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बस्ती के आधार कार्ड पर दूसरे जिलों में राशन का खेल
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बस्ती के आधार कार्ड पर दूसरे जिलों में राशन का खेल
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। ऑनलाइन आधार कार्ड प्राप्त करने की सरल व्यवस्था का लाभ जहां लोगों को मिल रहा है वहीं इसकी आड़ में अनाज माफिया भी चांदी काट रहे हैं। अपने जिले के आधार कार्ड का कई जिलों में डुप्लीकेट तैयार कर उसका उपयोग उसी नाम से राशन कार्ड बनवाने में कर लिया गया है। यह गड़बड़ी डीएसओ के आधार कार्ड लिंक के लिए प्रयोग किए जाने वाले साफ्टवेयर की स्क्रीनिंग में सामने आई है। करीब छह हजार ऐसे राशन कार्ड यहां मिले हैं, जो बाहर के जिलों में भी प्रचलित हैं और उनका आधार कार्ड दोनों स्थानों पर प्रयोग किया गया है। यह मामला सामने आने के बाद डीएसओ रमन मिश्र ने संबंधित जिलों को ऑनलाइन पत्र लिखकर तत्काल इन कार्डों को निरस्त करने के लिए कहा है।
राशन की कालाबाजारी का खेल करने वालों ने राशन कार्ड को आधार से जोड़ कर प्रक्रिया पारदर्शी बनाने के सरकार के मंसूबों पर पानी फेरने का प्रयास किया है। यह मामला तब सामने आया जब आधार लिंक करने के लिए यहां के उपभोक्ताओं का नंबर डाला गया। डीएसओ के आधार लिंक के अत्याधुनिक साफ्टवेयर ने यह बता दिया कि कितने राशन कार्डों में प्रयोग आधार का डुप्लीकेट तैयार अन्य जिलों में राशन कार्ड बनवा लिए गए हैं और उस नाम पर राशन भी लिया जा रहा है। हालांकि तत्काल प्रभाव से यहां के राशन कार्ड को निरस्त भी करा दिया। उधर, जब ऐसे उपभोक्ता कोटे की दुकानों पर पहुंचे और कोटेदार ने उन्हें इस नाते राशन देने से मना कर दिया कि उनका राशन कार्ड निरस्त है तो इसके बाद उपभोक्ताओं ने विभाग से संपर्क साधा। उपभोक्ताओं ने अधिकारियों के समक्ष अन्य जिलों में आधार का प्रयोग न किए जाने की बात रखी।
उधर, स्क्रीनिंग में मिले तथ्य बताते हैं कि बस्ती के उपभोक्ताओं के आधार का प्रयोग आगरा के अलावा गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद सहित कुल 53 जिलों में हुआ है। डुप्लीकेसी के इस खेल का प्रमाण मिलने के बाद विभाग सचेत हो गया है। डीएसओ रमन मिश्र ने बताया कि कुछ तो यह अनाज माफियाओं की करतूत है, मगर अधिकांश मामलों में खुद उपभोक्ता भी दोषी हैं। ऐसे तमाम कार्ड यहां पाए गए हैं, जिनके परिवार के लोग बाहर के जिलों में रहते हैं और उनके पास दो-दो कार्ड हैं तथा वह दोनों कार्डों का लाभ उठा रहे थे। फिलहाल, बस्ती जिले में जो भी ऐसे कार्ड मिले हैं, उन्हें निरस्त कर दिया गया है। हालांकि जैसे-जैसे उपभोक्ता अपना यहां के निवास का प्रमाण दे रहे हैं, उन्हें कार्ड जारी कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि सभी संबंधित 53 जिलों के डीएसओ को ऑनलाइन पत्र भेजकर वहां कार्ड निरस्त करा दिए गए हैं। ऐसे करीब छह हजार कार्ड थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। ऑनलाइन आधार कार्ड प्राप्त करने की सरल व्यवस्था का लाभ जहां लोगों को मिल रहा है वहीं इसकी आड़ में अनाज माफिया भी चांदी काट रहे हैं। अपने जिले के आधार कार्ड का कई जिलों में डुप्लीकेट तैयार कर उसका उपयोग उसी नाम से राशन कार्ड बनवाने में कर लिया गया है। यह गड़बड़ी डीएसओ के आधार कार्ड लिंक के लिए प्रयोग किए जाने वाले साफ्टवेयर की स्क्रीनिंग में सामने आई है। करीब छह हजार ऐसे राशन कार्ड यहां मिले हैं, जो बाहर के जिलों में भी प्रचलित हैं और उनका आधार कार्ड दोनों स्थानों पर प्रयोग किया गया है। यह मामला सामने आने के बाद डीएसओ रमन मिश्र ने संबंधित जिलों को ऑनलाइन पत्र लिखकर तत्काल इन कार्डों को निरस्त करने के लिए कहा है।
राशन की कालाबाजारी का खेल करने वालों ने राशन कार्ड को आधार से जोड़ कर प्रक्रिया पारदर्शी बनाने के सरकार के मंसूबों पर पानी फेरने का प्रयास किया है। यह मामला तब सामने आया जब आधार लिंक करने के लिए यहां के उपभोक्ताओं का नंबर डाला गया। डीएसओ के आधार लिंक के अत्याधुनिक साफ्टवेयर ने यह बता दिया कि कितने राशन कार्डों में प्रयोग आधार का डुप्लीकेट तैयार अन्य जिलों में राशन कार्ड बनवा लिए गए हैं और उस नाम पर राशन भी लिया जा रहा है। हालांकि तत्काल प्रभाव से यहां के राशन कार्ड को निरस्त भी करा दिया। उधर, जब ऐसे उपभोक्ता कोटे की दुकानों पर पहुंचे और कोटेदार ने उन्हें इस नाते राशन देने से मना कर दिया कि उनका राशन कार्ड निरस्त है तो इसके बाद उपभोक्ताओं ने विभाग से संपर्क साधा। उपभोक्ताओं ने अधिकारियों के समक्ष अन्य जिलों में आधार का प्रयोग न किए जाने की बात रखी।
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उधर, स्क्रीनिंग में मिले तथ्य बताते हैं कि बस्ती के उपभोक्ताओं के आधार का प्रयोग आगरा के अलावा गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद सहित कुल 53 जिलों में हुआ है। डुप्लीकेसी के इस खेल का प्रमाण मिलने के बाद विभाग सचेत हो गया है। डीएसओ रमन मिश्र ने बताया कि कुछ तो यह अनाज माफियाओं की करतूत है, मगर अधिकांश मामलों में खुद उपभोक्ता भी दोषी हैं। ऐसे तमाम कार्ड यहां पाए गए हैं, जिनके परिवार के लोग बाहर के जिलों में रहते हैं और उनके पास दो-दो कार्ड हैं तथा वह दोनों कार्डों का लाभ उठा रहे थे। फिलहाल, बस्ती जिले में जो भी ऐसे कार्ड मिले हैं, उन्हें निरस्त कर दिया गया है। हालांकि जैसे-जैसे उपभोक्ता अपना यहां के निवास का प्रमाण दे रहे हैं, उन्हें कार्ड जारी कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि सभी संबंधित 53 जिलों के डीएसओ को ऑनलाइन पत्र भेजकर वहां कार्ड निरस्त करा दिए गए हैं। ऐसे करीब छह हजार कार्ड थे।
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