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बस्ती में हाइटेंशन तार की चपेट में आने से तीन की मौत
basti
Updated Wed, 06 Jun 2018 11:41 PM IST
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घटना के बाद मौके पर पहुंचे डीएम और विधायक की पुत्री।
- फोटो : amar ujala
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गौर (बस्ती)। जिले के कप्तानगंज क्षेत्र के मिरवापुर गांव में बुधवार शाम करीब पौने सात बजे बिजली के तार खींचने के दौरान बगल से गुजर रही हाईटेंशन लाइन झटका लगने से टूट गई। उसकी चपेट में आने से तीन मजदूरों की झुलसकर मौत हो गई।
मिरवापुर गांव में दीनदयाल ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत विद्युत आपूर्ति के लिए एक सप्ताह से तार खींचने का कार्य चल रहा था। बुधवार शाम को पैकोलिया क्षेत्र के बेलघाट निवासी मजदूर रामनिवास (25), सूर्यभान (26) व राजू (28) खंभे पर चढ़कर लाइन खींच रहे थे। उसी दौरान उनका तार सौ मीटर दूर स्थित हाईटेंशन लाइन से छू गया, जिससे तार आपस में टकराकर टूट गए। खंभे में करंट उतरने से तीनों मजदूर जलते हुए नीचे गिर गए। लोगों ने बताया कि मजदूर करीब 15 मिनट तक जलते रहे और देखते ही देखते उनकी मौत हो गई। हादसे के समय बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए पर कोई उन्हें बचाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। घटना की जानकारी होते ही उपकेंद्र से लाइन काटी गई इसके बाद लोगों ने मृतकों का अधजला शरीर निकाला।
सूचना के बाद कप्तानगंज पुलिस प्रभारी मौके पर पहुंचे और शवों को कब्जे में लिया। बेलघाट के ग्राम प्रधान रामरतन यादव ने बताया कि जिन तीनों युवकों की मौत हुई है। वह बेहद गरीब परिवार के हैं और मजदूरी करके घर का खर्च चलाते थे। इस दर्दनाक घटना से पूरे गांव में मातम छा गया है। घटना की सूचना मिलते ही प्रभारी डीएम व सीडीओ अरविंद कुमार पांडेय, एसपी दिलीप कुमार घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने बिजली निगम के अधिकारियों से मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। सूचना मिलने पर विधायक सीए चंद्रप्रकाश शुक्ल की पुत्री भी वहां पहुंची हैं।
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तहरीर में ठेकेदार के नाम को लेकर परिजन और पुलिस में झड़प
बस्ती। बिजली के तार खींचते समय मौत के मुंह में समाए तीनों मजदूरों के परिजनों और ग्रामीणों में तहरीर में ठेकेदार के नाम को शामिल करने को लेकर झड़प हो गई। जिससे गुस्साए ग्रामीणों ने बुधवार रात कप्तानगंज थाने पर जमकर हंगामा किया।
रात करीब दस बजे मृतक युवकों के परिजन और ग्रामीण थाने पहुंचे और विद्युतीकरण का काम कराने वाले ठेकेदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तहरीर देने लगे तो प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार दुबे ने रिपोर्ट में ठेकेदार का नाम दर्ज करने से इनकार कर दिया। इस पर परिजन भड़क गए और उनकी पुलिसकर्मियों से नोकझोंक हो गई। इस पर गुस्साए ग्रामीणों ने रिपोर्ट दर्ज होने के बाद ही थाने से हटने की घोषणा कर दी। सूचना मिलने पर कलवारी सीओ अरविंद कुमार वर्मा थाने पहुंचे ओर परिजनों को समझाकर तहरीर ले ली। मुकदमा देर रात तक दर्ज नहीं हुआ है।
रात में बिछाई जा रही ट्यूबवेल की लाइन
बस्ती। खेत तक पानी पहुंचे। इसकी व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए जिले में ट्यूबवेल स्थापित हो रहे हैं। इन ट्यूबवेलों के लिए मीरवापुर गांव में बिजली तार बिछाने का काम चल रहा था कि इसी बीच 11 हजार की लाइन की चपेट में आने से तीन श्रमिक काल के गाल में समा गए। इस सूचना के बाद बिजली विभाग में भी हड़कंप मच गया है। जिम्मेदार इस मामले से पल्ला झाड़ने में जुटे हैं।
बिजली निगम में लाइन बिछाने का काम ठेके पर दिया जाता है। इस काम को निगम मुख्यालय से ही ठेका कंपनी से अनुबंध करती है और उसे ही सारा सामान वहीं से मिल जाता है। हालांकि, यह नियम है कि कार्य का समय दिन होगा, मगर कभी कभार विषम परिस्थितियों में रात को भी कार्य कराया जाता है। इन स्थितियों में कंपनी के अधिकारी मौके पर होते हैं, जबकि संबंधित इलाके के उपकेंद्र से लिखित देकर शटडाउन लिया जाता है। यही नहीं मजदूरों का बीमा भी कंपनी कराती है, जिससे आपात स्थिति में संबंधित को सहायता दी जाए।
निगम के अधिकारियों की मानें तो यहां कंपनी ने यह काम पंकज सिंह नामक ठेकेदार को दे रखा है। बुधवार की शाम उसके श्रमिक तार बिछा रहे थे कि इसी बीच 11 हजार वोल्ट की लाइन टूट कर दो मजदूरों पर गिरा और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। तीसरा मजदूर जान बचाने के लिए भागा, मगर थोड़ी दूरी पर ही 11 हजार लाइन के तार का दूसरा हिस्सा भी वहां गिरा था, जिसमें उलझ कर तीसरे की भी मौत हो गई।
अधिशासी अभियंता ग्रामीण छोटे लाल ने कहा कि तीन मजदूरों की मौत हुई है, लेकिन इसके लिए निगम जिम्मेदार नहीं है। क्योंकि वहां रात के समय कार्य होना ही नहीं चाहिए था। यही नहीं कंपनी के लोग वहां न तो खुद मौजूद थे और न उपकेंद्र से शटडाउन ही लिया गया, जो नियम विरुद्ध है। कंपनी मजदूरों को क्षति पूर्ति तो देगी ही। निगम उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराएगा।
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मिरवापुर गांव में दीनदयाल ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत विद्युत आपूर्ति के लिए एक सप्ताह से तार खींचने का कार्य चल रहा था। बुधवार शाम को पैकोलिया क्षेत्र के बेलघाट निवासी मजदूर रामनिवास (25), सूर्यभान (26) व राजू (28) खंभे पर चढ़कर लाइन खींच रहे थे। उसी दौरान उनका तार सौ मीटर दूर स्थित हाईटेंशन लाइन से छू गया, जिससे तार आपस में टकराकर टूट गए। खंभे में करंट उतरने से तीनों मजदूर जलते हुए नीचे गिर गए। लोगों ने बताया कि मजदूर करीब 15 मिनट तक जलते रहे और देखते ही देखते उनकी मौत हो गई। हादसे के समय बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए पर कोई उन्हें बचाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। घटना की जानकारी होते ही उपकेंद्र से लाइन काटी गई इसके बाद लोगों ने मृतकों का अधजला शरीर निकाला।
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सूचना के बाद कप्तानगंज पुलिस प्रभारी मौके पर पहुंचे और शवों को कब्जे में लिया। बेलघाट के ग्राम प्रधान रामरतन यादव ने बताया कि जिन तीनों युवकों की मौत हुई है। वह बेहद गरीब परिवार के हैं और मजदूरी करके घर का खर्च चलाते थे। इस दर्दनाक घटना से पूरे गांव में मातम छा गया है। घटना की सूचना मिलते ही प्रभारी डीएम व सीडीओ अरविंद कुमार पांडेय, एसपी दिलीप कुमार घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने बिजली निगम के अधिकारियों से मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। सूचना मिलने पर विधायक सीए चंद्रप्रकाश शुक्ल की पुत्री भी वहां पहुंची हैं।
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तहरीर में ठेकेदार के नाम को लेकर परिजन और पुलिस में झड़प
बस्ती। बिजली के तार खींचते समय मौत के मुंह में समाए तीनों मजदूरों के परिजनों और ग्रामीणों में तहरीर में ठेकेदार के नाम को शामिल करने को लेकर झड़प हो गई। जिससे गुस्साए ग्रामीणों ने बुधवार रात कप्तानगंज थाने पर जमकर हंगामा किया।
रात करीब दस बजे मृतक युवकों के परिजन और ग्रामीण थाने पहुंचे और विद्युतीकरण का काम कराने वाले ठेकेदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तहरीर देने लगे तो प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार दुबे ने रिपोर्ट में ठेकेदार का नाम दर्ज करने से इनकार कर दिया। इस पर परिजन भड़क गए और उनकी पुलिसकर्मियों से नोकझोंक हो गई। इस पर गुस्साए ग्रामीणों ने रिपोर्ट दर्ज होने के बाद ही थाने से हटने की घोषणा कर दी। सूचना मिलने पर कलवारी सीओ अरविंद कुमार वर्मा थाने पहुंचे ओर परिजनों को समझाकर तहरीर ले ली। मुकदमा देर रात तक दर्ज नहीं हुआ है।
रात में बिछाई जा रही ट्यूबवेल की लाइन
बस्ती। खेत तक पानी पहुंचे। इसकी व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए जिले में ट्यूबवेल स्थापित हो रहे हैं। इन ट्यूबवेलों के लिए मीरवापुर गांव में बिजली तार बिछाने का काम चल रहा था कि इसी बीच 11 हजार की लाइन की चपेट में आने से तीन श्रमिक काल के गाल में समा गए। इस सूचना के बाद बिजली विभाग में भी हड़कंप मच गया है। जिम्मेदार इस मामले से पल्ला झाड़ने में जुटे हैं।
बिजली निगम में लाइन बिछाने का काम ठेके पर दिया जाता है। इस काम को निगम मुख्यालय से ही ठेका कंपनी से अनुबंध करती है और उसे ही सारा सामान वहीं से मिल जाता है। हालांकि, यह नियम है कि कार्य का समय दिन होगा, मगर कभी कभार विषम परिस्थितियों में रात को भी कार्य कराया जाता है। इन स्थितियों में कंपनी के अधिकारी मौके पर होते हैं, जबकि संबंधित इलाके के उपकेंद्र से लिखित देकर शटडाउन लिया जाता है। यही नहीं मजदूरों का बीमा भी कंपनी कराती है, जिससे आपात स्थिति में संबंधित को सहायता दी जाए।
निगम के अधिकारियों की मानें तो यहां कंपनी ने यह काम पंकज सिंह नामक ठेकेदार को दे रखा है। बुधवार की शाम उसके श्रमिक तार बिछा रहे थे कि इसी बीच 11 हजार वोल्ट की लाइन टूट कर दो मजदूरों पर गिरा और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। तीसरा मजदूर जान बचाने के लिए भागा, मगर थोड़ी दूरी पर ही 11 हजार लाइन के तार का दूसरा हिस्सा भी वहां गिरा था, जिसमें उलझ कर तीसरे की भी मौत हो गई।
अधिशासी अभियंता ग्रामीण छोटे लाल ने कहा कि तीन मजदूरों की मौत हुई है, लेकिन इसके लिए निगम जिम्मेदार नहीं है। क्योंकि वहां रात के समय कार्य होना ही नहीं चाहिए था। यही नहीं कंपनी के लोग वहां न तो खुद मौजूद थे और न उपकेंद्र से शटडाउन ही लिया गया, जो नियम विरुद्ध है। कंपनी मजदूरों को क्षति पूर्ति तो देगी ही। निगम उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराएगा।