{"_id":"699a11b4bc2f4701e70228eb","slug":"brahmarishi-vashishtha-taught-us-the-art-of-living-ram-bhadracharya-basti-news-c-207-1-bst1006-153677-2026-02-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"ब्रह्मर्षि वशिष्ठ ने सिखाई थी जीवन जीने की कला : राम भद्राचार्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ब्रह्मर्षि वशिष्ठ ने सिखाई थी जीवन जीने की कला : राम भद्राचार्य
विज्ञापन
बढ़नी में वशिष्ठ कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु। संवाद
बस्ती। कप्तानंगज के बढ़नी गांव में आयोजित वशिष्ठ कथा के चौथे सत्र में जगतगुरु राम भद्राचार्य ने गुरु के महिमा का बखान किया। कहा कि ब्रह्मर्षि वशिष्ठ ने प्राणियों को जीवन जीने की कला सिखाई थी। उन्होंने मानव धर्म की स्थापना की थी। भगवान राम समेत चारों भाइयों के चरित्र अपनी उत्तम शिक्षा के जरिये इतना उज्ज्वल बना दिया कि वह लोगों के लिए आज भी अनुकरणीय है।
उन्होंने कथा को विस्तार देते हुए कहा कि राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाने में ब्रह्मर्षि वशिष्ठ का योगदान है। भगवान समेत चारों भाइयों को शिक्षा देने वाली ब्रह्मर्षि वशिष्ठ की यह पवित्र धरा बढ़नी फिर से संसार में अपनी प्रतिष्ठा स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि यह उनके जीवन की 1415 वीं कथा बढ़नी में हो रही है। कहा कि कोई बहुत बड़ा धनवान हो सकता है लेकिन गुरु वशिष्ठ के पास राम रूपी ऐसा रतन है जिसकी कोई तुलना नहीं की जा सकती है।
वह सिद्ध करते हैं कि राम नाम के चिंतन से काल, रूप के चिंतन से कर्म, लीला के चिंतन से स्वभाव और उनके धाम के चिंतन से गुण में आई कमियां दूर हो जाती हैं। इसके बाद व्यक्ति एक सुखी जीवन जीने लगता है। कथा के प्रारंभ में मुख्य यजमान चंद्रभूषण मिश्र ने कहा कि आगे इस आयोजन का सूत्रधार कोई और बनें और हम लोग उनके अनुयायी बनकर सहयोग करेंगे।
विज्ञापन
उन्होंने जगतगुरु से अनुरोध किया कि प्रत्येक वर्ष फरवरी में इस आयोजन में उनकी मौजूदगी हो। इस पर जगतगुरु ने कहा कि उनका प्रत्येक वर्ष उपस्थित होना संभव नहीं है लेकिन, उनकी शुभकामनाएं सदैव साथ रहेंगी। उन्होंने कहा कि हर अच्छे काम का विरोध होता है। इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए। कोई भी बड़ा काम बिना बाधा, विरोध के पूरा नहीं होता। इसके तमाम उद्धरण भी है।
बढ़नी में महर्षि वशिष्ठ के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में बहुत बाधाएं आई लेकिन, दृढ़ इच्छा शक्ति से यह शुभ अवसर आ ही गया। इस मौके पर कार्यक्रम संयोजक राना दिनेश प्रताप सिंह, रत्नेश मिश्र, सत्य नारायण मिश्र, दिनेश मिश्र, पूर्व आईएएस ओ एन सिंह, नितेश पांडेय आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
उन्होंने कथा को विस्तार देते हुए कहा कि राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाने में ब्रह्मर्षि वशिष्ठ का योगदान है। भगवान समेत चारों भाइयों को शिक्षा देने वाली ब्रह्मर्षि वशिष्ठ की यह पवित्र धरा बढ़नी फिर से संसार में अपनी प्रतिष्ठा स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि यह उनके जीवन की 1415 वीं कथा बढ़नी में हो रही है। कहा कि कोई बहुत बड़ा धनवान हो सकता है लेकिन गुरु वशिष्ठ के पास राम रूपी ऐसा रतन है जिसकी कोई तुलना नहीं की जा सकती है।
विज्ञापन
वह सिद्ध करते हैं कि राम नाम के चिंतन से काल, रूप के चिंतन से कर्म, लीला के चिंतन से स्वभाव और उनके धाम के चिंतन से गुण में आई कमियां दूर हो जाती हैं। इसके बाद व्यक्ति एक सुखी जीवन जीने लगता है। कथा के प्रारंभ में मुख्य यजमान चंद्रभूषण मिश्र ने कहा कि आगे इस आयोजन का सूत्रधार कोई और बनें और हम लोग उनके अनुयायी बनकर सहयोग करेंगे।
विज्ञापन
उन्होंने जगतगुरु से अनुरोध किया कि प्रत्येक वर्ष फरवरी में इस आयोजन में उनकी मौजूदगी हो। इस पर जगतगुरु ने कहा कि उनका प्रत्येक वर्ष उपस्थित होना संभव नहीं है लेकिन, उनकी शुभकामनाएं सदैव साथ रहेंगी। उन्होंने कहा कि हर अच्छे काम का विरोध होता है। इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए। कोई भी बड़ा काम बिना बाधा, विरोध के पूरा नहीं होता। इसके तमाम उद्धरण भी है।
बढ़नी में महर्षि वशिष्ठ के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में बहुत बाधाएं आई लेकिन, दृढ़ इच्छा शक्ति से यह शुभ अवसर आ ही गया। इस मौके पर कार्यक्रम संयोजक राना दिनेश प्रताप सिंह, रत्नेश मिश्र, सत्य नारायण मिश्र, दिनेश मिश्र, पूर्व आईएएस ओ एन सिंह, नितेश पांडेय आदि मौजूद रहे।