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Basti News: हाईकोर्ट में शिकायत की घुड़की के बाद हुआ कुर्की के आदेश पर अमल
Sun, 14 Apr 2024 01:55 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 14 Apr 2024 01:55 AM IST
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प्रमुख सचिव गृह व डीजीपी को न्यायालय ने दिया था कुर्की कराने का निर्देश
व्यापारी के बेटे के अपहरण केस में 2011 से फरार हैं पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कानूनी पैंतरों का सहारा लेकर न्यायालय के आदेश को हल्के में लेना पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी को अंतत: भारी पड़ा। व्यापारी पुत्र के अपहरण केस में चार्ज फिक्स होने के बाद ट्रायल शुरू करने के लिए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सप्तम/विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) प्रमोद कुमार गिरि की अदालत से गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। मगर, आरोपी अमरमणि की तरफ से किसी न किसी बहाने मोहलत ली जाती रही। इस केस में कोतवाली पुलिस के रवैये व काम करने के तौर-तरीके पर भी न्यायालय में असंतोष व्यक्त किया जा चुका है।
इस बीच न्यायालय ने अमरमणि त्रिपाठी की देश भर की संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया। कुर्की के आदेश का अनुपालन कराने के लिए तमाम गतिरोध सामने आए। पुलिस की तरफ से बार-बार मोहलत ली जाती रही। आजिज आकर न्यायालय ने प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी को कुर्की की कार्रवाई कराने के लिए निर्देशित किया। कहा गया था कि ऐसा लगता है कि स्थानीय पुलिस आरोपी के प्रभावशाली होने के कारण उस पर कार्रवाई करने से बच रही है। ऐसी स्थिति में समस्त जिलों में स्थित आरोपी अमरमणि त्रिपाठी की संपत्तियों की कुर्की के लिए प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह व पुलिस महानिदेशक को निर्देशित किया जाता है कि वे संपत्तियों को कुर्क कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई कराकर रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें।
सुनवाई के बाद जारी आदेश में कोर्ट ने कहा था कि अमरमणि त्रिपाठी का लंबा आपराधिक इतिहास है। उसके खिलाफ हत्या सहित कुल 20 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसके विरुद्ध 16 अक्तूबर 2011 को एनबीडब्लू जारी किया गया था। एक नवंबर को कुर्की की नोटिस और दो दिसंबर को कुर्की की कार्रवाई करने का आदेश दिया गया था। मगर, स्थानीय पुलिस आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाई। यद्यपि कुर्की की कार्रवाई किए जाने के लिए बराबर समय की मांग करती रही। ऐसे में प्रमुख सचिव गृह व डीजीपी कुर्की की कार्रवाई कराएं।
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पहली तारीख पर तो इस निर्देश का असर नहीं दिखा, लेकिन 30 मार्च को सुनवाई के दौरान यह कहते हुए रिमाइंडर भेजा गया कि यदि अगली सुनवाई 15 अप्रैल तक कुर्की की कार्रवाई पूरी करने की आख्या प्रस्तुत नहीं की गई तो प्रकरण को मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय के समक्ष मामला रखा जाएगा। तब पुलिस और प्रशासन को लगा कि अब हीलाहवाली भारी पड़ जाएगी। ऐसे में शनिवार को दो दिन पहले ही महराजगंज की संपत्ति कुर्क करने टीम पहुंच गई।
...
पुलिस के पास इन संपत्तियों का ब्योरा
पुलिस की तरफ से दी गई रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की गोरखपुर में कोई चल या अचल संपत्ति नहीं है। महराजगंज जिले के नौतनवां में एक अचल संपत्ति मकान नंबर 81-बी अमरमणि त्रिपाठी के नाम पर दर्ज है। वहां कोई चल संपत्ति का होना नहीं पाया गया। लखनऊ में गोमतीनगर विस्तार विक्रांत खंड में भूखंड संख्या ए-3-297 के रूप में 450 वर्गमीटर का करीब 01.18 करोड़ रुपये की जमीन अमरमणि के नाम पर पाई गई है। वहां भी कोई अचल संपत्ति नहीं पाई गई।
...
यह है मामला
छह दिसंबर 2001 को व्यापारी धर्मराज मद्धेशिया के बेटे राहुल का अपहरण हो गया था। इस मामले में कोतवाली में अपहरण का केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने अमरमणि समेत नौ लोगों को आरोपी बनाया था। आरोप है कि लखनऊ के जिस मकान से अपहृत बालक मिला था, वह अमरमणि का था। अमरमणि के खिलाफ 24 अक्तूबर 2011 से गैर जमानती वारंट जारी है। तीन नवंबर 2023 को मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने बस्ती कोतवाली पुलिस को सीआरपीसी-82 की कार्रवाई करने का आदेश दिया था। मामले में अंतिम सुनवाई आठ दिसंबर को की गई थी। कोतवाली पुलिस को कुर्की कर 20 दिसंबर को सुनवाई की तारीख तय की गई थी। 20 दिसंबर को सुनवाई नहीं हो सकी और 10 जनवरी की तारीख मुकर्रर की गई थी। उस दिन कुर्की का आदेश हुआ।
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व्यापारी के बेटे के अपहरण केस में 2011 से फरार हैं पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कानूनी पैंतरों का सहारा लेकर न्यायालय के आदेश को हल्के में लेना पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी को अंतत: भारी पड़ा। व्यापारी पुत्र के अपहरण केस में चार्ज फिक्स होने के बाद ट्रायल शुरू करने के लिए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सप्तम/विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) प्रमोद कुमार गिरि की अदालत से गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। मगर, आरोपी अमरमणि की तरफ से किसी न किसी बहाने मोहलत ली जाती रही। इस केस में कोतवाली पुलिस के रवैये व काम करने के तौर-तरीके पर भी न्यायालय में असंतोष व्यक्त किया जा चुका है।
इस बीच न्यायालय ने अमरमणि त्रिपाठी की देश भर की संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया। कुर्की के आदेश का अनुपालन कराने के लिए तमाम गतिरोध सामने आए। पुलिस की तरफ से बार-बार मोहलत ली जाती रही। आजिज आकर न्यायालय ने प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी को कुर्की की कार्रवाई कराने के लिए निर्देशित किया। कहा गया था कि ऐसा लगता है कि स्थानीय पुलिस आरोपी के प्रभावशाली होने के कारण उस पर कार्रवाई करने से बच रही है। ऐसी स्थिति में समस्त जिलों में स्थित आरोपी अमरमणि त्रिपाठी की संपत्तियों की कुर्की के लिए प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह व पुलिस महानिदेशक को निर्देशित किया जाता है कि वे संपत्तियों को कुर्क कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई कराकर रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें।
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सुनवाई के बाद जारी आदेश में कोर्ट ने कहा था कि अमरमणि त्रिपाठी का लंबा आपराधिक इतिहास है। उसके खिलाफ हत्या सहित कुल 20 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसके विरुद्ध 16 अक्तूबर 2011 को एनबीडब्लू जारी किया गया था। एक नवंबर को कुर्की की नोटिस और दो दिसंबर को कुर्की की कार्रवाई करने का आदेश दिया गया था। मगर, स्थानीय पुलिस आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाई। यद्यपि कुर्की की कार्रवाई किए जाने के लिए बराबर समय की मांग करती रही। ऐसे में प्रमुख सचिव गृह व डीजीपी कुर्की की कार्रवाई कराएं।
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पहली तारीख पर तो इस निर्देश का असर नहीं दिखा, लेकिन 30 मार्च को सुनवाई के दौरान यह कहते हुए रिमाइंडर भेजा गया कि यदि अगली सुनवाई 15 अप्रैल तक कुर्की की कार्रवाई पूरी करने की आख्या प्रस्तुत नहीं की गई तो प्रकरण को मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय के समक्ष मामला रखा जाएगा। तब पुलिस और प्रशासन को लगा कि अब हीलाहवाली भारी पड़ जाएगी। ऐसे में शनिवार को दो दिन पहले ही महराजगंज की संपत्ति कुर्क करने टीम पहुंच गई।
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पुलिस के पास इन संपत्तियों का ब्योरा
पुलिस की तरफ से दी गई रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की गोरखपुर में कोई चल या अचल संपत्ति नहीं है। महराजगंज जिले के नौतनवां में एक अचल संपत्ति मकान नंबर 81-बी अमरमणि त्रिपाठी के नाम पर दर्ज है। वहां कोई चल संपत्ति का होना नहीं पाया गया। लखनऊ में गोमतीनगर विस्तार विक्रांत खंड में भूखंड संख्या ए-3-297 के रूप में 450 वर्गमीटर का करीब 01.18 करोड़ रुपये की जमीन अमरमणि के नाम पर पाई गई है। वहां भी कोई अचल संपत्ति नहीं पाई गई।
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यह है मामला
छह दिसंबर 2001 को व्यापारी धर्मराज मद्धेशिया के बेटे राहुल का अपहरण हो गया था। इस मामले में कोतवाली में अपहरण का केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने अमरमणि समेत नौ लोगों को आरोपी बनाया था। आरोप है कि लखनऊ के जिस मकान से अपहृत बालक मिला था, वह अमरमणि का था। अमरमणि के खिलाफ 24 अक्तूबर 2011 से गैर जमानती वारंट जारी है। तीन नवंबर 2023 को मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने बस्ती कोतवाली पुलिस को सीआरपीसी-82 की कार्रवाई करने का आदेश दिया था। मामले में अंतिम सुनवाई आठ दिसंबर को की गई थी। कोतवाली पुलिस को कुर्की कर 20 दिसंबर को सुनवाई की तारीख तय की गई थी। 20 दिसंबर को सुनवाई नहीं हो सकी और 10 जनवरी की तारीख मुकर्रर की गई थी। उस दिन कुर्की का आदेश हुआ।