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मां-बाप से नाराज युवक नदी में कूदा
Updated Mon, 24 Jul 2017 05:26 PM IST
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बस्ती। घर से नाराज युवक के अमहट पुल से कुआनों नदी में छलांग लगाने की सूचना मिलते ही हड़कंप मच गया। फोरलेन पर नगर थाने की सीमा में आने वाले स्थान से नदी में कूदने की सूचना पर पुलिस हरकत में आई। गोताखोरों की मदद से 15 घंटे तक ढूंढने के बावजूद उसका पता नहीं लगा। देरशाम तक तलाश जारी थी।
नगर थाने के पोखरा बाजार के निकट स्थित रमवापुर कला निवासी दयाराम की चार संतानों में तीन बेटियों व एक 20 वर्षीय पुत्र मनीष कुमार था। दयाराम का कहना है कि रविवार दोपहर मनीष नए कपड़े खरीदने के लिए मां से रुपये मांग रहा था। मां ने उसे पास रखे छह सौ रुपये दिए लेकिन वह एक हजार मांग रहा था। पिता को इसकी जानकारी हुई तो उसने कहा कि सोमवार को वह खाते से रुपये निकालकर लाएगा तो चार सौ दे देगा। लेकिन मनीष कुमार को लगा कि जानबूझकर उसे पैसे नहीं दिए जा रहे हैं। इससे नाराज होकर वह अपनी बाइक लेकर दोहर ढाई बजे घर से निकला।
अमहट पर मौजूद उसके जिगरी दोस्त दुर्गेश का कहना है कि पौने तीन बजे मनीष ने उसके पास फोन किया। उसने बताया कि अमहट नए पुल पर अपनी बाइक व मोबाइल छोड़कर नदी में कूदने जा रहा है। पुलिस के अनुसार पुल पर लावारिश पड़ी बाइक देखकर फुटहिया के प्रधान ने चौकी पर सूचना दी। जिसके बाद पुलिस ने उसे बरामद किया। सोमवार को सुबह से ही पांच गोताखोर उसे तलाश करने में जुटे। दो बजे तक खोजबीन के बावजूद कुछ पता नहीं चला। एसओ नगर अनिल सिंह का कहना है कि युवक को ढूढने का प्रयास जारी है।
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बेटा आत्महत्या नहीं कर सकता
गुमशुदा मनीष के पिता दयाराम के गले यह बात नहीं उतर रही है कि उनका बेटा नदी में कूदकर आत्महत्या करेगा। पिता को यकीन है कि मनीष घर के लोगों को तंग करने के लिए बाइक और मोबाइल पुल पर रखकर किसी वाहन पर बैठकर भाग गया होगा। उसे ढूंढकर थक चुके गोताखोरों ने भी यही आशंका जाहिर की। एक गोताखोर ने अमर उजाला से बताया कि यदि वह नदी में कूदा होता तो चप्पल या जूते जरूर मिले होते। उसने दूसरे कई निशान बताए जिससे लगता है कि कुछ बात और है।
पंद्रह दिन में दांव पर पांचवीं जान
जीवनदायिनी कही जाने वाली कुआनों काल बन गई है। पंद्रह दिन के भीतर चार जान ले चुकी इस नदी में रविवार को पांचवीं जान फंस गई। बमुश्किल एक किलोमीटर नदी से चार लाशें निकाली जा चुकी हैं। भले ही मनीष कुमार के सुरक्षित बचने की गुंजाइश अभी खत्म न हुई हो लेकिन यह उसके जिंदा रहने की उम्मीद सिर्फ इस शर्त पर है कि वह नदी में कूदा ही नहीं। यदि उसने वास्तव में नदी में छलांग लगाई होगी तो जिंदा बचने की उम्मीद नहीं के बराबर है।
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नगर थाने के पोखरा बाजार के निकट स्थित रमवापुर कला निवासी दयाराम की चार संतानों में तीन बेटियों व एक 20 वर्षीय पुत्र मनीष कुमार था। दयाराम का कहना है कि रविवार दोपहर मनीष नए कपड़े खरीदने के लिए मां से रुपये मांग रहा था। मां ने उसे पास रखे छह सौ रुपये दिए लेकिन वह एक हजार मांग रहा था। पिता को इसकी जानकारी हुई तो उसने कहा कि सोमवार को वह खाते से रुपये निकालकर लाएगा तो चार सौ दे देगा। लेकिन मनीष कुमार को लगा कि जानबूझकर उसे पैसे नहीं दिए जा रहे हैं। इससे नाराज होकर वह अपनी बाइक लेकर दोहर ढाई बजे घर से निकला।
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अमहट पर मौजूद उसके जिगरी दोस्त दुर्गेश का कहना है कि पौने तीन बजे मनीष ने उसके पास फोन किया। उसने बताया कि अमहट नए पुल पर अपनी बाइक व मोबाइल छोड़कर नदी में कूदने जा रहा है। पुलिस के अनुसार पुल पर लावारिश पड़ी बाइक देखकर फुटहिया के प्रधान ने चौकी पर सूचना दी। जिसके बाद पुलिस ने उसे बरामद किया। सोमवार को सुबह से ही पांच गोताखोर उसे तलाश करने में जुटे। दो बजे तक खोजबीन के बावजूद कुछ पता नहीं चला। एसओ नगर अनिल सिंह का कहना है कि युवक को ढूढने का प्रयास जारी है।
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बेटा आत्महत्या नहीं कर सकता
गुमशुदा मनीष के पिता दयाराम के गले यह बात नहीं उतर रही है कि उनका बेटा नदी में कूदकर आत्महत्या करेगा। पिता को यकीन है कि मनीष घर के लोगों को तंग करने के लिए बाइक और मोबाइल पुल पर रखकर किसी वाहन पर बैठकर भाग गया होगा। उसे ढूंढकर थक चुके गोताखोरों ने भी यही आशंका जाहिर की। एक गोताखोर ने अमर उजाला से बताया कि यदि वह नदी में कूदा होता तो चप्पल या जूते जरूर मिले होते। उसने दूसरे कई निशान बताए जिससे लगता है कि कुछ बात और है।
पंद्रह दिन में दांव पर पांचवीं जान
जीवनदायिनी कही जाने वाली कुआनों काल बन गई है। पंद्रह दिन के भीतर चार जान ले चुकी इस नदी में रविवार को पांचवीं जान फंस गई। बमुश्किल एक किलोमीटर नदी से चार लाशें निकाली जा चुकी हैं। भले ही मनीष कुमार के सुरक्षित बचने की गुंजाइश अभी खत्म न हुई हो लेकिन यह उसके जिंदा रहने की उम्मीद सिर्फ इस शर्त पर है कि वह नदी में कूदा ही नहीं। यदि उसने वास्तव में नदी में छलांग लगाई होगी तो जिंदा बचने की उम्मीद नहीं के बराबर है।