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Basti News: बस्ती में बाइक, अयोध्या में लाश...हालात ने उठाए सवाल
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पोस्टमार्टम हाउस के बाहर जुटी भीड़। संवाद
- फोटो : udhampur news
बस्ती। परशुरामपुर थाने से ड्यूटी के दौरान दरोगा अजय गौंड़ की लाश चार दिन बाद रविवार की शाम अयोध्या में सरयू नदी से बरामद कर ली गई लेकिन अजय ने आत्महत्या की है या उनकी हत्या की गई है यह रहस्य बना हुआ है। सोमवार को पोस्टमार्टम हाउस पर अजय के भाई एडीएम अरुण ने साजिश के तहत हत्या का संदेह जाहिर किया और पुलिस पर इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए। दरोगा अजय के थाने से लापता होने के तीसरे दिन एसपी यशवीर सिंह ने जांच के लिए पांच टीमें गठित की थीं। शुरुआती छानबीन में पुलिस डिजिटल साक्ष्य के रूप में उनके मोबाइल की अंतिम लोकेशन एसपी आवास के पास अमहट घाट पर मानकर चल रही थी। दरोगा की बाइक भी यहीं से दूसरे दिन लावारिस हाल में बरामद की गई थी, इसलिए उनके कुआनो में डूबने का संदेह गहरा गया था।
शनिवार और रविवार दो दिन लगातार एसडीआरएफ की टीम के साथ पुलिस ने कुआनो में सर्च अभियान चलाया। रविवार को पूरे दिन अमहट घाट पर दरोगा के छोटे भाई एडीएम झांसी अरुण कुमार, उनकी पीसीएस पत्नी ज्योति, दरोगा की पत्नी रंजीता, छोटा बेटा उत्कर्ष मौजूद रहे। दिन में करीब चार बजे सर्च अभियान अचानक बंद कर दिया गया। इस दौरान दरोगा की पत्नी रंजीता और एडीएम भाई अरुण यह कहते सुने गए कि दरोगा यहां नहीं मिलने वाले हैं। पत्नी रंजीता तो लापता होने की पुष्टि होने के बाद से पति को कहीं और बंधक बनाए जाने की बात कह रहीं थीं।
परिजनों की बात कुछ घंटों बाद काफी हद तक सच साबित हुई। अयोध्या पुलिस से सूचना मिली कि दरोगा का शव सरयू नदी में उतराया मिला है। इसके बाद बस्ती पुलिस के डिजिटल एवं अन्य साक्ष्य से कहानी बिल्कुल उलट गई। अब मामले में नया मोड़ आ गया है। दरोगा का शव 60 किमी दूर अयोध्या में सरयू नदी में बरामद होने के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। बाइक बस्ती में एसपी आवास के पास दूसरे ही दिन मिल गई थी।
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शव और बाइक की दो जनपदों में बरामदगी ने बढ़ाया संदेह : शव और बाइक दोनों अलग-अलग जनपद में मिलने से स्थिति संदेहास्पद हो गई है। सोमवार को पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद दरोगा के एडीएम भाई और अन्य परिजनों ने उनकी हत्या किए जाने का संदेह जाहिर किया। डिजिटल साक्ष्य का तालमेल बिगड़ने से पुलिस के लिए भी संकट खड़ा हो गया है। पोस्टमार्टम हाउस पर भी बड़े अफसर नहीं दिखे। दरोगा के एडीएम भाई पुलिस अफसरों के इस रवैये पर नाराजगी जताते हुए धरने पर भी बैठे। पोस्टमार्टम हाउस पर घंटों गहमागहमी का माहौल बना रहा।
हैदराबाद, सिकंदरपुर के रास्ते सरयू पुल की ओर निकले थे दरोगा : शव बरामदगी के बाद पुलिस ने मामले की दोबारा जांच शुरू की है। लिखा-पढ़ी में तो प्रकरण के विवेचक परशुरामपुर थाने के उप निरीक्षक अरविंद कुमार है मगर मामले की जांच में थानाध्यक्ष परशुरामपुर विश्वमोहन राय, सीओ हर्रैया स्वर्णिमा सिंह के अलावा स्वाट टीम, एसओजी की टीम भी लगाई गई है। एएसपी श्यामकांत और एसपी यशवीर सिंह इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। अयोध्या में शव मिलते ही पुलिस की जांच की सुई घूम गई। सोमवार को पुलिस परशुरामपुर थाने से सरयू घाट तक के सीसीटीवी कैमरे खंगालने में जुटी रही। छानबीन में दरोगा को अपनी बाइक से हैदराबाद, सिकंदरपुर के रास्ते सरयू घाट से 200 मीटर पहले तक जाते देखा गया है। अब सवाल उठ रहा है कि जब दरोगा अपनी बाइक से खुद सरयू पुल के करीब तक देखे गए तो उनकी बाइक बस्ती कैसे पहुंची। पुलिस बस्ती से अयोध्या तक के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। बस्ती तक बाइक लाने वाले शख्स की तलाश की जा रही है। वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में माैत की वजह स्पष्ट नहीं होने के कारण विसरा सुरक्षित कर लिया गया है।
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शनिवार और रविवार दो दिन लगातार एसडीआरएफ की टीम के साथ पुलिस ने कुआनो में सर्च अभियान चलाया। रविवार को पूरे दिन अमहट घाट पर दरोगा के छोटे भाई एडीएम झांसी अरुण कुमार, उनकी पीसीएस पत्नी ज्योति, दरोगा की पत्नी रंजीता, छोटा बेटा उत्कर्ष मौजूद रहे। दिन में करीब चार बजे सर्च अभियान अचानक बंद कर दिया गया। इस दौरान दरोगा की पत्नी रंजीता और एडीएम भाई अरुण यह कहते सुने गए कि दरोगा यहां नहीं मिलने वाले हैं। पत्नी रंजीता तो लापता होने की पुष्टि होने के बाद से पति को कहीं और बंधक बनाए जाने की बात कह रहीं थीं।
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परिजनों की बात कुछ घंटों बाद काफी हद तक सच साबित हुई। अयोध्या पुलिस से सूचना मिली कि दरोगा का शव सरयू नदी में उतराया मिला है। इसके बाद बस्ती पुलिस के डिजिटल एवं अन्य साक्ष्य से कहानी बिल्कुल उलट गई। अब मामले में नया मोड़ आ गया है। दरोगा का शव 60 किमी दूर अयोध्या में सरयू नदी में बरामद होने के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। बाइक बस्ती में एसपी आवास के पास दूसरे ही दिन मिल गई थी।
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शव और बाइक की दो जनपदों में बरामदगी ने बढ़ाया संदेह : शव और बाइक दोनों अलग-अलग जनपद में मिलने से स्थिति संदेहास्पद हो गई है। सोमवार को पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद दरोगा के एडीएम भाई और अन्य परिजनों ने उनकी हत्या किए जाने का संदेह जाहिर किया। डिजिटल साक्ष्य का तालमेल बिगड़ने से पुलिस के लिए भी संकट खड़ा हो गया है। पोस्टमार्टम हाउस पर भी बड़े अफसर नहीं दिखे। दरोगा के एडीएम भाई पुलिस अफसरों के इस रवैये पर नाराजगी जताते हुए धरने पर भी बैठे। पोस्टमार्टम हाउस पर घंटों गहमागहमी का माहौल बना रहा।
हैदराबाद, सिकंदरपुर के रास्ते सरयू पुल की ओर निकले थे दरोगा : शव बरामदगी के बाद पुलिस ने मामले की दोबारा जांच शुरू की है। लिखा-पढ़ी में तो प्रकरण के विवेचक परशुरामपुर थाने के उप निरीक्षक अरविंद कुमार है मगर मामले की जांच में थानाध्यक्ष परशुरामपुर विश्वमोहन राय, सीओ हर्रैया स्वर्णिमा सिंह के अलावा स्वाट टीम, एसओजी की टीम भी लगाई गई है। एएसपी श्यामकांत और एसपी यशवीर सिंह इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। अयोध्या में शव मिलते ही पुलिस की जांच की सुई घूम गई। सोमवार को पुलिस परशुरामपुर थाने से सरयू घाट तक के सीसीटीवी कैमरे खंगालने में जुटी रही। छानबीन में दरोगा को अपनी बाइक से हैदराबाद, सिकंदरपुर के रास्ते सरयू घाट से 200 मीटर पहले तक जाते देखा गया है। अब सवाल उठ रहा है कि जब दरोगा अपनी बाइक से खुद सरयू पुल के करीब तक देखे गए तो उनकी बाइक बस्ती कैसे पहुंची। पुलिस बस्ती से अयोध्या तक के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। बस्ती तक बाइक लाने वाले शख्स की तलाश की जा रही है। वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में माैत की वजह स्पष्ट नहीं होने के कारण विसरा सुरक्षित कर लिया गया है।