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Basti News: तालीम के बहाने मदरसों में हजम होता रहा बजट
Sat, 24 Jun 2023 02:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 24 Jun 2023 02:10 AM IST
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बस्ती। तालीम के बहाने मदरसों में भी लंबा खेल होता रहा। छात्र संख्या के आधार पर विभिन्न मदों में मिले करोड़ों रुपये हर साल हजम होते गए। शासन ने यू-डायस पोर्टल लांच कर इस पर शिकंजा कसना शुरू किया तो कलई खुलने लगी। विभागीय दस्तावेज में दर्ज मदरसा छात्रों की कुल संख्या 22361 में से महज 9838 छात्रों का ही संपूर्ण विवरण पोर्टल पर अपलोड हो सका है। शेष 12317 छात्रों के विवरण को लेकर असमंजस है। अब विभाग संबंधित मदरसों को पत्र जारी कर पल्ला झाड़ रहा है।
वर्ष 2022 में शासन ने सभी मदरसों के डिजिटलाइजेशन के लिए यू-डायस पोर्टल लांच किया। इसमें प्रत्येक मदरसा के छात्रों का आधार सहित संपूर्ण विवरण ऑनलाइन अपलोड किए जाने का निर्देश मिला। पहले मदरसों की ओर से इस पोर्टल को लेकर कोई रुचि नहीं दिखाई गई। इस बार शासन ने सभी मदरसों के लिए यू-डायस पोर्टल अपडेट करना अनिवार्य कर दिया। इसी के बाद से जनपद के मदरसों में हलचल बढ़ी हुई है। जनपद में संचालित 134 मदरसों की ओर से अभी तक 9838 छात्रों का ही संपूर्ण विवरण पोर्टल पर दर्ज किया जा सका है। शेष 12317 छात्रों का आधा अधूरा विवरण पोर्टल पर है। इसीलिए अधिकांश मदरसों में इस पोर्टल पर डाटा लाॅक करने की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है। जनपद के पांच ऐसे मदरसे भी हैं, जिन्होंने पोर्टल पर कोई डाटा ही उपलब्ध नहीं कराया है। इसको लेकर विभाग उन्हें पत्र भी जारी कर चुका है। पोर्टल पर शत-प्रतिशत छात्रों का विवरण अपडेट न होने से छात्र संख्या फर्जी मानी जा रही है। जबकि इसी आधार पर जनपद में मदरसा छात्रों के लिए छात्रवृत्ति एवं शिक्षक वेतनमान का बजट निर्धारित होता रहा है। मुंशी-मौलवी यानी कक्षा 9 से लेकर उच्च कक्षाओं तक के मदरसा छात्रों को एक हजार से दस हजार तक की छात्रवृत्ति अनुमन्य है। इसके अलावा एक से आठ तक के मदरसा बच्चों के लिए मिड-डे मील योजना भी संचालित है। ऐसे में यदि उपलब्ध छात्र संख्या के हिसाब से सही विवरण उपलब्ध नहीं हो पाया तो हर साल खर्च किए गए इन योजनाओं के करोड़ों बजट को लेकर पूरा अमला कठघरे में आ जाएगा। इसी वजह से विभाग में ऊहापोह की स्थिति है। एक-दूसरे पर दोषारोपण कर बचने-बचाने का खेल शुरू हो गया है।
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आधार नंबर की वजह से फंस गया मामला
फर्जी छात्र संख्या के आधार पर मदरसों में बजट हड़पने का खेल यूं ही उजागर नहीं होता। दरअसल यू-डायस पोर्टल पर आधार के अनुसार विवरण फीड करने हैं। इसी के चलते मामला उलझ गया है। यदि मदरसों में पंजीकृत छात्र किसी प्राइमरी विद्यालय या किसी अन्य विद्यालय में भी पंजीकृत है तो आधार के चलते वह पकड़ में आ जा रहा है। उसका विवरण यू-डायस पोर्टल पर फीड नहीं पा हो रहा है। इसी के चलते ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। जनपद में 12317 मदरसा छात्रों का विवरण दूसरे वर्ष भी अभी तक अपलोड नहीं हो सका है। हालांकि विभाग इस छात्र संख्या को फर्जी करार देने से अभी बच रहा है। लेकिन स्पष्ट जवाब किसी जिम्मेदार के पास नहीं है।
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यू-डायस पोर्टल पर डाटा अपलोड किए जाने का कार्य जारी है। 56.08 प्रतिशत मदरसा छात्रों का विवरण अपलोड किया जा चुका है। इसके आधार पर प्रदेश में बस्ती को 16वां स्थान मिला है। शेष 12317 छात्रों का विवरण दर्ज किया जा रहा है। इसे फर्जी छात्र संख्या करार देना उचित नहीं है। बचे हुए छात्रों के विवरण को सत्यापित कर पोर्टल पर लाॅक करने के लिए मदरसों को पत्र भी भेजा गया है। -लालजी यादव, प्रभारी जिला अल्पसंख्यक अधिकारी।
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वर्ष 2022 में शासन ने सभी मदरसों के डिजिटलाइजेशन के लिए यू-डायस पोर्टल लांच किया। इसमें प्रत्येक मदरसा के छात्रों का आधार सहित संपूर्ण विवरण ऑनलाइन अपलोड किए जाने का निर्देश मिला। पहले मदरसों की ओर से इस पोर्टल को लेकर कोई रुचि नहीं दिखाई गई। इस बार शासन ने सभी मदरसों के लिए यू-डायस पोर्टल अपडेट करना अनिवार्य कर दिया। इसी के बाद से जनपद के मदरसों में हलचल बढ़ी हुई है। जनपद में संचालित 134 मदरसों की ओर से अभी तक 9838 छात्रों का ही संपूर्ण विवरण पोर्टल पर दर्ज किया जा सका है। शेष 12317 छात्रों का आधा अधूरा विवरण पोर्टल पर है। इसीलिए अधिकांश मदरसों में इस पोर्टल पर डाटा लाॅक करने की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है। जनपद के पांच ऐसे मदरसे भी हैं, जिन्होंने पोर्टल पर कोई डाटा ही उपलब्ध नहीं कराया है। इसको लेकर विभाग उन्हें पत्र भी जारी कर चुका है। पोर्टल पर शत-प्रतिशत छात्रों का विवरण अपडेट न होने से छात्र संख्या फर्जी मानी जा रही है। जबकि इसी आधार पर जनपद में मदरसा छात्रों के लिए छात्रवृत्ति एवं शिक्षक वेतनमान का बजट निर्धारित होता रहा है। मुंशी-मौलवी यानी कक्षा 9 से लेकर उच्च कक्षाओं तक के मदरसा छात्रों को एक हजार से दस हजार तक की छात्रवृत्ति अनुमन्य है। इसके अलावा एक से आठ तक के मदरसा बच्चों के लिए मिड-डे मील योजना भी संचालित है। ऐसे में यदि उपलब्ध छात्र संख्या के हिसाब से सही विवरण उपलब्ध नहीं हो पाया तो हर साल खर्च किए गए इन योजनाओं के करोड़ों बजट को लेकर पूरा अमला कठघरे में आ जाएगा। इसी वजह से विभाग में ऊहापोह की स्थिति है। एक-दूसरे पर दोषारोपण कर बचने-बचाने का खेल शुरू हो गया है।
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फर्जी छात्र संख्या के आधार पर मदरसों में बजट हड़पने का खेल यूं ही उजागर नहीं होता। दरअसल यू-डायस पोर्टल पर आधार के अनुसार विवरण फीड करने हैं। इसी के चलते मामला उलझ गया है। यदि मदरसों में पंजीकृत छात्र किसी प्राइमरी विद्यालय या किसी अन्य विद्यालय में भी पंजीकृत है तो आधार के चलते वह पकड़ में आ जा रहा है। उसका विवरण यू-डायस पोर्टल पर फीड नहीं पा हो रहा है। इसी के चलते ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। जनपद में 12317 मदरसा छात्रों का विवरण दूसरे वर्ष भी अभी तक अपलोड नहीं हो सका है। हालांकि विभाग इस छात्र संख्या को फर्जी करार देने से अभी बच रहा है। लेकिन स्पष्ट जवाब किसी जिम्मेदार के पास नहीं है।
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यू-डायस पोर्टल पर डाटा अपलोड किए जाने का कार्य जारी है। 56.08 प्रतिशत मदरसा छात्रों का विवरण अपलोड किया जा चुका है। इसके आधार पर प्रदेश में बस्ती को 16वां स्थान मिला है। शेष 12317 छात्रों का विवरण दर्ज किया जा रहा है। इसे फर्जी छात्र संख्या करार देना उचित नहीं है। बचे हुए छात्रों के विवरण को सत्यापित कर पोर्टल पर लाॅक करने के लिए मदरसों को पत्र भी भेजा गया है। -लालजी यादव, प्रभारी जिला अल्पसंख्यक अधिकारी।