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Basti News: रामरेखा तट पर लगा भव्य मेला...बारिश से खलल
Fri, 11 Apr 2025 12:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 11 Apr 2025 12:22 AM IST
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छावनी। चौरासी कोसी परिक्रमा के दूसरे पड़ाव स्थल रामरेखा के रामजानकी मंदिर परिसर पर बृहस्पतिवार को भव्य मेला लगा। हालांकि, मौसम खराब होने से मेले की रौनक चार बजे के बाद बढ़ी।
देर शाम तक क्षेत्र के लोग मेले में खरीदारी करते रहे। बच्चों ने झूले, सर्कस, रेलगाड़ी की सवारी आदि का आनंद उठाया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर से जुड़े क्षेत्रीय कार्यकर्ता, छावनी थाने की पुलिस और ट्रैफिक पुलिस मुस्तैद रही।
ऐसी मान्यता है कि त्रेतायुग में जनकपुर से अयोध्या लौटते समय भगवान श्रीराम माता सीता और लक्षण ने इस स्थान पर विश्राम किया था। विश्राम काल में माता सीता को प्यास लगी थी जब दूर - दूर तक जल नहीं मिला तो भगवान राम ने अपने बाण से रेखा खींच कर धरती से जल निकाल कर माता सीता का प्यास बुझाया था।
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इस स्थान पर तभी नदी बहने लगी जिसे रामरेखा नदी के नाम जाना जाता है। रामरेखा नदी के तट पर बने रामजानकी मंदिर पर हर वर्ष चैत्र मास के तेरस के दिन मेला लगता है। मेले के दिन सुबह क्षेत्र के लोग रामरेखा नदी में स्नान करके मंदिर अन्नदान करते हैं उसके बाद पूरा दिन घूम-घूम कर मेले का आनंद उठाते हैं।
मेले में जनपद के अलावा अंबेडकरनगर, अयोध्या, संतकबीरनगर, पटना आदि के लोग भी अपनी दुकानें लगाई है। मेले में महिलाओं और बच्चों की संख्या ज्यादा रही।
सौंदर्य प्रसाधन, खिलौनों, मिट्टी के वर्तन, घरेलू सामान, जलेबी, खोमचे, कुल्फी आदि की दुकानों पर लोगों की भीड़ रही। बच्चों ने झूले का भी आनंद उठाया। बभनगांवा, जद्दूपुर, अमोढ़ा, खानकला, पूरेहेमराज आदि गांवों के लोग मंदिर के पुजारी बाबा दयाशंकर दास के साथ श्रद्धालुओं की देखरेख में लगे थे।
रामजानकी मार्ग पर यातायात व्यवस्था सही ढंग से चलती रहे तथा मेले पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी नहीं हो इसके लिए ट्राफिक पुलिस की ड्यूटी लगाई लगाई गई थी।
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देर शाम तक क्षेत्र के लोग मेले में खरीदारी करते रहे। बच्चों ने झूले, सर्कस, रेलगाड़ी की सवारी आदि का आनंद उठाया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर से जुड़े क्षेत्रीय कार्यकर्ता, छावनी थाने की पुलिस और ट्रैफिक पुलिस मुस्तैद रही।
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ऐसी मान्यता है कि त्रेतायुग में जनकपुर से अयोध्या लौटते समय भगवान श्रीराम माता सीता और लक्षण ने इस स्थान पर विश्राम किया था। विश्राम काल में माता सीता को प्यास लगी थी जब दूर - दूर तक जल नहीं मिला तो भगवान राम ने अपने बाण से रेखा खींच कर धरती से जल निकाल कर माता सीता का प्यास बुझाया था।
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इस स्थान पर तभी नदी बहने लगी जिसे रामरेखा नदी के नाम जाना जाता है। रामरेखा नदी के तट पर बने रामजानकी मंदिर पर हर वर्ष चैत्र मास के तेरस के दिन मेला लगता है। मेले के दिन सुबह क्षेत्र के लोग रामरेखा नदी में स्नान करके मंदिर अन्नदान करते हैं उसके बाद पूरा दिन घूम-घूम कर मेले का आनंद उठाते हैं।
मेले में जनपद के अलावा अंबेडकरनगर, अयोध्या, संतकबीरनगर, पटना आदि के लोग भी अपनी दुकानें लगाई है। मेले में महिलाओं और बच्चों की संख्या ज्यादा रही।
सौंदर्य प्रसाधन, खिलौनों, मिट्टी के वर्तन, घरेलू सामान, जलेबी, खोमचे, कुल्फी आदि की दुकानों पर लोगों की भीड़ रही। बच्चों ने झूले का भी आनंद उठाया। बभनगांवा, जद्दूपुर, अमोढ़ा, खानकला, पूरेहेमराज आदि गांवों के लोग मंदिर के पुजारी बाबा दयाशंकर दास के साथ श्रद्धालुओं की देखरेख में लगे थे।
रामजानकी मार्ग पर यातायात व्यवस्था सही ढंग से चलती रहे तथा मेले पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी नहीं हो इसके लिए ट्राफिक पुलिस की ड्यूटी लगाई लगाई गई थी।