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पोषण पुनर्वास केंद्र में अजहान को मिली नई जिंदगी

Fri, 10 Sep 2021 11:27 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 10 Sep 2021 11:27 PM IST
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Ajhan gets new life at Nutrition Rehabilitation Center
पोषण पुनर्वास केंद्र में अजहान को मिली नई जिंदगी
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अति कुपोषित हालत में सिद्धार्थनगर से लाकर कराया गया था भर्ती
बस्ती। सिद्धार्थनगर जिले के रहने वाले फिरोज अहमद के 15 माह के बेटे अजहान को जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में नई जिंदगी मिली है। उसे अति कुपोषण की हालत में भर्ती कराया गया था। वह खून की कमी से जूझ रहा था। गंभीर हालत को देखते हुए उसे खून भी चढ़ाया गया। स्वास्थ्य में सुधार के बाद छुट्टी दे दी गई।
एनआरसी की डॉयटीशियन रेनू ने बताया कि 15 माह के अजहान को घर वाले 15 दिन पहले जिला अस्पताल में बालरोग विशेषज्ञ डॉ. सरफराज खान को दिखाने आए थे। उस समय उसका वजन छह किलो था। बच्चा बुखार, दस्त व डिहाईड्रेशन का शिकार था। चिकित्सक ने उसे एनआरसी में भर्ती कराने की सलाह दी। यहां पर भर्ती कर जब खून की जांच कराई गई तो उसके शरीर में छह ग्राम से भी कम खून था। चिकित्सक की सलाह पर 100 एमएल खून चढ़ाया गया। इसके बाद दवाएं शुरू की गई। एक सप्ताह बाद उसकी हालत में सुधार नजर आने लगा। दो सप्ताह में उसका वजन करीब 15 प्रतिशत बढ़ गया था। बच्चा खाने-पीने व खेलने लगा। बाल रोग विशषज्ञ डॉ. सरफराज खान ने बताया कि बच्चा उस समय अत्यंत कुपोषण की श्रेणी में था। अगर उसकी यही हालत कुछ और दिन बनी रहती तो खतरा हो सकता था। कुपोषण की हालत में अन्य बीमारियों से ग्रसित होने की आशंका भी बढ़ जाती है।
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51 अति कुपोषित बच्चों को किया जा चुका है भर्ती
एनआरसी में एक अप्रैल से अब तक 51 अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती किया जा चुका है। 45 बच्चे स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। अति कुपोषित बच्चों को यहां दो सप्ताह रखकर उनका इलाज करने की पूरी व्यवस्था है। बच्चे को पोषक आहार व तीमारदार को अस्पताल से ही खाना दिया जाता है। एसीएमओ डॉ. सीके वर्मा ने बताया कि आंगनबाड़ी की ओर से अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर एनआरसी में भर्ती कराया जाता है। बालरोग विशेषज्ञ भी अति कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए यहां भेजते हैं। एनआरसी में मानक की जांच के बाद बच्चे को भर्ती कर लिया जाता है। यहां से डिस्चार्ज होने के बाद बच्चे पर नजर रखी जाती है। एक बार कुपोषण की हालत से निकलने के बाद बच्चा स्वस्थ होने लगता है।
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