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गैरइरादतन हत्या में पूर्व प्रधान को 10 वर्ष की सजा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Mar 2016 12:12 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : DEMO Pics
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बस्ती। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश इंतखाब आलम ने गैर इरादतन हत्या के जुर्म में दोषी करार देते हुए पूर्व ग्राम प्रधान को दस वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया है। इसे न अदा करने पर एक वर्ष अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। आठ अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देकर दोष मुक्त कर दिया है।
अभियोजन के अनुसार, सोनहा थाना क्षेत्र के मझौवा राम प्रसाद निवासी मुनव्वर हुसैन ने सोनहा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 25 दिसंबर 2010 को सुबह साढ़े आठ बजे उनका लड़का मुशर्रत हुसैन, मुसादित, मुशर्रफ हुसैन बाइक से अपने खेत की सिंचाई कर घर आ रहे थे।
गांव से तीन सौ मीटर पहले चकरोड पर पहुंचे तो वहां पर गांव के ही राधेश्याम, रामू, कमाल अहमद, ललाऊ, मोहम्मद शमी, मल्लू, अजमल, बैतुल्लाह और अब्दुल कलाम ने चुनावी रंजिश को लेकर जान से मारने की नीयत से टूट पड़े। बुरी तरह मारपीट कर उनके लड़कों को घायल कर दिया। मुशर्रफ बेहोश हो गया। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां गंभीर हालत देखते हुए मुुशर्रत को लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। रास्ते में उसकी मौत हो गई।
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रिपोर्ट के आधार पर आरोप पत्र दाखिल हुआ। अभियोजन की तरफ से पैरवी शासकीय अधिवक्ता लालजी यादव ने किया। नौ गवाहों के बयान हुए। गवाहों के बयान में आया कि घटना के समय राधेश्याम प्रधान थे। उसके पहले मुनव्वर प्रधान थे। सबूतों के आधार पर जज ने राधेश्याम को गैरइरादतन हत्या के जुर्म में दोषी करार देते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड से प्राप्त धनराशि में से 25 हजार रुपये घायल मुशादिक और 25 हजार रुपये मुशर्रफ हुसैन को दिया जाएगा।
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अभियोजन के अनुसार, सोनहा थाना क्षेत्र के मझौवा राम प्रसाद निवासी मुनव्वर हुसैन ने सोनहा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 25 दिसंबर 2010 को सुबह साढ़े आठ बजे उनका लड़का मुशर्रत हुसैन, मुसादित, मुशर्रफ हुसैन बाइक से अपने खेत की सिंचाई कर घर आ रहे थे।
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गांव से तीन सौ मीटर पहले चकरोड पर पहुंचे तो वहां पर गांव के ही राधेश्याम, रामू, कमाल अहमद, ललाऊ, मोहम्मद शमी, मल्लू, अजमल, बैतुल्लाह और अब्दुल कलाम ने चुनावी रंजिश को लेकर जान से मारने की नीयत से टूट पड़े। बुरी तरह मारपीट कर उनके लड़कों को घायल कर दिया। मुशर्रफ बेहोश हो गया। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां गंभीर हालत देखते हुए मुुशर्रत को लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। रास्ते में उसकी मौत हो गई।
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रिपोर्ट के आधार पर आरोप पत्र दाखिल हुआ। अभियोजन की तरफ से पैरवी शासकीय अधिवक्ता लालजी यादव ने किया। नौ गवाहों के बयान हुए। गवाहों के बयान में आया कि घटना के समय राधेश्याम प्रधान थे। उसके पहले मुनव्वर प्रधान थे। सबूतों के आधार पर जज ने राधेश्याम को गैरइरादतन हत्या के जुर्म में दोषी करार देते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड से प्राप्त धनराशि में से 25 हजार रुपये घायल मुशादिक और 25 हजार रुपये मुशर्रफ हुसैन को दिया जाएगा।