फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   Cases related to Ashnai coming up every third day

हर तीसरे दिन सामने आ रहे आशनाई से जुड़े मामले

Tue, 30 Aug 2022 12:24 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 30 Aug 2022 12:24 AM IST
विज्ञापन
Cases related to Ashnai coming up every third day
हर तीसरे दिन सामने आ रहे आशनाई से जुड़े मामले
विज्ञापन

घर से भागने या मामला खुलने पर परिवार वालों पर लगते हैं आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले में आशनाई के मामलों की फेहरिस्त लगातार बढ़ती जा रही है। सप्ताह में औसतन चार, महीने में 16 और वर्ष में करीब 200 मामले सामने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा लड़की को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के मामले में मुकदमा दर्ज किए जा रहे हैं।
ज्यादातर मामलों में सगे-संबंधी भी आरोपी बना दिए जा रहे हैं। कुछ मामलों में उन्हें पता ही नहीं होता है कि किसने क्या गुल खिलाया। बावजूद इसके वह थाना-कचहरी और जेल काटने पर मजबूर हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित पक्ष तहरीर लेकर आता है कि बालिग या नाबालिग लड़की लेकर भागने में आरोपी की मां, भाई, पिता या अन्य रिश्तेदार ने भी सहयोग किया।
विज्ञापन

इस आधार पर मुकदमे में उनका नाम भी शामिल करना पड़ता है। तफ्तीश में यदि उनकी संलिप्ता नहीं रहती तो उनका नाम मुकदमे से निकाल दिया जाता है। इस विडंबना के फेर में पड़ चुके भुक्तभोगियों का आरोप है कि नाम निकालने के लिए पुलिस को रुपये देने पड़ते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

समाजशास्त्री डॉ. रघुवर पांडेय का कहना है कि इस तरह के मामले समाज में विकृति का रूप अख्तियार करते जा रहे हैं। असंतुलित गतिविधि दिखाई देने पर परिवार वाले दबाव बनाते हैं तो उन्हें पुरानी विचारधारा का बताकर झूठा करार देने का प्रयास किया जाता है। यही बात आगे चलकर समाज में बदनामी का कारण बन जाती है।
सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी नारायण कहते हैं कि इस तरह के मामले बेहद संवेदनशील होते हैं। जिसके परिवार की लड़की घर छोड़कर भागती है वह सामाजिक दबाव और मानसिक रूप सेपरेशान होता है। लड़के के परिवार या सगे-संबंधी की भले ही इसमें भूमिका नहीं होती, लेकिन अभिभावक होने के नाते उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाता है। इसमें पुलिस की तफ्तीश काफी मायने रखती है। विवेचकों को संवेदनशीलता से गुणदोष को देखते हुए आरोपपत्र तैयार करना चाहिए।
...
केस एक
शहर के एक मोहल्ले के किशोर और किशोरी के बीच प्रेम प्रसंग शुरू हुआ। करीब छह महीने के बाद दोनों स्कूल के लिए निकले, लेकिन वहां न जाकर गुरुग्राम चले गए। लड़की के परिवार के लोगों ने कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया, जिसमें आरोपी के माता, पिता, बहन और भाई को बनाया गया। पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बाद में तफ्तीश में पाया गया कि इन चारों की कोई भूमिका नहीं थी।

...
केस दो:
नगर थानाक्षेत्र के एक युवक-युवती का प्रेम प्रसंग लोगों में चर्चा का विषय बन गया था। कुछ दिनों बाद दोनों घर छोड़कर भाग गए। दोनों अपने-अपने घर से नकदी व जेवरात भी लेकर गए। लड़की के परिवार वालों को गुस्से में कुछ नहीं सूझा तो लड़के के भाई और पिता पर सरेराह हमला कर दिया। इस पर एक और मुकदमा थाने में दर्ज हुआ। नतीजन दोनों को जेल जाना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed