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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   Be careful, Doctor... If you miss even a little bit, the people of Munna Bhai Hospital will buy your degree.

Basti News: सचेत रहिए डाॅक्टर साहब... जरा सा चूके तो मुन्ना भाई अस्पताल वाले खरीद लेंगे आपकी डिग्री

Sat, 01 Jul 2023 01:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sat, 01 Jul 2023 01:20 AM IST
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Be careful, Doctor... If you miss even a little bit, the people of Munna Bhai Hospital will buy your degree.
बस्ती। यदि आपने मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर डाॅक्टर की डिग्री ली है तो सचेत रहिए, वरना कड़ी मेहनत से हासिल आपकी डिग्री मुन्ना भाई अस्पताल वाले खरीद लेंगे। यदि स्वास्थ्य विभाग में पंजीयन के लिए कभी अपनी डिग्री लगाई है तो फौरन छानबीन करने से चूकिए मत। हो सकता है कि आपकी इस डिग्री पर किसी मुन्ना भाई का अस्पताल चल रहा हो। आपको पता तब चलेगा जब संबंधित अस्पताल में किसी मरीज के साथ अनहोनी होगी। मामला तूल पकड़ेगा तो पंजीयन में उपयोग की हुई डिग्री से संबंधित डॉक्टर ही लपेटे में आएंगे। फिर तो अचानक यह कैसे हुआ, क्या हुआ? सोचकर आपका माथा ठनक जाएगा। शांतिपूर्ण जिंदगी में खलल पैदा होना स्वाभाविक है। पुलिस केस आपके नाम दर्ज होगा। विभाग का आरोप पत्र भी आपके नाम जारी होगा।
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दरअसल, निजी चिकित्सा क्षेत्र में डॉक्टरों से ज्यादा छोटे-बड़े व्यवसायी उतर आए हैं। उनके अस्पताल खोलने की ख्वाहिश के आगे कायदा कानून सब ताक पर है। मुन्ना भाई अस्पताल वाले के चक्कर में अच्छे भले डॉक्टर बदनाम हो जा रहे हैं। स्वास्थ्य महकमे में अस्पताल वाले मुन्ना भाइयों की गहरी पैठ हैं। वे मुंहमांगा चढ़ावा चढ़ाते हैं, फिर इनके अस्पताल खोलने की राह विभाग खुद आसान बना देता है। मुन्नाभाई के पास अस्पताल खोलने के लिए मेडिकल की डिग्री, चिकित्सीय अनुभव जैसी कोई अनिवार्य अर्हता नहीं होती है। मगर, विभाग से साठगांठ होने के बाद यह सब उन्हें अपने आप मुहैया हो जाता है। मुन्ना भाइयों के अस्पताल के पंजीयन के लिए सरकारी शुल्क और चढ़ावा के रकम का पैकेज निर्धारित है। इसके एवज में विभाग उनका कागजी कोरम पूरा करा देता है। जिसमें डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की डिग्री मुन्नाभाई के आवेदन के साथ संलग्न हो जाती है। यह सब विभाग के शातिर बाबुओं की करामात से संभव होता है। मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब चिकित्सक अपनी निजी डिस्पेंसरी या नर्सिंग होम के पंजीयन के लिए विभाग में डिग्री के साथ अन्य जरूरी प्रपत्र जमा करते हैं तो उसकी प्रति शातिर बाबू रख लेते हैं। संबंधित डॉक्टर की डिग्री बगैर उनकी जानकारी मुन्नाभाई के अस्पताल के पंजीयन में लगा दी जाती है। जनपद में इस जुगाड़ के सहारे दो दर्जन से अधिक मुन्ना भाइयों के छद्म किस्म के अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं।
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केस नंबर- एक
52 शहरों में एक चिकित्सक की डिग्री पर हुआ अस्पतालों का पंजीयन
बस्ती जिला चिकित्सालय के पास डेंटल चिकित्सक डाॅ. राजेश कुमार की क्लीनिक है। वह यहां नियमित प्रैक्टिस करते हैं। इनके निजी क्लीनिक का पंजीयन स्थानीय स्वास्थ्य विभाग से कराया गया है। पिछले दिनों पता चला कि डाॅ. राजेश कुमार की मेडिकल डिग्री पर प्रदेश के गोरखपुर, बुलंद शहर, बरेली, चंदौली समेत 52 शहरों में अस्पताल, पैथालॉजी, रेडियो डाइग्नोस्टिक सेंटर का पंजीयन है। लखनऊ में इसका भंडाफोड़ हुआ तो स्वास्थ्य महकमा के स्थानीय अफसरों के भी होश उड़ गए। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके मिश्र जांच करने डाॅ. राजेश की क्लीनिक पर पहुंचे। पूछताछ में डाॅ. राजेश ने उनकी डिग्री पर हुए अन्य अस्पतालों के पंजीकरण से अनभिज्ञता जाहिर की। उन्होंने सीएमओ को लिखित पत्र देकर अवगत कराया कि उनकी डिग्री किसी भी निजी अस्पताल के संचालक को उपयोग के लिए कभी नहीं दी गई है। उनकी डिग्री पर अन्य अस्पतालों का पंजीयन कैसे हो गया यह उन्हें नहीं मालूम है।
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केस नंबर- दो
शहरी क्षेत्र के एक प्राइवेट हास्पिटल में नौकरी कर रहे डाॅ. पीपी मिश्रा की डिग्री भी कई निजी अस्पतालों के पंजीयन में लगाई गई है। रुधौली क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में उनके नाम का बोर्ड लगा हुआ था। किसी जानने वाले ने उन्हें जब यह बताया कि तो उनका माथा ठनका। डाॅ. पीपी मिश्रा ने विभाग से संपर्क किया तो पता चला कि उनकी डिग्री पर संबंधित अस्पताल का पंजीकरण हुआ है। उन्होंने तत्काल पत्र देकर मामले से विभाग को अवगत कराया। बावजूद इसके अस्पताल से उनके नाम का बोर्ड जब नहीं हटा तो उन्होंने संबंधित थाने पर तहरीर दी। डाॅ. पीपी मिश्रा की डिग्री का प्रयोग कुछ अन्य निजी अस्पतालों के पंजीयन में भी होना बताया जा रहा है।
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40 निजी अस्पतालों के पंजीयन के नवीनीकरण पर रोक
स्वास्थ्य विभाग ने जनपद के 40 निजी अस्पतालों के पंजीयन पर रोक लगा दी है। जनपद में 198 निजी अस्पताल संचालित किए जा रहे थे। विभाग इन अस्पतालों के सत्यापन में जुट गया। अब तक 40 अस्पतालों के पंजीयन में बगैर अनुमति के चिकित्सकों की डिग्री प्रयोग होते पाई गई। जिन चिकित्सकों की डिग्री पंजीयन में लगाई गई है उनका संबंधित अस्पताल से कोई ताल्लुक ही नहीं पाया गया। इस वजह से इन अस्पतालों के पंजीकरण के नवीनीकरण पर रोक लगा दी गई है।
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मुन्ना भाई के अस्पताल में हर मर्ज का इलाज
मेडिकल की पढ़ाई करने वाले चिकित्सक की पकड़ अमूमन एक विषय पर होती है। दूसरे विषय के रोगी का इलाज वह नहीं करते हैं। वहीं मुन्ना भाई के अस्पताल में हर मर्ज का इलाज किया जा रहा है। कुछ मुन्ना भाइयों ने मरीजों को विश्वास दिलाने के लिए बाकायदे गोरखपुर और लखनऊ के प्रतिष्ठित चिकित्सकों का बोर्ड चस्पा किया है। जबकि उन चिकित्सकों से इनका कोई अनुबंध नहीं है। इसका ब्योरा स्वास्थ्य विभाग को भी उपलब्ध नहीं है। केवल डॉक्टरों के नाम के सहारे साधारण एवं क्रिटिकल सर्जरी, घुटना प्रत्यारोपण, बवासीर, हृदय रोग, न्यूरो संबंधी आदि गंभीर बीमारियों को ठीक करने का दावा मुन्ना भाई के अस्पताल की ओर से किया जा रहा है। इस आशय का पैंफ्लेट भी बंटवाया जा रहा है। जबकि इतने मर्ज के इलाज की व्यवस्था यहां के सरकारी अस्पतालों में नहीं है। ऐसे मरीज जब मुन्ना भाई के अस्पताल में पहुंचते हैं तो उन्हें अस्पताल में तैयार दो-चार बेड के वातानुकूलित वेंटीलेटर वार्ड में भर्ती कर दिया जाता है। जिनके इलाज को संबंधित चिकित्सक के बजाय कोई और उपस्थित होता है। स्थिति बिगड़ने पर मरीज को रेफर कर दिया जाता है, लेकिन तब तक मुन्ना भाई के अस्पताल का अच्छा खासा बिल तैयार हो जाता है।

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जनपद में संचालित सभी निजी अस्पतालों का सत्यापन कराया जाएगा। जिस अस्पताल के पंजीयन में जिस डॉक्टर की डिग्री संलग्न है, उनकी स्वीकृति के साथ उनका वहां नियमित बैठना भी अनिवार्य है। ऐसा न पाए जाने पर संबंधित अस्पताल का पंजीयन निरस्त होगा। कुछ ऐसे मामले संज्ञान में आने के बाद 40 निजी अस्पतालों के नवीनीकरण पर रोक लगा दी गई है। -डॉ. आरपी मिश्र, सीएमओ, बस्ती।
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