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Basti News: बिल संशोधन के अभाव में नहीं मिल पा रही छूट, उपभोक्ता परेशान
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बिजली बिल राहत योजना कैंप में उपभोक्ताओं का पंजीकरण करते निगम के कर्मचारी।
- फोटो : अवध विश्वविद्यालय के कौटिल्य प्रशासनिक सभागार में बैठक करतीं राज्यपाल
बस्ती। सरकार ने उपभोक्ताओं के हित में बिजली बिल राहत योजना भले ही लागू की है, मगर निगम के जिम्मेदारों की लापरवाही से राहत मिल नहीं पा रही है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि उन्हें बिजली का बिल बढ़ाकर दिया जा रहा है। अभियान में प्रगति लाने के बजाय अधिकारी चेकिंग के बहाने उत्पीड़न कर रहे हैं। इतने बड़े अभियान में छूट दिलाने की जगह उपभोक्ताओं पर एफआईआर तक दर्ज करा दिया जा रहा है।
एक दिसंबर से लागू बिजली बिल राहत योजना के प्रथम चरण में 18 दिन बीतने के बाद भी जिले भर में कुल प्रगति सिर्फ पांच प्रतिशत है। जबकि दिसंबर माह में बकाए पर सौ प्रतिशत ब्याज के अलावा मूलधन में 25 प्रतिशत तक की सबसे अधिक छूट है। इस योजना के तहत बस्ती के चार डिवीजन में इस योजना के पात्रों की संख्या 2,71,608 चिह्नित हैं। इन पर आठ सौ करोड़ रुपये बिजली का बिल बकाया है। प्रथम चरण में सर्वाधिक पांच सौ करोड़ की छूट है। बावजूद इसके उपभोक्ता इस योजना का लाभ लेने में रूचि नहीं दिखा रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली का बिल बढ़ाकर भेजा गया है। पहले उसमें संशोधन होना चाहिए। इसके बाद छूट का लाभ मिलना चाहिए।
रुधौली डिवीजन के दसिया फीडर के अंतर्गत मुनियांव गांव के उपभोक्ता छोटेलाल पांडेय का कहना है कि वह नियमित बिजली का बिल जमा करते आए हैं। उनका अधिकतम बिल प्रतिमाह 300 से 400 तक आता है। इस साल मई के बाद बिल नहीं दिया गया। दिसंबर में अचानक आठ महीने का बिल 80 हजार रुपये भेज दिया गया। एसडीओ स्तर तक गुहार लगाने के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है। मनिकौरा के दिनेश ने बताया कि योजना के तहत वह पात्र हैं। लेकिन, छूट से पहले उनके बढ़े हुए बिजली बिल का संशोधन कैंप या उपकेंद्र पर नहीं किया जा रहा है। इसीलिए अधीक्षण अभियंता कार्यालय तक भागदौड़ करनी पड़ रही है। सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। संशोधन न होने की वजह से योजना में छूट का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। इसी तरह तमाम उपभोक्ता बिल संशोधन के लिए एक्सईएन कार्यालय से एसई कार्यालय तक भटक रहे हैं। संशोधन न होने की वजह से योजना में पात्र उपभोक्ता पंजीकरण कराने से कतरा रहे हैं।
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अभी तक बस्ती प्रथम, द्वितीय रुधौली, तृतीय और हर्रैया समेत चारों डिवीजन में केवल 14171 पात्र उपभोक्ताओं ने इस योजना के तहत पंजीकरण कराया है। छूट के बाद वसूली जाने वाली धनराशि 300 करोड़ के सापेक्ष कुल वसूली महज 3.56 करोड़ रुपये की हुई है।
ग्रामीण अंचल में विद्युत बकाएदारों की संख्या ज्यादा है। सदर क्षेत्र में छूट योजना के तहत केवल पांच हजार पात्र बताए जा रहे हैं। इसके अलावा सभी पात्र ग्रामीण अंचल के हैं।
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एक दिसंबर से लागू बिजली बिल राहत योजना के प्रथम चरण में 18 दिन बीतने के बाद भी जिले भर में कुल प्रगति सिर्फ पांच प्रतिशत है। जबकि दिसंबर माह में बकाए पर सौ प्रतिशत ब्याज के अलावा मूलधन में 25 प्रतिशत तक की सबसे अधिक छूट है। इस योजना के तहत बस्ती के चार डिवीजन में इस योजना के पात्रों की संख्या 2,71,608 चिह्नित हैं। इन पर आठ सौ करोड़ रुपये बिजली का बिल बकाया है। प्रथम चरण में सर्वाधिक पांच सौ करोड़ की छूट है। बावजूद इसके उपभोक्ता इस योजना का लाभ लेने में रूचि नहीं दिखा रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली का बिल बढ़ाकर भेजा गया है। पहले उसमें संशोधन होना चाहिए। इसके बाद छूट का लाभ मिलना चाहिए।
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रुधौली डिवीजन के दसिया फीडर के अंतर्गत मुनियांव गांव के उपभोक्ता छोटेलाल पांडेय का कहना है कि वह नियमित बिजली का बिल जमा करते आए हैं। उनका अधिकतम बिल प्रतिमाह 300 से 400 तक आता है। इस साल मई के बाद बिल नहीं दिया गया। दिसंबर में अचानक आठ महीने का बिल 80 हजार रुपये भेज दिया गया। एसडीओ स्तर तक गुहार लगाने के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है। मनिकौरा के दिनेश ने बताया कि योजना के तहत वह पात्र हैं। लेकिन, छूट से पहले उनके बढ़े हुए बिजली बिल का संशोधन कैंप या उपकेंद्र पर नहीं किया जा रहा है। इसीलिए अधीक्षण अभियंता कार्यालय तक भागदौड़ करनी पड़ रही है। सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। संशोधन न होने की वजह से योजना में छूट का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। इसी तरह तमाम उपभोक्ता बिल संशोधन के लिए एक्सईएन कार्यालय से एसई कार्यालय तक भटक रहे हैं। संशोधन न होने की वजह से योजना में पात्र उपभोक्ता पंजीकरण कराने से कतरा रहे हैं।
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अभी तक बस्ती प्रथम, द्वितीय रुधौली, तृतीय और हर्रैया समेत चारों डिवीजन में केवल 14171 पात्र उपभोक्ताओं ने इस योजना के तहत पंजीकरण कराया है। छूट के बाद वसूली जाने वाली धनराशि 300 करोड़ के सापेक्ष कुल वसूली महज 3.56 करोड़ रुपये की हुई है।
ग्रामीण अंचल में विद्युत बकाएदारों की संख्या ज्यादा है। सदर क्षेत्र में छूट योजना के तहत केवल पांच हजार पात्र बताए जा रहे हैं। इसके अलावा सभी पात्र ग्रामीण अंचल के हैं।