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पत्नी और सास की हत्या में आजीवन कारावास
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पत्नी और सास की हत्या में आजीवन कारावास
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सुनाया फैसला, आयुध अधिनियम में भी दोषी मिले
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पत्नी और सास की हत्या के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पृथ्वी पाल यादव की अदालत ने आजीवन कारावास और 32 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न अदा करने पर छह माह की अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी। अर्थदंड का आधा हिस्सा मृतक इंद्रावती के वारिसों को दिया जाएगा।
कप्तानगंज थानाक्षेत्र के बड़ोखर निवासी व इंद्रावती के दामाद रामललित ने 29 सितंबर 2014 को पुलिस को तहरीर दी थी। इसमें उन्होंने कहा था कि हर्रैया थानांतर्गत मरवटिया गांव निवासी विरेंद्र कुमार अपनी पत्नी नीलम के साथ कप्तानगंज स्थित ससुराल पहुंचे। नीलम अयोध्या स्थित डीआईजी कार्यालय में कांस्टेबल के पद पर तैनात थीं। नीलम व उसके जीजा मनोज कुमार का आपसी सामंजस्य ठीक नहीं था।
आपसी सुलह-समझौते के लिए विरेंद्र कुमार ससुराल पहुंचे थे। जब सुलह-समझौता नहीं हुआ तो सभी वापस घर चले गए। बाद में विरेंद्र नीलम पर पिस्टल तानकर सुलह करने का दबाव बनाने लगा। न मानने पर उसने फायर कर दिया। दो गोली नीलम को लगी। आवाज सुनकर बचाने आई सास इंद्रावती को भी उसने दो गोली मार दी। दोनों की घटना स्थल पर मौत हो गई। इसके बाद विरेंद्र फरार हो गया। आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त पिस्टल पुलिस ने बरामद कर ली। अदालत ने आरोपी का आयुध अधिनियम में भी दोषी पाते हुए तीन साल की सश्रम कारावास व दो हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। शासकीय अधिवक्ता नित्यानंद यादव ने अदालत के समक्ष घटना का विवरण रखा।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सुनाया फैसला, आयुध अधिनियम में भी दोषी मिले
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पत्नी और सास की हत्या के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पृथ्वी पाल यादव की अदालत ने आजीवन कारावास और 32 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न अदा करने पर छह माह की अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी। अर्थदंड का आधा हिस्सा मृतक इंद्रावती के वारिसों को दिया जाएगा।
कप्तानगंज थानाक्षेत्र के बड़ोखर निवासी व इंद्रावती के दामाद रामललित ने 29 सितंबर 2014 को पुलिस को तहरीर दी थी। इसमें उन्होंने कहा था कि हर्रैया थानांतर्गत मरवटिया गांव निवासी विरेंद्र कुमार अपनी पत्नी नीलम के साथ कप्तानगंज स्थित ससुराल पहुंचे। नीलम अयोध्या स्थित डीआईजी कार्यालय में कांस्टेबल के पद पर तैनात थीं। नीलम व उसके जीजा मनोज कुमार का आपसी सामंजस्य ठीक नहीं था।
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आपसी सुलह-समझौते के लिए विरेंद्र कुमार ससुराल पहुंचे थे। जब सुलह-समझौता नहीं हुआ तो सभी वापस घर चले गए। बाद में विरेंद्र नीलम पर पिस्टल तानकर सुलह करने का दबाव बनाने लगा। न मानने पर उसने फायर कर दिया। दो गोली नीलम को लगी। आवाज सुनकर बचाने आई सास इंद्रावती को भी उसने दो गोली मार दी। दोनों की घटना स्थल पर मौत हो गई। इसके बाद विरेंद्र फरार हो गया। आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त पिस्टल पुलिस ने बरामद कर ली। अदालत ने आरोपी का आयुध अधिनियम में भी दोषी पाते हुए तीन साल की सश्रम कारावास व दो हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। शासकीय अधिवक्ता नित्यानंद यादव ने अदालत के समक्ष घटना का विवरण रखा।
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