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Basti News: मार्च में तापमान बना रहा नया रिकार्ड, तीसरे सप्ताह में लू चलने के आसार

Sat, 04 Mar 2023 09:59 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 04 Mar 2023 09:59 AM IST
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agriculture sector
संवाद न्यूज एजेंसी
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बस्ती। फरवरी में 50 वर्ष का रिकार्ड तोड़ने के बाद तापमान मार्च में भी नया रिकार्ड बनाते दिख रहा है। अधिकतम तापमान 33 और न्यूनतम 16 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि यही हाल रहा तो मार्च के तीसरे सप्ताह से ही लू चलनी शुरू हो जाएगी। ऐसी हालत में देर से बोई गई गेहूं की फसल की आधी पैदावार घट जाएगी।
28 फरवरी को अधिकतम तापमान 31 और न्यूनतम 13 डिग्री सेल्सियस रहा। एक मार्च को इसमें एक डिग्री सेल्सियस का इजाफा हो गया। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 33 और न्यूनतम 16 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। पिछले वर्ष तीन मार्च को अधिकतम तापमान 29 और न्यूनतम 12 डिग्री सेल्सियस था। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डाॅक्टर अमरनाथ मिश्र ने बताया कि 15 मार्च के बाद गर्म हवाएं चलने की संभावना है। कृषि विज्ञानियों का कहना है कि लगातार बढ़ रहे तापमान का असर सबसे ज्यादा देर से बोई गई गेहूं की फसल पर पड़ेगा। अगेती फसलों में दाने बन चुके हैं। इसलिए उसमें ज्यादा नुकसान नहीं होगा। बशर्ते किसान खेत में नमी कम न होने दें, मगर 20 दिसंबर के बाद बोई गई गेहूं की फसल पर तापमान बढ़ने का काफी असर पड़ना तय है।
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फूलों, सब्जियों और आम की फसल पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। फूलों की खुशबू और चमक कम होने लगी है, और सब्जियों का आकार घट जाएगा। आम के बौर टिकोरे बनने से पहले ही झड़ने लगे हैं। नए फूल लगने बंद हो सकते हैं। इससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा विज्ञानी डॉ. प्रेमशंकर बताते हैं कि आम, नींबू, संतरे, मौसमी आदि में परागण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। ऐसा होने से पराग के कण सूख रहे हैं, और फूल मुरझाकर गिर रहे हैं। तापमान में इसी तरह बढ़ोतरी होती रही, तो फलों का आकार तो घटेगा ही, उनके रंग और स्वाद पर भी असर पड़ेगा।
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आम का मीठापन कम होगा और नीबू, संतरे के रस में कमी आएगी। टमाटर कद्दू, लौकी, खीरा, ककड़ी, तरोई, खरबूज और तरबूज सहित लता वाली सब्जियों का आकार घट जाएगा। प्याज की कंद भी छोटी होगी।

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किसान ऐसे करें बचाव
- हवा कम रहने पर सिंचाई करते रहें।
- खेत के किनारे शेड लगाएं।
- किनारों पर मक्के की फसल बोएं।
- सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक, आयरन, और बोरान का छिड़काव करें।
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बच्चों की सेहत पर मौसम का असर
महिला चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज शुक्ल ने कहा कि मार्च में गर्मी का प्रभाव बच्चों की सेहत पर है। इस मौसम में धूप तेज होने से बच्चों को डायरिया आदि अभी से हो रहा है। गर्मी की बीमारियां यूं तो मई जून में होती हैं, मगर इस बार जलवायु परिवर्तन के चलते मलेरिया व मच्छरजनित रोगों के बीमार बच्चे भी आ रहे हैं। यह मौसम वायरस के लिए भी अनुकूल होता है। ऐसे में बुखार व जुकाम के मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है।
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