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Basti News: घूस लेते एंटी करप्शन पकड़ेगी तो जेल, वरना चलेगी जांच

Sun, 06 Aug 2023 12:08 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 06 Aug 2023 12:08 AM IST
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anti coroption team
बस्ती। एक दिन एक ही तरह की दो घटनाएं। मगर सजा अलग-अलग है। चकबंदी कार्यालय में तैनात लिपिक को घूस लेते रंगे हाथ एंटी करप्शन टीम ने पकड़ा। उसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज हो गया और अगले दिन उसे जेल जाना पड़ा। वहीं कुछ ही लम्हों के अंतराल पर बीडीए कार्यालय में तैनात अवर अभियंता (जेई) का भी घूस लेते वीडियो वायरल हो गया, जिसकी सजा महज संबद्धीकरण समाप्त कर मामले की जांच शुरू होनी बताई गई। इस दोहरे मापदंड की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
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लाजिमी भी है, जब दोष एक जैसा है तो सजा भी बराबर की होनी चाहिए। शुक्रवार को एक ही प्रवृत्ति के दो मामले टकराए तो कानून के रक्षकों का नजरिया सामने आ गया। चकबंदी कार्यालय सदर और बीडीए कार्यालय का भवन अगल-बगल है। दोपहर में लगभग 12 बजे चकबंदी कार्यालय में एंटी करप्शन टीम पहुंची। यहां तैनात लिपिक अजीजुर्रहमान को 8 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ पकड़ लिया गया। टीम भीड़ को चीरते हुए फिल्मी स्टाइल में लिपिक को लेकर रवाना हो गई।
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शाम तक उसके खिलाफ केस दर्ज हो गया। वहीं बगल के बीडीए कार्यालय में कुछ ही देर बाद यहां संबद्ध किए गए पीडब्ल्यूडी के जेई केके चौधरी का एक व्यापारी से 40 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल हो गया। अंतर सिर्फ इतना था कि रिश्वतखोरी का यह खुलासा आम लोगों के प्रयास से हुआ। इसलिए सजा में भी जमीन-आसमान जैसा अंतर आ गया। जिले के आला अधिकारियों ने संबंधित जेई की संबद्धता खत्म कर उन्हें मूल विभाग में वापस भेज दिया।
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डीएम ने घूस लेते हुए वायरल वीडियो की जांच निर्देश दे दिए। अब कार्रवाई के इस दोहरे मापदंड पर व्यापारी समाज ने सवाल खड़ा कर दिया है।
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आखिर कार्रवाई में अंतर क्यों?
उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष सुनील गुप्ता, दिनेश सोनी, जगमोहन, मनीष गुप्ता ने कहा कि एक ही दिन की बात है। चकबंदी कार्यालय में घूस लेते पकड़े गए लिपिक पर केस दर्ज कर जेल पहुंचाने तक की कार्रवाई की गई। वहीं बीडीए जेई का रिश्वत लेते हुए वीडियो सार्वजनिक होने के बाद कोई भी संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन की यह दोहरी नीति है। आम नागरिकों का महत्व प्रशासन की नजर में कुछ भी नहीं है। आखिर कोई भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज किस हिम्मत से उठाएगा। यह हाल तब है जब भ्रष्टाचार उन्मूलन मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में शामिल है। फिलहाल संगठन इस मामले को लेकर आंदोलन करेगा।
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विभागाध्यक्ष को दर्ज कराना चाहिए केस
यदि किसी कर्मचारी, अधिकारी का घूस लेते वीडियो वायरल हो रहा है तो संबंधित विभागाध्यक्ष को इसका संज्ञान लेना चाहिए। वीडियो को आधार बनाकर आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कराना चाहिए। एंटी करप्शन घूस लेते हुए कर्मचारी, अधिकारी को खुद पकड़ती है, इसलिए मुकदमे का वादी वहीं बनती है। यदि अन्य किसी माध्यम से किसी का घूस लेते हुए वीडियो वायरल हो रहा है तो अपराध एक जैसा ही है। केस इसमें भी दर्ज होना चाहिए।

-प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव, पूर्व सहायक शासकीय अधिवक्ता।
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प्रकरण संज्ञान में है। संबंधित जेई की संबद्धता खत्म कर दी गई है। वीडियो क्लिप की जांच कराई जा रही है। आरोपों की पुष्टि होने पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
-कमलेश चंद्र, सचिव, बीडीए/एडीएम
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