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हाईवे पर काल बनकर टहल रहे मवेशी
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हरैया क्षेत्र में हाईवे पर घूमते मवेशी।
- फोटो : BASTI
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हाईवे पर काल बनकर टहल रहे मवेशी
फोरलेन व लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर छुट्टा पशुओं के कारण अक्सर हो रहे हादसे
सामने नीलगाय आने से दुर्घटनाग्रस्त हुई थी मुख्यमंत्री के ओएसडी की कार
सोमवार को गड़हा गौतम के पास पशु से टकराकर पलट गया था कंटेनर
बस्ती। जिले से होकर गुजरने वाले लुंबिनी-दुद्धी मार्ग और गोरखपुर-लखनऊ फोरलेन पर मवेशी काल बनकर टहल रहे हैं। दोनों हाईवे के किनारे झाड़ियों में बैठे रहने वाले ये मवेशी अचानक सड़क पर आ जाते हैं। ऐसे में वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। अगस्त महीने में ही इनके चलते दोनों हाईवे पर नौ दुर्घटना हो चुकी है। इनमें दो लोगों की जान भी जा चुकी है।
इन मवेशियों में छुट्टा घूम रहे गोवंशीय पशुओं के अलावा बड़ी संख्या नीलगायों की है, जो झुंड बनाकर सड़क को पार करती रहती हैं। इनकी चपेट में बाइक सवार सबसे ज्यादा आ रहे हैं।
पशु पालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में निराश्रित गोवंशीय पशुओं की संख्या 25 हजार पांच सौ उन्तीस है। इनमें से सिर्फ 469 पशु ही छुट्टा घूम रहे हैं। जबकि हकीकत में इससे कई गुना पशु फोरलेन और हाईवे पर विचरण करते देखे जा सकते हैं। इसके बावजूद पुलिस, प्रशासन या टोल वसूलने वाली एनएचएआई आंख मूंदे हुए है। एनएचएआई के सुरक्षा प्रबंधक श्याम अवतार शर्मा का कहना है कि पेट्रोलिंग टीमें दिखाई पड़ने वाले पशुओं को भगा देती हैं।
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केस एक
पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री के ओएसडी मोतीलाल सिंह की गाड़ी नीलगाय से टकराने के बाद अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई थी। गोरखनाथ मंदिर में स्थापित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में तैनात रहे मोतीलाल सिंह 25 अगस्त की रात पत्नी के साथ गोरखपुर से लखनऊ जा रहे थे। मुंडेरवा थाने के खजौला चौकी क्षेत्र में पड़ने वाले मुजहना गांव के पास अचानक उनकी गाड़ी के सामने नीलगाय आ गई थी। हादसे में घायल मोतीलाल सिंह की श्री गोरक्षनाथ हॉस्पिटल में मृत्यु हो गई थी।
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केस दो
लखनऊ से गुटखा लादकर एक डीसीएम रविवार रात देवरिया के लार बाजार जा रही थी। कप्तानगंज थाना क्षेत्र के दुधौरा गांव के पास वह खराब हो गई। देर रात बभनान से चीनी लादकर कोलकाता जा रहे ट्रेलर के सामने दुधौरा गांव के पास एक जानवर आ गया। जानवर को बचाने के चक्कर में ट्रेलर अनियंत्रित होकर खड़ी डीसीएम से टकरा गई। डीसीएम सड़क के किनारे गड्ढे में चली गई और उसके बगल में ट्रेलर पलट गया था। दोनों वाहनों के चालक और खलासी घायल हो गए थे।
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इन स्थानों पर सबसे ज्यादा खतरा
फोरलेन पर हर्रैया के संसारीपुर, छावनी के विक्रमजोत, नगर थाना क्षेत्र के गड़हा गौतम, कप्तानगंज थाना क्षेत्र के पिकौरा सानी, कोतवाली के पटेल चौक, पुरानी बस्ती के हड़िया चौराहा, सबदेइया कला, मुंडेरवा थाने के खजौला, परसा मुजहना आदि स्थानों पर सबसे ज्यादा मवेशी घूमते नजर आ जाते हैं। लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर फुटहिया, खुटहन, पोखरनी तिराहा, बेइली व कुसौरा बाजार में पशुओं को सड़क पर विचरण करते देखा जा सकता है।
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जनपद में निराश्रित गोवंश की संख्या 25529
जिले में निराश्रित गोवंश की संख्या 25529 है। संरक्षित गो वंश की संख्या 4764 है। अस्थायी गो आश्रय स्थल 56 हैं। कान्हा व वृहद गो आश्रय स्थलों की संख्या दो-दो है। एक काजी हादस है। पंजीकृत निजी गो शाला तीन हैं।
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कोट
जिले में बाहर घूम रहे पशुओं को पकड़कर आश्रय स्थलों में भेजने का अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए शहरी क्षेत्र में जागरूक नागरिकों व सभासदों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम प्रधान, कोटेदार, प्रगतिशील किसानों की मदद ली जा रही है।
डॉ. अश्विनी तिवारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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प्राधिकरण की तरफ से सड़कों के किनारे तार या बाड़ लगाने की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे पशुओं को हाईवे पर आने से रोका जा सके।
केपी सिंह, सेक्शन इंजीनियर, एनएचएआई
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फोरलेन व लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर छुट्टा पशुओं के कारण अक्सर हो रहे हादसे
सामने नीलगाय आने से दुर्घटनाग्रस्त हुई थी मुख्यमंत्री के ओएसडी की कार
सोमवार को गड़हा गौतम के पास पशु से टकराकर पलट गया था कंटेनर
बस्ती। जिले से होकर गुजरने वाले लुंबिनी-दुद्धी मार्ग और गोरखपुर-लखनऊ फोरलेन पर मवेशी काल बनकर टहल रहे हैं। दोनों हाईवे के किनारे झाड़ियों में बैठे रहने वाले ये मवेशी अचानक सड़क पर आ जाते हैं। ऐसे में वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। अगस्त महीने में ही इनके चलते दोनों हाईवे पर नौ दुर्घटना हो चुकी है। इनमें दो लोगों की जान भी जा चुकी है।
इन मवेशियों में छुट्टा घूम रहे गोवंशीय पशुओं के अलावा बड़ी संख्या नीलगायों की है, जो झुंड बनाकर सड़क को पार करती रहती हैं। इनकी चपेट में बाइक सवार सबसे ज्यादा आ रहे हैं।
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पशु पालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में निराश्रित गोवंशीय पशुओं की संख्या 25 हजार पांच सौ उन्तीस है। इनमें से सिर्फ 469 पशु ही छुट्टा घूम रहे हैं। जबकि हकीकत में इससे कई गुना पशु फोरलेन और हाईवे पर विचरण करते देखे जा सकते हैं। इसके बावजूद पुलिस, प्रशासन या टोल वसूलने वाली एनएचएआई आंख मूंदे हुए है। एनएचएआई के सुरक्षा प्रबंधक श्याम अवतार शर्मा का कहना है कि पेट्रोलिंग टीमें दिखाई पड़ने वाले पशुओं को भगा देती हैं।
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केस एक
पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री के ओएसडी मोतीलाल सिंह की गाड़ी नीलगाय से टकराने के बाद अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई थी। गोरखनाथ मंदिर में स्थापित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में तैनात रहे मोतीलाल सिंह 25 अगस्त की रात पत्नी के साथ गोरखपुर से लखनऊ जा रहे थे। मुंडेरवा थाने के खजौला चौकी क्षेत्र में पड़ने वाले मुजहना गांव के पास अचानक उनकी गाड़ी के सामने नीलगाय आ गई थी। हादसे में घायल मोतीलाल सिंह की श्री गोरक्षनाथ हॉस्पिटल में मृत्यु हो गई थी।
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केस दो
लखनऊ से गुटखा लादकर एक डीसीएम रविवार रात देवरिया के लार बाजार जा रही थी। कप्तानगंज थाना क्षेत्र के दुधौरा गांव के पास वह खराब हो गई। देर रात बभनान से चीनी लादकर कोलकाता जा रहे ट्रेलर के सामने दुधौरा गांव के पास एक जानवर आ गया। जानवर को बचाने के चक्कर में ट्रेलर अनियंत्रित होकर खड़ी डीसीएम से टकरा गई। डीसीएम सड़क के किनारे गड्ढे में चली गई और उसके बगल में ट्रेलर पलट गया था। दोनों वाहनों के चालक और खलासी घायल हो गए थे।
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इन स्थानों पर सबसे ज्यादा खतरा
फोरलेन पर हर्रैया के संसारीपुर, छावनी के विक्रमजोत, नगर थाना क्षेत्र के गड़हा गौतम, कप्तानगंज थाना क्षेत्र के पिकौरा सानी, कोतवाली के पटेल चौक, पुरानी बस्ती के हड़िया चौराहा, सबदेइया कला, मुंडेरवा थाने के खजौला, परसा मुजहना आदि स्थानों पर सबसे ज्यादा मवेशी घूमते नजर आ जाते हैं। लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर फुटहिया, खुटहन, पोखरनी तिराहा, बेइली व कुसौरा बाजार में पशुओं को सड़क पर विचरण करते देखा जा सकता है।
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जनपद में निराश्रित गोवंश की संख्या 25529
जिले में निराश्रित गोवंश की संख्या 25529 है। संरक्षित गो वंश की संख्या 4764 है। अस्थायी गो आश्रय स्थल 56 हैं। कान्हा व वृहद गो आश्रय स्थलों की संख्या दो-दो है। एक काजी हादस है। पंजीकृत निजी गो शाला तीन हैं।
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कोट
जिले में बाहर घूम रहे पशुओं को पकड़कर आश्रय स्थलों में भेजने का अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए शहरी क्षेत्र में जागरूक नागरिकों व सभासदों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम प्रधान, कोटेदार, प्रगतिशील किसानों की मदद ली जा रही है।
डॉ. अश्विनी तिवारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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प्राधिकरण की तरफ से सड़कों के किनारे तार या बाड़ लगाने की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे पशुओं को हाईवे पर आने से रोका जा सके।
केपी सिंह, सेक्शन इंजीनियर, एनएचएआई