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एंबुलेंस सेवा: पहले साबित की उपयोगिता, अब मिल रही शिकायत
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
Updated Sat, 10 Mar 2018 11:27 PM IST
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गांधीनगर के भीड़भाड़ वाले क्षेत्र से जिला अस्पताल पहुंची एंबुलेंस।
- फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। मरीज गंभीर हालत में हो तो एक-एक पल घंटों के समान गुजरता है। समय पर यदि उसे अस्पताल पहुंचाकर चिकित्सीय सुविधा मुहैया करा दी जाए तो जान बचाई जा सकती है। लेकिन जरा भी देर होने पर पछतावे के सिवा कुछ हासिल नहीं होता।
सरकारी एंबुलेंस 108 और 102 नंबर सेवा के जरिए सुदूर गांवों के लोगों को जरूरत पर 24 घंटे मदद पहुंचाकर जितनी जल्दी सफलता हासिल की, उतनी तेजी से साख गंवाती जा रही है। हालात यहां तक बिगड़ चुके हैं कि मरीज को निजी साधन से पहुंचाने के बाद यह सेवा पहुंच रही है। सीएमओ डॉ. जेएल कुशवाहा का कहना है कि एंबुलेंस सेवा को पारदर्शी बनाने के लिए शासन स्तर से कड़े निर्देश दिए जा रहे हैं। एंबुलेंस में मरीजों को अटेंड करने के लिए डॉक्टर तैनात करने की बात चल रही है। मौके पर कुछ विसंगतियां सामने आती हैं तो उसकी शिकायत मिलते ही कार्रवाई की जा रही है।
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सरकारी एंबुलेंस 108 और 102 नंबर सेवा के जरिए सुदूर गांवों के लोगों को जरूरत पर 24 घंटे मदद पहुंचाकर जितनी जल्दी सफलता हासिल की, उतनी तेजी से साख गंवाती जा रही है। हालात यहां तक बिगड़ चुके हैं कि मरीज को निजी साधन से पहुंचाने के बाद यह सेवा पहुंच रही है। सीएमओ डॉ. जेएल कुशवाहा का कहना है कि एंबुलेंस सेवा को पारदर्शी बनाने के लिए शासन स्तर से कड़े निर्देश दिए जा रहे हैं। एंबुलेंस में मरीजों को अटेंड करने के लिए डॉक्टर तैनात करने की बात चल रही है। मौके पर कुछ विसंगतियां सामने आती हैं तो उसकी शिकायत मिलते ही कार्रवाई की जा रही है।
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