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Basti News: बसों में सवारी का टोटा, ट्रेनों में सीट के लिए मारामारी
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रोडवेज बस्ती डिपो के बेड़े में सवारी के इंतजार में खड़ी बसें संवाद
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बस्ती। रक्षाबंधन पर्व समाप्त होने के बाद रोडवेज बसों में यात्रियों की संख्या लगातार कम हो रही है। ज्यादातर रूटों पर बसें 20 से 25 यात्रियों के साथ ही रवाना हो रही हैं। सवारी कम मिलने के कारण कई बसों का संचालन प्रभावित हुआ है। वहीं, दिल्ली और मुंबई जाने वाली ट्रेनों में सीट के लिए यात्रियों को जूझना पड़ रहा है। वेटिंग टिकट लेकर यात्री कोच में सफर करने को मजबूर हैं।
बस्ती डिपो के बेड़े में निगम की 102 और अनुबंधित 38 बसें हैं। इस तरह डिपो से कुल 140 बसों का संचालन होता है। रक्षाबंधन के दौरान बसों में यात्रियों की भीड़ थी और सीट मिलना मुश्किल हो रहा था। पर्व समाप्त होने के बाद यात्रियों की संख्या में अचानक कमी आई है।
रोडवेज परिसर में भी इसका असर दिखाई दे रहा है। यात्रियों की संख्या कम होने से पहले जैसी चहल-पहल नहीं है। दोपहर के समय परिसर में सन्नाटा नजर आता है। अकबरपुर, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर और दिल्ली समेत विभिन्न रूटों पर बसों को पर्याप्त सवारी मिलने में समय लग रहा है।
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पहले से घट गई संख्या
परिवहन निगम के अनुसार पहले रोजाना करीब 15 से 17 हजार यात्री बसों से सफर करते थे। अब यह संख्या घटकर 12 से 14 हजार के बीच रह गई है। यात्रियों की कमी का सीधा असर डिपो की आय पर पड़ रहा है। करीब 20 प्रतिशत बसों के संचालन पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। अन्य डिपो की बसें भी रोडवेज परिसर के बाहर खड़ी होकर यात्रियों का इंतजार करती नजर आती हैं। हालांकि, निर्धारित समय-सारिणी के तहत कई बसों को पर्याप्त यात्री नहीं मिलने के बावजूद रवाना करना पड़ रहा है। यात्री सुनील और ब्रजेश ने बताया कि ऑफ रूट पर बसों की संख्या कम होने से सफर में दिक्कत होती है। वहीं, ट्रेनों की स्थिति अलग है। दिल्ली और मुंबई जाने वाली ट्रेनों में सीट उपलब्ध नहीं है। यात्रियों को वेटिंग टिकट लेकर कोच में जैसे-तैसे सफर करना पड़ रहा है।
कोट
यात्रियों की संख्या में कमी आई है, जिससे राजस्व प्रभावित हुआ है। आय में सुधार के लिए डग्गेमार वाहनों के खिलाफ अभियान चलाने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। मुख्य मार्ग पर डग्गेमार वाहनों के संचालन के कारण रोडवेज को पर्याप्त सवारी नहीं मिल पा रही है।
-कल्पना श्रीवास्तव, एआरएम, बस्ती
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बस्ती डिपो के बेड़े में निगम की 102 और अनुबंधित 38 बसें हैं। इस तरह डिपो से कुल 140 बसों का संचालन होता है। रक्षाबंधन के दौरान बसों में यात्रियों की भीड़ थी और सीट मिलना मुश्किल हो रहा था। पर्व समाप्त होने के बाद यात्रियों की संख्या में अचानक कमी आई है।
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रोडवेज परिसर में भी इसका असर दिखाई दे रहा है। यात्रियों की संख्या कम होने से पहले जैसी चहल-पहल नहीं है। दोपहर के समय परिसर में सन्नाटा नजर आता है। अकबरपुर, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर और दिल्ली समेत विभिन्न रूटों पर बसों को पर्याप्त सवारी मिलने में समय लग रहा है।
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पहले से घट गई संख्या
परिवहन निगम के अनुसार पहले रोजाना करीब 15 से 17 हजार यात्री बसों से सफर करते थे। अब यह संख्या घटकर 12 से 14 हजार के बीच रह गई है। यात्रियों की कमी का सीधा असर डिपो की आय पर पड़ रहा है। करीब 20 प्रतिशत बसों के संचालन पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। अन्य डिपो की बसें भी रोडवेज परिसर के बाहर खड़ी होकर यात्रियों का इंतजार करती नजर आती हैं। हालांकि, निर्धारित समय-सारिणी के तहत कई बसों को पर्याप्त यात्री नहीं मिलने के बावजूद रवाना करना पड़ रहा है। यात्री सुनील और ब्रजेश ने बताया कि ऑफ रूट पर बसों की संख्या कम होने से सफर में दिक्कत होती है। वहीं, ट्रेनों की स्थिति अलग है। दिल्ली और मुंबई जाने वाली ट्रेनों में सीट उपलब्ध नहीं है। यात्रियों को वेटिंग टिकट लेकर कोच में जैसे-तैसे सफर करना पड़ रहा है।
कोट
यात्रियों की संख्या में कमी आई है, जिससे राजस्व प्रभावित हुआ है। आय में सुधार के लिए डग्गेमार वाहनों के खिलाफ अभियान चलाने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। मुख्य मार्ग पर डग्गेमार वाहनों के संचालन के कारण रोडवेज को पर्याप्त सवारी नहीं मिल पा रही है।
-कल्पना श्रीवास्तव, एआरएम, बस्ती