{"_id":"62c48a4265a6aa32230571f6","slug":"altrasound-closed-in-ditt-hospital-basti-news-gkp44273836","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला व महिला अस्पताल में तीन माह से बंद है अल्ट्रासाउंड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला व महिला अस्पताल में तीन माह से बंद है अल्ट्रासाउंड
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला व महिला अस्पताल में तीन माह से बंद है अल्ट्रासाउंड
बस्ती। जिला चिकित्सालय व महिला अस्पताल का अल्ट्रासाउंड तीन माह से बंद है।
यहां ओपेक चिकित्सालय कैली में तैनात रेडियोलॉजिस्ट अस्थायी तौर पर तीन-तीन दिन अल्ट्रासाउंड करती थीं, मगर तीन माह पहले उनका स्थानांतरण कर दिया गया। इसके बाद से ही दोनों अस्पताल के अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद हो गए। नतीजतन मरीज मजबूरन सात से आठ सौ रुपये खर्च कर निजी सेंटरों से जांच कराते हैं। अस्पताल के जिम्मेदारों को उम्मीद थी कि स्थानांतरण के दौरान एक रेडियोलॉजिस्ट मिल जाएंगे, मगर वह नहीं हुआ। नतीजतन अब इसके संचालन की रही सही उम्मीद भी समाप्त हो गई है।
उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल में हर दिन तकरीबन सौ अल्ट्रासाउंड के केस आते हैं। इसके अलावा यहीं विभिन्न मामलों के मेडिकल जांच भी होते हैं। दूसरी ओर महिला अस्पताल में गर्भवती के इलाज व जांच की निशुल्क व्यवस्था है, मगर अधिकांश गर्भवती को चिकित्सक अल्ट्रासाउंड की भी सलाह देते हैं। चिकित्सकों की मानें तो यह हर दिन करीब डेढ़ सौ अल्ट्रासाउंड होता था, मगर स्थानांतरण के बाद यह व्यवस्था निजी सेंटरों के हवाले हो गई, जहां सात से आठ सौ रुपये लिए जाते हैं। इन दोनों चिकित्सालयों में लाखों की अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन पिछले तीन माह से बंद है। सेंटर के गेट पर ताला लटक रहा है।
--
प्रमुख अधीक्षक डॉ. आलोक कुमार वर्मा ने कहा कि शासन को कई बार पत्र लिखा गया था, मगर रेडियोलॉजिस्ट नहीं मिल सके। कहा कि चिकित्सक हर दिन करीब सौ मरीजों को अल्ट्रासाउंड की सलाह देते हैं। यहां निशुल्क व्यवस्था थी। उम्मीद थी कि स्थानांतरण के दौरान जिले को रेडियोलॉजिस्ट मिल जाएंगे, मगर ऐसा नहीं हुआ। मरीजों को निशुल्क अल्ट्रासाउंड के लिए मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। महिला चिकित्सालय के सीएमएस वीके पांडेय ने कहा कि अल्ट्रासाउंड बंद होने के कारण गर्भवती को दिक्कत होती है, मगर यहां तैनाती नहीं हो सकी है। कई पत्र लिखा जा चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बस्ती। जिला चिकित्सालय व महिला अस्पताल का अल्ट्रासाउंड तीन माह से बंद है।
यहां ओपेक चिकित्सालय कैली में तैनात रेडियोलॉजिस्ट अस्थायी तौर पर तीन-तीन दिन अल्ट्रासाउंड करती थीं, मगर तीन माह पहले उनका स्थानांतरण कर दिया गया। इसके बाद से ही दोनों अस्पताल के अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद हो गए। नतीजतन मरीज मजबूरन सात से आठ सौ रुपये खर्च कर निजी सेंटरों से जांच कराते हैं। अस्पताल के जिम्मेदारों को उम्मीद थी कि स्थानांतरण के दौरान एक रेडियोलॉजिस्ट मिल जाएंगे, मगर वह नहीं हुआ। नतीजतन अब इसके संचालन की रही सही उम्मीद भी समाप्त हो गई है।
उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल में हर दिन तकरीबन सौ अल्ट्रासाउंड के केस आते हैं। इसके अलावा यहीं विभिन्न मामलों के मेडिकल जांच भी होते हैं। दूसरी ओर महिला अस्पताल में गर्भवती के इलाज व जांच की निशुल्क व्यवस्था है, मगर अधिकांश गर्भवती को चिकित्सक अल्ट्रासाउंड की भी सलाह देते हैं। चिकित्सकों की मानें तो यह हर दिन करीब डेढ़ सौ अल्ट्रासाउंड होता था, मगर स्थानांतरण के बाद यह व्यवस्था निजी सेंटरों के हवाले हो गई, जहां सात से आठ सौ रुपये लिए जाते हैं। इन दोनों चिकित्सालयों में लाखों की अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन पिछले तीन माह से बंद है। सेंटर के गेट पर ताला लटक रहा है।
विज्ञापन
--
प्रमुख अधीक्षक डॉ. आलोक कुमार वर्मा ने कहा कि शासन को कई बार पत्र लिखा गया था, मगर रेडियोलॉजिस्ट नहीं मिल सके। कहा कि चिकित्सक हर दिन करीब सौ मरीजों को अल्ट्रासाउंड की सलाह देते हैं। यहां निशुल्क व्यवस्था थी। उम्मीद थी कि स्थानांतरण के दौरान जिले को रेडियोलॉजिस्ट मिल जाएंगे, मगर ऐसा नहीं हुआ। मरीजों को निशुल्क अल्ट्रासाउंड के लिए मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। महिला चिकित्सालय के सीएमएस वीके पांडेय ने कहा कि अल्ट्रासाउंड बंद होने के कारण गर्भवती को दिक्कत होती है, मगर यहां तैनाती नहीं हो सकी है। कई पत्र लिखा जा चुका है।
विज्ञापन