फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   Caretakers of patients becoming brokers

Basti News: कहां जाएं मरीज... दलाल बन रहे मरीजों के केयरटेकर

Sun, 08 Oct 2023 01:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sun, 08 Oct 2023 01:01 AM IST
विज्ञापन
Caretakers of patients becoming brokers
महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज में भी मरीजों को लिखी जा रही बाहर की दवाएं
विज्ञापन

आम लोगों की नहीं हो रही सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले में चिकित्सा सेवा के सबसे बड़े दरबार महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली में भी दवाओं का अभाव है। यहां आने वाले मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। पहले डॉक्टर से परामर्श और जांच के लिए एक भवन से दूसरे भवन तक मरीजों को भटकना पड़ रहा है। इलाज की बारी जब आती है तो संबंधित डॉक्टर की ड्यूटी का समय पूरा हो जा रहा है। फिर तो उन्हें अगले दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। यही नहीं, यहां दलाद मरीजों के केयरटेकर भी बन रहे हैं।
यहां सिर्फ कहने के लिए मेडिकल कॉलेज है, मगर सुविधाएं जिला अस्पताल जैसी है। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी एवं अन्य वार्डों में भर्ती मरीजों को दवा आदि की मुकम्मल सुविधा नहीं मिल पा रही है। भर्ती मरीजों को दवा-इलाज से ज्यादा अपनों के दुआ पर भरोसा है। क्योंकि उनके इलाज में काफी विलंब हो रहा है। मरीज की जरूरत के मुताबिक डॉक्टर उन्हें नहीं मिल पा रहे हैं। अलबत्ता डॉक्टर के मुताबिक मरीजों को इलाज कराना पड़ रहा है। शनिवार को जांच सेंटरों में लंबी लाइन देखने को मिली। मेडिसिन एवं स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में तो भीड़ पूछिए मत।
विज्ञापन

डॉक्टर के कक्ष से लेकर बाहर बरामदे तक ठसाठस मरीज भरे हुए थे। लोगों का डॉक्टर तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसी परिस्थिति में दो तरह के मरीजों को ही डॉक्टर उपलब्ध हो पा रहे हैं। या तो मरीज के साथ कोई रसूखदार हो या फिर अस्पताल में घूमने वाले दलाल, वरना भेड़चाल में इलाज के लिए लाइन लगाए रहिए। इसकी कोई गारंटी नहीं कि डाॅक्टर आप के मरीज को देख ही लेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

...
जब दलाल बन गया केयर टेकर
बनकटी से आए रामस्वरूप पेट के दर्द से छटपटा रहे थे। उनके परिजन पंजीकरण के लिए लाइन में खड़े थे। तभी एक शख्स की नजर पड़ी और वह आगे आया। बोल पड़ा- दादा क्या हुआ है? मरीज के साथ मौजूद महिला ने कहा कि बाबू इनके पेट में बहुत दर्द है। भीड़ के नाते अभी पर्चा नहीं बनवा पाए हैं। इतना सुनते ही वह केयरटेकर की भूमिका में आ गया। बोला- माता जी घबराओ मत अभी सब होगा। परिजन को साथ लिया और भीड़ को चीरते हुए पर्चा काउंटर पर पहुंचा। शख्स को देखते ही पंजीकरण होने लगा। यहां से पर्चा लेने के बाद वह आगे बढ़ा तो पीछे-पीछे मरीज और तीमारदार भी चलने लगे। मेडिसिन विभाग आ गया। यहां मरीजों की भीड़ थी। मगर, उस शख्स ने भीड़ हटाते हुए मरीज को डॉक्टर तक पहुंचा दिया। पर्चे पर दवा और जांच लिखी गई। फिर अपने हाथ में पर्चा और साथ में मरीज लेकर बाहर निकल आया।
अटूट विश्वास बन जाने पर शख्स ने सुझाव दिया कि पर्चे पर लिखी कुछ दवा अस्पताल में मिलेगी और कुछ चलिए हम बाहर से दिलवा रहे हैं। अल्ट्रासाउंड और खून की जांच भी बाहर ही करवा देंगे। यहां भीड़ बहुत है। परिजन मान गए और उसके साथ मरीज लेकर बाहर की ओर चल पड़े। उन्हें नहीं पता कि केयरटेकर की भूमिका निभाने वाले शख्स का रोजाना का यहीं पेशा है और उसे जानकार लोग दलाल कहते हैं। इमरजेंसी और भर्ती वार्डों में भी इस तरह के दलाल केयरटेकर के रूप में मरीज के पास आते रहते हैं। उनके पर्चे पर लिखी बाहर की दवाओं को सेटिंग की दुकानों से दिलवाते हैं।
..
आज नहीं दिखी मुख्यमंत्री के आगमन जैसी व्यवस्था
वार्ड वही है इमरजेंसी। तीन दिन पहले मुख्यमंत्री के आगमन जैसी व्यवस्था की एक झलक भी नहीं दिखी। भाग्यशाली थे वे मरीज जो उस दिन यहां भर्ती थे। उन्हें बेड पर बिछाने और ओढ़ने के लिए साफ-सुथरी चादरें मिली थीं। सफाई ऐसी कि मक्खी तक नजर न आए। वार्ड के बाहर छिड़काव था, अंदर फूलों जैसी महक फैली हुई थी। पल-पल मरीजों पर डॉक्टरों की नजर रही। इस माहौल में मरीजों से मिले थे मुख्यमंत्री। मगर उनके जाने के बाद व्यवस्था फिर पुराने ढर्रे पर। शनिवार को यहां वार्ड में उस हिसाब की सफाई नहीं दिखी। कुछ मरीज बिना चादर के बेड पर सोए हुए थे तो कुछ के चादर गंदे थे। वार्ड से दुर्गंध भी उठ रही थी।
..
मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीजों को नहीं मिल रही दवाएं
मेडिकल वार्ड में 40 मरीज भर्ती पाए गए। इसमें नौ मरीज डेंगू के थे। यहां मरीजों को अस्पताल से कुछ ही दवाएं मिल पा रही हैं। बाकी दवाओं को बाहर से लाना पड़ रहा है। राम शंकर ने बताया कि वह अपने मरीज के लिए बाहर से दवा खरीदकर ला रहे हैं। पीयूष ने बताया कि मरीजों को देखने के लिए 24 घंटे में एक ही बार डॉक्टर पहुंच रहे हैं। यहां इमरजेंसी काॅल पर भी डॉक्टर नहीं आते हैं।

...
पीलिया हुआ है। दो दिन हो गए भर्ती हुए। जांच और दवाएं लिख दी गई हैं। सबकुछ ठीक है, लेकिन कुछ दवाएं बाहर से मंगानी पड़ रही है।
वंदना, बनकटी
...
दो दिन पहले हालत गंभीर हो गई थी। यहां आए तो भर्ती कर दिया गया। बेड का चारद नहीं बदला गया है। दवाएं भी बाहर से आ रही हैं।
सश्या, बानपुर
...
पत्नी का अल्ट्रासाउंड कराने आया था। बताया गया कि 500 रुपये की रसीद कटवाइए। सीएमएस से मिले उन्होंने भी रुपये जमा करना अनिवार्य बताया।
रणजीत पांडेय, मुंडेरवा
...
पेट दर्द और बुखार की समस्या है। यहां भर्ती किया गया है। कुछ दवाएं बाहर से लानी पड़ रही है। 24 घंटे में एक ही बार डॉक्टर आ रहे हैं।
परशुराम, वाल्टरगंज
..
अस्पताल में मरीजों का समुचित इलाज किया जा रहा है। सभी डॉक्टर समय से ओपीडी में बैठ रहे हैं। भीड़ है तो लाइन से ही मरीजों को देखा जाएगा। इमरजेंसी सेवा 24 घंटे उपलब्ध है। बहुत जरूरी दवाएं ही बाहर से मंगाई जा रही है। लोग सीधे डॉक्टर के पास पहुंचे दलाल से मिलने की जरूरत नहीं है। हमारे यहां कुछ जांच के शुल्क निर्धारित हैं। इसकी रसीद दी जाती है।
-डॉ. एएन प्रसाद, सीएमएस
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed