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साहित्यकार परमानंद को दी गई श्रद्धांजलि
Basti
Updated Wed, 06 Nov 2013 05:39 AM IST
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बस्ती। साहित्यकार डॉ. परमानंद श्रीवास्तव के निधन पर प्रेमचंद्र साहित्य एवं जन कल्याण संस्थान की ओर से सत्येंद्र साहित्य भवन बभनगांवा में शोक सभा का आयोजन हुआ। डॉ. राम कृष्णलाल जगमग ने कहा कि डॉ. परमानंद श्रीवास्तव के निधन से साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। जगमग ने कहा कि डॉ. परमानंद विलक्षण प्रतिमा के धनी रहे। उनके निधन से हिंदी साहित्य के एक युग का अवसान हो गया।
साहित्यकार सत्येद्रनाथ मतवाला ने कहा कि डॉ. परमानंद ने ही उन्हें साहित्यकार बनने के लिए प्रेरित किया। डॉ. रामचंद्र लाल श्रीवास्तव ने कहा कि परमानंद के सानिध्य में रहकर बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। अफजल हुसैन अफजल ने कहा कि परमानंद के निधन से साहित्य जगत की हुई क्षति की भरपाई कठिन होगी। डॉ. वीके वर्मा ने कहा कि परमानंदजी की रचनाएं हृदय स्पर्शी हैं। डॉ. राम दुलारे पाठक ने कहा कि डॉ. परमानंद नैसर्गिक रचनाकार के साथ-साथ एक संवेदनशील मानव थे। रहमान अली रहमान ने कहा कि उन्होंने मेरी पुस्तकों में आशीर्वचन लिखकर मुझे कृतार्थ कर दिया। लालमणि प्रसाद ने कहा कि हिंदी साहित्य का मारीचिमाली हमेशा के लिए अस्ताचल में विलीन हो गया। उसकी भरपाई संभव नहीं है।
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साहित्यकार सत्येद्रनाथ मतवाला ने कहा कि डॉ. परमानंद ने ही उन्हें साहित्यकार बनने के लिए प्रेरित किया। डॉ. रामचंद्र लाल श्रीवास्तव ने कहा कि परमानंद के सानिध्य में रहकर बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। अफजल हुसैन अफजल ने कहा कि परमानंद के निधन से साहित्य जगत की हुई क्षति की भरपाई कठिन होगी। डॉ. वीके वर्मा ने कहा कि परमानंदजी की रचनाएं हृदय स्पर्शी हैं। डॉ. राम दुलारे पाठक ने कहा कि डॉ. परमानंद नैसर्गिक रचनाकार के साथ-साथ एक संवेदनशील मानव थे। रहमान अली रहमान ने कहा कि उन्होंने मेरी पुस्तकों में आशीर्वचन लिखकर मुझे कृतार्थ कर दिया। लालमणि प्रसाद ने कहा कि हिंदी साहित्य का मारीचिमाली हमेशा के लिए अस्ताचल में विलीन हो गया। उसकी भरपाई संभव नहीं है।
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