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30 गांवों में धधक रही शराब की भट्ठियां
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
Updated Thu, 24 May 2018 11:12 PM IST
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पकड़ी गइ श्ाराब
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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बस्ती। कानपुर में जहरीली शराब से पांच की मौत के बाद जागे प्रशासन ने जांच अभियान छेड़ दिया है। बुधवार शाम तक डीएम के निर्देश पर एसडीएम के नेतृत्व में ताबड़तोड़ जांच हुई। जिसमें तीन भट्ठियों को सील किया गया। कानपुर की घटना लाइसेंसी दुकान के शराब से जुड़ी है, इसलिए अफसरों ने लाइसेंसी दुकानों की जांच की है।
आबकारी विभाग की सूची में जिले के 30 गांव ऐसे हैं, जहां हजारों लीटर कच्ची शराब भट्ठियां उगलती हैं और हर वर्ष करीब 15 लाख रुपये की राजस्व क्षति भी होती है। अब यह धंधेबाज भट्ठियों से कच्ची शराब बनाने के बजाय अपमिश्रित शराब की आपूर्ति जिले में करने लगे हैं। इसका खुलासा भी दो बार कप्तानगंज, तो एक बार पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र में हो चुका है। यहां हजारों लीटर अपमिश्रित शराब भी पकड़ी गई, मगर सरगना आज तक पुलिस या आबकारी के हत्थे नहीं चढ़ा है।
लाइसेंसी शराब की जिले में देेसी शराब की 187, अंग्रेजी की 64 जबकि बीयर की 68 दुकानें संचालित होती हैं। इसके अलावा शहर में दो बार भी खुले हैं। इन सभी का लाइसेंस है। इसके अलावा आबकारी विभाग ने जिले को दो भागों में बांटा है। इन सर्किलों में कच्ची शराब के लिए संवेदनशील 30 गांवों को सूचीबद्ध किया गया है। इसके अलावा आधा दर्जन भट्ठे भी कच्ची शराब के लिए बदनाम हैं, मगर इन स्थानों पर पुलिस व आबकारी विभाग अक्सर छापा मारती है, जिससे इस धंधे में जुड़े लोगों का कारोबार प्रभावित हो रहा था। ऐसे में अब यह धंधेबाज स्थान बदलकर अपना काम कर रहे हैं। यही नहीं इन धंधेबाजों की साठगांठ से जिले में कई स्थानों पर अपमिश्रित शराब का भी कारोबार संचालित होता है।
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आबकारी विभाग की सूची में जिले के 30 गांव ऐसे हैं, जहां हजारों लीटर कच्ची शराब भट्ठियां उगलती हैं और हर वर्ष करीब 15 लाख रुपये की राजस्व क्षति भी होती है। अब यह धंधेबाज भट्ठियों से कच्ची शराब बनाने के बजाय अपमिश्रित शराब की आपूर्ति जिले में करने लगे हैं। इसका खुलासा भी दो बार कप्तानगंज, तो एक बार पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र में हो चुका है। यहां हजारों लीटर अपमिश्रित शराब भी पकड़ी गई, मगर सरगना आज तक पुलिस या आबकारी के हत्थे नहीं चढ़ा है।
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लाइसेंसी शराब की जिले में देेसी शराब की 187, अंग्रेजी की 64 जबकि बीयर की 68 दुकानें संचालित होती हैं। इसके अलावा शहर में दो बार भी खुले हैं। इन सभी का लाइसेंस है। इसके अलावा आबकारी विभाग ने जिले को दो भागों में बांटा है। इन सर्किलों में कच्ची शराब के लिए संवेदनशील 30 गांवों को सूचीबद्ध किया गया है। इसके अलावा आधा दर्जन भट्ठे भी कच्ची शराब के लिए बदनाम हैं, मगर इन स्थानों पर पुलिस व आबकारी विभाग अक्सर छापा मारती है, जिससे इस धंधे में जुड़े लोगों का कारोबार प्रभावित हो रहा था। ऐसे में अब यह धंधेबाज स्थान बदलकर अपना काम कर रहे हैं। यही नहीं इन धंधेबाजों की साठगांठ से जिले में कई स्थानों पर अपमिश्रित शराब का भी कारोबार संचालित होता है।
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