के बिना ड्राइविंग करने पर 1000 रुपये
सफेद लिमिट क्रॉस करने पर 400 जुर्माना
ड्राइविंग के वक़्त मोबाइल पर बात करने में 1000 रुपये
इंस्पेक्टर से दुर्व्यवहार करने पर 1000 रुपये
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