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आत्मविश्वास से 98 वर्षीय वंशीलाल ने जीती कोरोना की जंग

Mon, 31 May 2021 11:28 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 31 May 2021 11:28 PM IST
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Confident 98-year-old Vanshilal won the battle of Corona
आत्मविश्वास से 98 वर्षीय वंशीलाल ने जीती कोरोना की जंग
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बस्ती। शहर के खीरीघाट निवासी 98 वर्षीय वंशीलाल राजपाल 17 दिन बाद कोरोना को हरा कर लौटे तो घर में खुशी व्याप्त हो गई। 14 मई को जब वह कोरोना पॉजिटिव हुए थे, उससे एक दिन पहले यानी 13 मई को उनकी पत्नी का निधन हो गया था। बावजूद इसके वंशीलाल ने आत्मविश्वास से कोरोना की जंग जीत ली और सोमवार को वे घर लौट आए। इसे अस्पताल के प्रबंधन और कोविड मरीजों के उपचार से जुड़े स्टाफ भी उपलब्धि मान रहे हैं।
दरअसल शहर के खीरीघाट मोहल्ले के रहने वाले व्यापारी नेता आनंद राजपाल के पिता वंशीलाल राजपाल 14 मई को कोरोना संक्रमित हो गए थे। रिपोर्ट आने के बाद परिजनों ने पहले घर पर ही उनकी देखरेख शुरू की। ऑक्सीजन लेवल में काफी उतार चढ़ा देखकर उन्हे 19 मई को ओपेक चिकित्सालय कैली में भर्ती कराया गया। यहां 12 दिन तक उनका इलाज हुआ। रविवार को रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद सोमवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
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इस बारे में डॉ. जीएम शुक्ला ने कहा वंशीलाल राजपाल को जब भर्ती किया गया था, उस वक्त उनका ऑक्सीजन लेवल नीचे-ऊपर हो रहा था। उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया। 12 दिनों के इलाज में एक दो बार उनका आत्मबल कमजोर हो रहा था। बातचीत के जरिय बूस्ट किया गया। सबसे खास बात यह रही है कि 98 साल की उम्र में भी वंशीलाल काफी फिट हैं। इलाज के दौरान वह खुद सांसों से जुड़े योगाभ्यास करते थे। एक बार जो बताया गया, अनुशासन में रहकर उन्होंने उसका ध्यान रखा। साथ ही वह पहले से भी नियमित योगा करते रहे।
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डॉ. रोहित शाही ने कहा कोविड मरीजों के लिए उनकी हिम्मत सबसे बड़ा इम्यूनिटी बूस्टर है। हिम्मत कमजोर होने पर कोई इम्यूनिटी बूस्टर काम नहीं करता और मरीज जिंदगी की जंग हार जाता है। जहां तक वंशलाल जी की बात है तो उनकी दिनचर्या नियमित है। रोज समय पर उठना, सो जाना, योगा करना, खान पान का ध्यान रखना, सकारात्मक सोचना और परिस्थितियों का हिम्मत के साथ सामना करना, उनकी आदतों में शुमार है। इन सबके साथ कोविड पाजिटिव होते हुए भी परिजनों ने उनकी बड़ी सेवा की।
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