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Basti News: कफ सिरप का नशा...युवाओं में बढ़ रही खतरनाक लत
Tue, 25 Nov 2025 12:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 25 Nov 2025 12:45 AM IST
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बस्ती। प्रतिबंधित कफ सिरप की बरामदगी के बाद जांच में खुलासा हुआ है कि इसकी अवैध कालाबाजारी धुआंधार चल रही है। युवा इसे सस्ते नशे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे लीवर-किडनी फेलियर और सांस रुकने जैसे गंभीर खतरे बढ़ रहे हैं। बरामद बैचों में फर्जी बिलिंग, गलत लेबलिंग और बिना लाइसेंस परिवहन के प्रमाण मिले हैं। औषधि विभाग ने जांच तेज कर दी है।
शराब, सिगरेट समेत अन्य सेवन के जरिये नशे का शौक पूरा करने वाले युवा वर्ग सस्ते के चक्कर में सिरप पर आ गए हैं। वह, शाम होते ही दवा दुकानों पर जाकर कप सिरप मांगते हैं और लेकर चले जाते हैं, लेकिन दुकानदार यह नहीं समझ पाता कि यह सिरप कप क्या करेंगे। एफएसडीए सूत्रों ने बताया कि आमतौर पर कंपनियां नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को कम मात्रा में मिलाती हैं। ऐसे में सिरप घटिया होने के बाद भी लोगों पर बुरा असर नहीं डालते और कारोबार धड़ल्ले से चलता रहता है। विभागीय टीम अब इसकी धरपकड़ के लिए अलर्ट है। जांच के लिए लगातार सैंपलिंग भी कराई जा रही।
सूत्रों के अनुसार मुनाफे के लिए अल्कोहल की मात्रा बढ़ाकर व नशीले तत्व मिलाकर मौत के सौदागर कफ सिरप तैयार करते हैं। यह आसानी से बन भी जाता है। इसके लिए महंगे उपकरणों की जरूरत नहीं होती है। यह किडनी व लिवर पर सीधा असर करता है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में कफ सिरप कई बच्चों की मौत का कारण बन गया। अब इसको लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि अन्य दवाओं की अपेक्षा कफ सिरप में मिलावट आसान होती है। कम खर्च में ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इसमें नशा बढ़ाने वाले तत्व भी मिला दिए जाते हैं। यही वजह है कि हरियाणा, उत्तराखंड व दिल्ली-एनसीआर की कंपनियाें में से उत्पादित सिरप को धंधेबाज खपा रहे हैं। इससे उन्हें मोटा मुनाफा होता है।
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खांसी के नाम पर लेते हैं कप सिरप
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, खांसी में इस्तेमाल होने वाले सिरप 75 फीसदी सांद्रता वाले होते हैं। इसमें ग्लूकोज, सुक्रोज और माल्टोडेक्सट्रिन का प्रयोग होता है। इसमें मिश्रण को गाढ़ा करने वाले तत्व मिलाए जाते हैं। इसकी मात्रा बढ़ने पर यह जहरीला हो जाता है। कुछ सिरप में ग्लिसरीन मिलाई जाती है। इससे दवा गाढ़ी और मीठी बनती है। खांसी बताकर युवा दुकान से लेकर इसका इस्तेमाल करते हैं।
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किडनी, लिवर पर ज्यादा असर
जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. विजय तिवारी के अनुसार ग्लाइकॉल की मात्रा अधिक होने से किडनी और लिवर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इसी तरह नशा बढ़ाने के लिए अल्कोहल की मात्रा अधिक होने से भी लिवर व अन्य अंगों पर बुरा असर पड़ता है। सिरप में घटिया सामग्री या मानक से अधिक सामग्री की मिलावट का असर तेजी से होता है। इससे अंग क्षतिग्रस्त होते हैं और जान तक चली जाती है।
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धंधेबाज ऐसे कर रहे खेल
लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद दवा की खरीद-फरोख्त चल रहा। विभाग ने जब यह मामला पकड़ा तो हड़कंप मचा। औषधि निरीक्षक अरविंद कुमार ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में बायोहब कोडिवा 100 एमएल और प्राक्सीवान स्पास कैप्सूल की खरीद और बिक्री की जांच चल रही है। इसी संदर्भ में बस्ती में भी औषधि फर्मों की जांच की जा रही थी।जांच के दौरान यह पता चला कि गोयल फर्म, ग्राउंड फ्लोर पांडेय बाजार ने औषधि नियमावली का उल्लंघन करते हुए अपना लाइसेंस निरस्त करवा लिया था। इसके बावजूद, यह फर्म दवाओं का क्रय-विक्रय करती पाई गई। औषधि निरीक्षक ने बताया कि बायोहब कोडिवा 100 एमएल और प्राक्सीवान स्पास कैप्सूल की खरीद और बिक्री का पूरा ब्योरा फर्म प्रस्तुत नहीं कर सकी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर खुशबू गोयल, पत्नी शंकर गोयल निवासी मरवटिया पांडेय बाजार और रित्विक गोयल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की गहन छानबीन कर रही है। वहीं, अब जांच की गति और बढ़ा दी गई है।
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होलसेल का लाइसेंस निलंबित, एक पर बढ़ी निगरानी
जिले में बायोहब कोडिवा 100 एमएल और प्राक्सीवान स्पास कैप्सूल के साथ चल रही कप सिरप जांच के क्रम में ड्रग इंस्पेक्टर अरविंद कुमार ने बताया कि शहर के अमित मेडिकल एजेंसी की जांच की गई। जिसमें प्राक्सीवान स्पास कैप्सूल के स्टॉक और वितरण में अंतर पाया गया। साक्ष्य प्रस्तुत न करने पर लाइसेंस निलंबित करते हुए नोटिस जारी किया गया है। वहीं, एक होलसेल दुकान की जांच चल रही है। निगरानी रखी गई है।
कोट
दुकानों पर स्टॉक रजिस्टर देख रहे। कप सिरप और कैप्सूल की भी जांच हो रही। ज्यादा अंतर आने पर जवाब तलब किया जा रहा है। जांच जारी है।
-अरविंद कुमार, औषधि निरीक्षक, बस्ती।
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शराब, सिगरेट समेत अन्य सेवन के जरिये नशे का शौक पूरा करने वाले युवा वर्ग सस्ते के चक्कर में सिरप पर आ गए हैं। वह, शाम होते ही दवा दुकानों पर जाकर कप सिरप मांगते हैं और लेकर चले जाते हैं, लेकिन दुकानदार यह नहीं समझ पाता कि यह सिरप कप क्या करेंगे। एफएसडीए सूत्रों ने बताया कि आमतौर पर कंपनियां नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को कम मात्रा में मिलाती हैं। ऐसे में सिरप घटिया होने के बाद भी लोगों पर बुरा असर नहीं डालते और कारोबार धड़ल्ले से चलता रहता है। विभागीय टीम अब इसकी धरपकड़ के लिए अलर्ट है। जांच के लिए लगातार सैंपलिंग भी कराई जा रही।
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सूत्रों के अनुसार मुनाफे के लिए अल्कोहल की मात्रा बढ़ाकर व नशीले तत्व मिलाकर मौत के सौदागर कफ सिरप तैयार करते हैं। यह आसानी से बन भी जाता है। इसके लिए महंगे उपकरणों की जरूरत नहीं होती है। यह किडनी व लिवर पर सीधा असर करता है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में कफ सिरप कई बच्चों की मौत का कारण बन गया। अब इसको लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि अन्य दवाओं की अपेक्षा कफ सिरप में मिलावट आसान होती है। कम खर्च में ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इसमें नशा बढ़ाने वाले तत्व भी मिला दिए जाते हैं। यही वजह है कि हरियाणा, उत्तराखंड व दिल्ली-एनसीआर की कंपनियाें में से उत्पादित सिरप को धंधेबाज खपा रहे हैं। इससे उन्हें मोटा मुनाफा होता है।
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खांसी के नाम पर लेते हैं कप सिरप
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, खांसी में इस्तेमाल होने वाले सिरप 75 फीसदी सांद्रता वाले होते हैं। इसमें ग्लूकोज, सुक्रोज और माल्टोडेक्सट्रिन का प्रयोग होता है। इसमें मिश्रण को गाढ़ा करने वाले तत्व मिलाए जाते हैं। इसकी मात्रा बढ़ने पर यह जहरीला हो जाता है। कुछ सिरप में ग्लिसरीन मिलाई जाती है। इससे दवा गाढ़ी और मीठी बनती है। खांसी बताकर युवा दुकान से लेकर इसका इस्तेमाल करते हैं।
किडनी, लिवर पर ज्यादा असर
जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. विजय तिवारी के अनुसार ग्लाइकॉल की मात्रा अधिक होने से किडनी और लिवर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इसी तरह नशा बढ़ाने के लिए अल्कोहल की मात्रा अधिक होने से भी लिवर व अन्य अंगों पर बुरा असर पड़ता है। सिरप में घटिया सामग्री या मानक से अधिक सामग्री की मिलावट का असर तेजी से होता है। इससे अंग क्षतिग्रस्त होते हैं और जान तक चली जाती है।
धंधेबाज ऐसे कर रहे खेल
लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद दवा की खरीद-फरोख्त चल रहा। विभाग ने जब यह मामला पकड़ा तो हड़कंप मचा। औषधि निरीक्षक अरविंद कुमार ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में बायोहब कोडिवा 100 एमएल और प्राक्सीवान स्पास कैप्सूल की खरीद और बिक्री की जांच चल रही है। इसी संदर्भ में बस्ती में भी औषधि फर्मों की जांच की जा रही थी।जांच के दौरान यह पता चला कि गोयल फर्म, ग्राउंड फ्लोर पांडेय बाजार ने औषधि नियमावली का उल्लंघन करते हुए अपना लाइसेंस निरस्त करवा लिया था। इसके बावजूद, यह फर्म दवाओं का क्रय-विक्रय करती पाई गई। औषधि निरीक्षक ने बताया कि बायोहब कोडिवा 100 एमएल और प्राक्सीवान स्पास कैप्सूल की खरीद और बिक्री का पूरा ब्योरा फर्म प्रस्तुत नहीं कर सकी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर खुशबू गोयल, पत्नी शंकर गोयल निवासी मरवटिया पांडेय बाजार और रित्विक गोयल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की गहन छानबीन कर रही है। वहीं, अब जांच की गति और बढ़ा दी गई है।
होलसेल का लाइसेंस निलंबित, एक पर बढ़ी निगरानी
जिले में बायोहब कोडिवा 100 एमएल और प्राक्सीवान स्पास कैप्सूल के साथ चल रही कप सिरप जांच के क्रम में ड्रग इंस्पेक्टर अरविंद कुमार ने बताया कि शहर के अमित मेडिकल एजेंसी की जांच की गई। जिसमें प्राक्सीवान स्पास कैप्सूल के स्टॉक और वितरण में अंतर पाया गया। साक्ष्य प्रस्तुत न करने पर लाइसेंस निलंबित करते हुए नोटिस जारी किया गया है। वहीं, एक होलसेल दुकान की जांच चल रही है। निगरानी रखी गई है।
कोट
दुकानों पर स्टॉक रजिस्टर देख रहे। कप सिरप और कैप्सूल की भी जांच हो रही। ज्यादा अंतर आने पर जवाब तलब किया जा रहा है। जांच जारी है।
-अरविंद कुमार, औषधि निरीक्षक, बस्ती।