{"_id":"67194f94a52442fd190d3955","slug":"ban-on-return-of-techniciansalternative-icu-ward-will-not-be-able-to-function-basti-news-c-207-1-bst1001-126138-2024-10-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: टेक्नीशियनों की वापसी पर रोक...नहीं चल पाएगा वैकल्पिक आईसीयू वार्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: टेक्नीशियनों की वापसी पर रोक...नहीं चल पाएगा वैकल्पिक आईसीयू वार्ड
Thu, 24 Oct 2024 01:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 24 Oct 2024 01:03 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज में गंभीर मरीजों के इलाज की व्यवस्था नहीं बन पा रही है। विकल्प के तौर पर तैयार किया जा रहा 10 बेड के आईसीयू वार्ड के संचालन पर फिर संकट आ गया है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कोरोना काल के जिन टेक्नीशियनों के भरोसे यह व्यवस्था बहाल करने की योजना बनाई थी, उस पर पानी फिर गया है। टेक्नीशियनों के पुर्नवापसी पर रोक लग गई है।
मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बेहतर सेवा देने की भरसक कोशिश भले की जा रही है। मगर, कोई न कोई अड़चन इस मंशा पर पानी फेर दे रहा है।
इधर, हाल ही में कॉलेज में आईसीयू की व्यवस्था के लिए क्रिटिकल केयर भवन बनाया जा रहा है। तब तक के लिए कॉलेज प्रशासन ने वैकल्पिक रूप से 10 बेड़ का आईसीयू तैयार कर रहा है। मगर, टेक्नीशियनों की कमी के चलते इसे संचालित करने में दिक्कत आ रही थी।
विज्ञापन
इसी के चलते जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में कोरोना कॉल के बाद हटा दिए गए आउट सोर्सिंग के टेक्नीशियनों को भर्ती कर उनसे काम लेने की योजना बनाई थी। मगर, इस योजना पर वित्त नियंत्रक की रोक ने पेच लगा दिया है।
इससे आईसीयू संचालित करने की मंशा को झटका लग गया है। कोरोना काल के दौरान मेडिकल कॉलेज में विशेष अस्पताल का संचालन किया जा रहा था। यहां कोरोना के गंभीर मरीज भर्ती होते थे।
120 वेंटिलेटर के माध्यम से आईसीयू भी संचालित हो रहा था। मगर, कोरोना काल के बाद सबकुछ बदल गया। आईसीयू बंद हो गई। कारण उस समय जिने टेक्नीशियनों को रखा गया था, बाद में उन्हें हटा दिया गया। आउट सोर्स से रखे गए यह टेक्नीशियन पूरी तरह प्रशिक्षित थे।
इसे देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन उनसे समय- समय पर काम भी लेता रहा है। आपातकाल में यह टेक्नीशियन सहयोग करते थे।
इधर, मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भीड़ बढ़ी तो स्थिति को संभालने के लिए कॉलेज प्रशासन ने जूनियर डॉक्टरों का भरपूर उपयोग शुरू कर दिया है। मगर अब भी यहां जीवन रक्षक आईसीयू की जरूरत महसूस हो रही है।
इसे देखते हुए प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने शासन स्तर पर प्रयास किया। इसका परिणाम भी आया। प्रमुख सचिव ने कोरोना कॉल के तकनीकी कर्मियों को समायोजित करने का निर्देश दिया, जिस पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में भी यह मुद्दा रखा।
सब कुछ ठीक चल रहा था, मगर वित्त नियंत्रक ने धनभाव का कारण बताते हुए टेक्नीशियनों के पुर्नवापसी पर रोक लगा दी है।
इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने वैकल्पिक आईसीयू के संचालन से हाथ खींच लिए हैं। अब आईसीयू के गंभीर मरीजों को यहां से रेफर करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।
विज्ञापन
बस्ती। महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज में गंभीर मरीजों के इलाज की व्यवस्था नहीं बन पा रही है। विकल्प के तौर पर तैयार किया जा रहा 10 बेड के आईसीयू वार्ड के संचालन पर फिर संकट आ गया है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कोरोना काल के जिन टेक्नीशियनों के भरोसे यह व्यवस्था बहाल करने की योजना बनाई थी, उस पर पानी फिर गया है। टेक्नीशियनों के पुर्नवापसी पर रोक लग गई है।
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बेहतर सेवा देने की भरसक कोशिश भले की जा रही है। मगर, कोई न कोई अड़चन इस मंशा पर पानी फेर दे रहा है।
इधर, हाल ही में कॉलेज में आईसीयू की व्यवस्था के लिए क्रिटिकल केयर भवन बनाया जा रहा है। तब तक के लिए कॉलेज प्रशासन ने वैकल्पिक रूप से 10 बेड़ का आईसीयू तैयार कर रहा है। मगर, टेक्नीशियनों की कमी के चलते इसे संचालित करने में दिक्कत आ रही थी।
विज्ञापन
इसी के चलते जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में कोरोना कॉल के बाद हटा दिए गए आउट सोर्सिंग के टेक्नीशियनों को भर्ती कर उनसे काम लेने की योजना बनाई थी। मगर, इस योजना पर वित्त नियंत्रक की रोक ने पेच लगा दिया है।
इससे आईसीयू संचालित करने की मंशा को झटका लग गया है। कोरोना काल के दौरान मेडिकल कॉलेज में विशेष अस्पताल का संचालन किया जा रहा था। यहां कोरोना के गंभीर मरीज भर्ती होते थे।
120 वेंटिलेटर के माध्यम से आईसीयू भी संचालित हो रहा था। मगर, कोरोना काल के बाद सबकुछ बदल गया। आईसीयू बंद हो गई। कारण उस समय जिने टेक्नीशियनों को रखा गया था, बाद में उन्हें हटा दिया गया। आउट सोर्स से रखे गए यह टेक्नीशियन पूरी तरह प्रशिक्षित थे।
इसे देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन उनसे समय- समय पर काम भी लेता रहा है। आपातकाल में यह टेक्नीशियन सहयोग करते थे।
इधर, मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भीड़ बढ़ी तो स्थिति को संभालने के लिए कॉलेज प्रशासन ने जूनियर डॉक्टरों का भरपूर उपयोग शुरू कर दिया है। मगर अब भी यहां जीवन रक्षक आईसीयू की जरूरत महसूस हो रही है।
इसे देखते हुए प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने शासन स्तर पर प्रयास किया। इसका परिणाम भी आया। प्रमुख सचिव ने कोरोना कॉल के तकनीकी कर्मियों को समायोजित करने का निर्देश दिया, जिस पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में भी यह मुद्दा रखा।
सब कुछ ठीक चल रहा था, मगर वित्त नियंत्रक ने धनभाव का कारण बताते हुए टेक्नीशियनों के पुर्नवापसी पर रोक लगा दी है।
इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने वैकल्पिक आईसीयू के संचालन से हाथ खींच लिए हैं। अब आईसीयू के गंभीर मरीजों को यहां से रेफर करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।