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Basti News: 26 साल बाद दोबारा अमरौली जानूबी पहुंचे चकबंदी कर्मी, जगी उम्मीद
Wed, 20 Dec 2023 11:47 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 20 Dec 2023 11:47 PM IST
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सल्टौआ। क्षेत्र के अमरौली जानूबी गांव में 26 वर्ष बाद भी चकबंदी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। जिससे कास्तकारों को तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को प्रधान की अध्यक्षता में हुई बैठक में कास्तकारों ने दोबारा चकबंदी शुरू कराने का प्रस्ताव दिया।
बुधवार को 26 साल बाद जब दोबारा चकबंदी कर्मी रामसुरेश, जहीर अहमद ने गांव पहुंचकर कास्तकारों से सहमति ली तो फिर से उम्मीद जगी। कास्तकारों ने बताया कि 1996 में जब चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई तो धारा 9 के तहत जमीन की तरमीम और मालियत कर्मचारियों ने सही नहीं किया। कास्तकारों को खेत में जाने के लिए रास्ते नहीं दिए गए। ऊपर से वन विभाग जमीन के कुछ भाग पर अपना हक जता रहा था। कास्तकारों ने सभी फोरम पर इसकी शिकायत की लेकिन जब निस्तारण नहीं निकला तो उन्होंने चकबंदी प्रक्रिया को ही रोकवा दिया। तब से आज तक प्रशासन ने कभी चकबंदी शुरू कराने की जहमत नहीं उठाई।
डीएम अंद्रा वामसी की सख्ती के बाद चकबंदी कर्मी सक्रिय हुए। कास्तकार राम प्रगट चौधरी, रामसेवक, घनश्याम, कृष्ण कुमार, उमेश चंद्र, रामजीत, रामविलास, रामभवन, अशोक कुमार, बाबूराम आदि ने बताया कि चकबंदी पूरी हो जाने पर जमीनों के झगड़े कम होंगे। प्रधान शिव नरायन ने बताया कि चकबंदी कर्मियों ने कास्तकारों से सहमति ली है। सभी ने प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति दी है।
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बुधवार को 26 साल बाद जब दोबारा चकबंदी कर्मी रामसुरेश, जहीर अहमद ने गांव पहुंचकर कास्तकारों से सहमति ली तो फिर से उम्मीद जगी। कास्तकारों ने बताया कि 1996 में जब चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई तो धारा 9 के तहत जमीन की तरमीम और मालियत कर्मचारियों ने सही नहीं किया। कास्तकारों को खेत में जाने के लिए रास्ते नहीं दिए गए। ऊपर से वन विभाग जमीन के कुछ भाग पर अपना हक जता रहा था। कास्तकारों ने सभी फोरम पर इसकी शिकायत की लेकिन जब निस्तारण नहीं निकला तो उन्होंने चकबंदी प्रक्रिया को ही रोकवा दिया। तब से आज तक प्रशासन ने कभी चकबंदी शुरू कराने की जहमत नहीं उठाई।
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डीएम अंद्रा वामसी की सख्ती के बाद चकबंदी कर्मी सक्रिय हुए। कास्तकार राम प्रगट चौधरी, रामसेवक, घनश्याम, कृष्ण कुमार, उमेश चंद्र, रामजीत, रामविलास, रामभवन, अशोक कुमार, बाबूराम आदि ने बताया कि चकबंदी पूरी हो जाने पर जमीनों के झगड़े कम होंगे। प्रधान शिव नरायन ने बताया कि चकबंदी कर्मियों ने कास्तकारों से सहमति ली है। सभी ने प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति दी है।
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