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Basti News: बेस्वाद सब्जी, पानी की तरह दाल... जली रोटी-चावल बेच हो रहे मालामाल
Wed, 23 Jul 2025 12:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 23 Jul 2025 12:37 AM IST
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- कांवड़ यात्रा में भी धंधेबाजों ने ढूंढ़ लिया अवसर, सौ रुपये थाली वाले भोजन की गुणवत्ता खराब
- प्रयोग हो चुके तेल से कई बार निकाल रहे भटूरा, पकौड़ा, समोसा सेहत के लिए नुकसानदेह
बस्ती। कांवड़ यात्रा में धंधेबाज अपने कारनामों से बाज नहीं आए। शिवभक्तों की भीड़ बढ़ी तो प्रशासन की सख्ती भी बेअसर हो गई। होटलों, ढाबों एवं जलपान की दुकानों पर बेस्वाद खाद्य सामग्रियों की बिक्री ने जोर पकड़ लिया है। कांवड़ मार्ग के होटलों, ढाबों पर मिलने वाले भोजन, नाश्ता की गुणवत्ता से कांवड़िए खुश नहीं है। उनका कहना है कि सौ रुपये वाली थाली में बेस्वाद सब्जी है और पानी की तरह दाल है। काफी इंतजार के बाद अधजली रोटी और कोटे के अनाज जैसा चावल मिल रहा है। पेट भरने के लिए मजबूरी में खाना पड़ रहा है। एक तो मिलावटी तेल और घी हैं ही, दूसरे इनका कई बार प्रयोग भी किया जा रहा हैं। फिर भी कढ़ाई में उसी को गर्म करके पकाैड़े, समोसे, भटूरे तैयार किए जा रहे हैं। कांवड़ियों की भीड़ में यह सब खप भी जा रहे हैं।
कांवड़ लेकर चल रहे मुंडेरवा के प्रमोद कुमार ने बताया कि पहली रात विक्रमजोत के एक बड़े ढाबे पर रूके। वहां डेढ़ सौ रुपये थाली के हिसाब से खाना मंगवाया। आलू-परवल की रसेदार सब्जी बेस्वाद थी। उसमें नमक-पानी का घोल ज्यादा था। आलू और परवल के टुकड़े खोजने पड़ रहे थे। दाल भी पानी की तरह थी। काफी इंतजार के बाद रोटी मिली तो कुछ हिस्सा जला हुआ था कुछ अधपका था। थाली में चावल भी घटिया किस्म का परोसा जा रहा है।
वहीं नगर बाजार के आकाश ने बताया कि कांवड़ मेले में धंधेबाज कोटे का अनाज खपा रहे हैं। खराब किस्म के चावल पकाकर थाली में परोस दे रहे हैं। दाल के नाम पर हल्दी के कलर का पानी दिया जा रहा है। सूखी सब्जी के बजाए रसेदार सब्जी दी जा रही हैं ताकि लागत कम आए। पेट भरना मजबूरी है इसलिए हम लोग रास्ते में ऐसा भोजन कर रहे हैं। जबकि गांधीनगर के राजेश ने बताया कि फास्टफूड वाले सेहत के साथ और खिलवाड़ कर रहे हैं। एक ही तेल को बार-बार गर्म करके भटूरा, पकौड़े और समोसे को छानकर बेच रहे हैं। यदि इसका नियमित सेवन कर लिया जाए तो तबीयत बिगड़ जाएगी।
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महेश कुमार ने बताया कि कांवड़ मेले में सबसे ज्यादा खान पान के सामग्रियों में मिलावट की शिकायत रहती है। चाय भी जल्दी ठीक नहीं मिलती है। भीड़ ज्यादा देखकर धंधेबाज हर जगह छाए रहते हैं। चाय में दूध का पता ही नहीं है और एक चाय का 10 से 15 रुपये लिया जा रहा है। कांवड़िए यदि सवाल उठाए तो उन्हीं पर उपद्रव का उलटा आरोप लग रहा है। वहीं बैरियहवां के अमित पांडेय ने कहा कि मेले के दौरान होटल, ढाबों, रेस्टोरेंट समेत अन्य फास्टफूड की दुकानों पर विशेष सख्ती होनी चाहिए। इनके खाद्य पदार्थों के गुणवत्ता की जांच की व्यवस्था बननी चाहिए। रास्ते में दो-तीन जगहों पर शिकायत फोरम की स्थापना होनी चाहिए, जिससे कांवड़ यात्रा में अवसर ढूंढ़ने वाले धंधेबाजों पर प्रभावी अंकुश लग सकें। लाखों की भीड़ में जिसका मन हो रहा है वही एक लीटर दूध में 10 लीटर चाय तैयार करके हजार रुपये से अधिक की कमाई घंटे भर में कर ले रहा है।
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ढाबों से बढि़या भंडारे की व्यवस्था
कांवड़ यात्री गनेशपुर के संदीप यादव ने बताया कि ढाबा, होटल से बढि़या तो सेवादारों की ओर किए भंडारे की व्यवस्था अच्छी है। यहां सीमित लोगों की व्यवस्था भले हैं लेकिन खाद्य सामग्रियों की गुणवत्ता ठीक है। कांवड़ में अधिकांश श्रद्धालु अपने खर्च से भोजन आदि करना पसंद करते हैं। लेकिन, होटलों, ढाबों पर मिलने वाले भोजन, चाय, नाश्ता की गुणवत्ता खराब होने से कुछ लोग भंडारे में पहुंचकर भूख मिटा रहे हैं।
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कांवड़ मेले के दृष्टिगत सभी होटल, ढाबा संचालक एवं दुकानदारों को गुणवत्तापरक खाद्य सामग्री बेचने के निर्देश दिए गए थे। यदि इसके बाद भी मनमानी हुई है तो भविष्य में इसका ध्यान दिया जाएगा। वैसे कुछ जगहों से खाद्य सामग्रियों के नमूने लिए गए हैं। जांच में रिपोर्ट अनुकूल नहीं मिली तो कार्रवाई होगी।
चितरंजन कुमार, अभिहीत अधिकारी।
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- प्रयोग हो चुके तेल से कई बार निकाल रहे भटूरा, पकौड़ा, समोसा सेहत के लिए नुकसानदेह
बस्ती। कांवड़ यात्रा में धंधेबाज अपने कारनामों से बाज नहीं आए। शिवभक्तों की भीड़ बढ़ी तो प्रशासन की सख्ती भी बेअसर हो गई। होटलों, ढाबों एवं जलपान की दुकानों पर बेस्वाद खाद्य सामग्रियों की बिक्री ने जोर पकड़ लिया है। कांवड़ मार्ग के होटलों, ढाबों पर मिलने वाले भोजन, नाश्ता की गुणवत्ता से कांवड़िए खुश नहीं है। उनका कहना है कि सौ रुपये वाली थाली में बेस्वाद सब्जी है और पानी की तरह दाल है। काफी इंतजार के बाद अधजली रोटी और कोटे के अनाज जैसा चावल मिल रहा है। पेट भरने के लिए मजबूरी में खाना पड़ रहा है। एक तो मिलावटी तेल और घी हैं ही, दूसरे इनका कई बार प्रयोग भी किया जा रहा हैं। फिर भी कढ़ाई में उसी को गर्म करके पकाैड़े, समोसे, भटूरे तैयार किए जा रहे हैं। कांवड़ियों की भीड़ में यह सब खप भी जा रहे हैं।
कांवड़ लेकर चल रहे मुंडेरवा के प्रमोद कुमार ने बताया कि पहली रात विक्रमजोत के एक बड़े ढाबे पर रूके। वहां डेढ़ सौ रुपये थाली के हिसाब से खाना मंगवाया। आलू-परवल की रसेदार सब्जी बेस्वाद थी। उसमें नमक-पानी का घोल ज्यादा था। आलू और परवल के टुकड़े खोजने पड़ रहे थे। दाल भी पानी की तरह थी। काफी इंतजार के बाद रोटी मिली तो कुछ हिस्सा जला हुआ था कुछ अधपका था। थाली में चावल भी घटिया किस्म का परोसा जा रहा है।
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वहीं नगर बाजार के आकाश ने बताया कि कांवड़ मेले में धंधेबाज कोटे का अनाज खपा रहे हैं। खराब किस्म के चावल पकाकर थाली में परोस दे रहे हैं। दाल के नाम पर हल्दी के कलर का पानी दिया जा रहा है। सूखी सब्जी के बजाए रसेदार सब्जी दी जा रही हैं ताकि लागत कम आए। पेट भरना मजबूरी है इसलिए हम लोग रास्ते में ऐसा भोजन कर रहे हैं। जबकि गांधीनगर के राजेश ने बताया कि फास्टफूड वाले सेहत के साथ और खिलवाड़ कर रहे हैं। एक ही तेल को बार-बार गर्म करके भटूरा, पकौड़े और समोसे को छानकर बेच रहे हैं। यदि इसका नियमित सेवन कर लिया जाए तो तबीयत बिगड़ जाएगी।
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महेश कुमार ने बताया कि कांवड़ मेले में सबसे ज्यादा खान पान के सामग्रियों में मिलावट की शिकायत रहती है। चाय भी जल्दी ठीक नहीं मिलती है। भीड़ ज्यादा देखकर धंधेबाज हर जगह छाए रहते हैं। चाय में दूध का पता ही नहीं है और एक चाय का 10 से 15 रुपये लिया जा रहा है। कांवड़िए यदि सवाल उठाए तो उन्हीं पर उपद्रव का उलटा आरोप लग रहा है। वहीं बैरियहवां के अमित पांडेय ने कहा कि मेले के दौरान होटल, ढाबों, रेस्टोरेंट समेत अन्य फास्टफूड की दुकानों पर विशेष सख्ती होनी चाहिए। इनके खाद्य पदार्थों के गुणवत्ता की जांच की व्यवस्था बननी चाहिए। रास्ते में दो-तीन जगहों पर शिकायत फोरम की स्थापना होनी चाहिए, जिससे कांवड़ यात्रा में अवसर ढूंढ़ने वाले धंधेबाजों पर प्रभावी अंकुश लग सकें। लाखों की भीड़ में जिसका मन हो रहा है वही एक लीटर दूध में 10 लीटर चाय तैयार करके हजार रुपये से अधिक की कमाई घंटे भर में कर ले रहा है।
ढाबों से बढि़या भंडारे की व्यवस्था
कांवड़ यात्री गनेशपुर के संदीप यादव ने बताया कि ढाबा, होटल से बढि़या तो सेवादारों की ओर किए भंडारे की व्यवस्था अच्छी है। यहां सीमित लोगों की व्यवस्था भले हैं लेकिन खाद्य सामग्रियों की गुणवत्ता ठीक है। कांवड़ में अधिकांश श्रद्धालु अपने खर्च से भोजन आदि करना पसंद करते हैं। लेकिन, होटलों, ढाबों पर मिलने वाले भोजन, चाय, नाश्ता की गुणवत्ता खराब होने से कुछ लोग भंडारे में पहुंचकर भूख मिटा रहे हैं।
कांवड़ मेले के दृष्टिगत सभी होटल, ढाबा संचालक एवं दुकानदारों को गुणवत्तापरक खाद्य सामग्री बेचने के निर्देश दिए गए थे। यदि इसके बाद भी मनमानी हुई है तो भविष्य में इसका ध्यान दिया जाएगा। वैसे कुछ जगहों से खाद्य सामग्रियों के नमूने लिए गए हैं। जांच में रिपोर्ट अनुकूल नहीं मिली तो कार्रवाई होगी।
चितरंजन कुमार, अभिहीत अधिकारी।