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डिप्टी आरएमओ का निलंबन सवालों के घेरे में
Basti
Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
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बस्ती। परशुरामपुर गोदाम में 50 लाख के अनाज की चोरी में संतकबीरनगर के जिला खाद्य विपणन अधिकारी के निलंबन को लेकर खाद्य विभाग की कार्य प्रणालीपर सवालिया निशान लग रहा है। बताया जाता है कि जिस समय परशुरामपुर गोदाम में घोटाला हुआ उस समय प्रभाशंकर द्विवेदी संतकबीरनगर में तैनात थे। इसकी पुष्टि खुद डीएम संतकबीरनगर भी कर रहे हैं और डीएसओ की जांच रिपोर्ट में भी उल्लेख है कि जिस समय के अनाज और चीनी गायब पाए गए। उस समय जिला खाद्य विपणन अधिकारी दूसरे हैं। डीएम बस्ती ने जो रिपोर्ट शासन को भेजी थी, उसमें भी इनका जिक्र नहीं किया था। यहां तक कि आरएफसी की रिपोर्ट में भी अनाज घोटाले के दौरान डिप्टी आरएमओ की चर्चा नहीं है। निलंबित डिप्टी आरएमओ प्रभाकांत द्विवेदी ने कार्रवाई को गलत बताया है।
बता दें कि डीएसओ पूरन सिंह ने 25 अक्टूबर 2012 को परशुरामपुर गोदाम के स्टाक की जांच की। बकौल डीएसओ, नवंबर के लिए पीडीएस के तहत आवंटित 5267.41 कुंटल गेहूं, 3126 कुंटल चावल और 1179 कुंटल चीनी के स्टाक का सत्यापन किया, जिसमें 2500 कुंटल गेहूं, 1800 कुंटल चावल और 487 कुंटल चीनी कम मिली। नियमत: 22 अक्टूबर तक आवंटन के सापेक्ष शत-प्रतिशत अनाज पहुंच जाना चाहिए। अब सवाल उठ रहा है जब अनाज की निकासी कोटेदारों को नहीं दी गई तो अनाज गायब हुआ कैसे? सूत्र बताते हैं कि अनाज गोदाम तक पहुंचा ही नहीं, रास्ते में ही अनाज माफियाओं ने गायब कर दिया। अभिलेखों के मुताबिक, निलंबित जिला खाद्य विपणन अधिकारी के पास बस्ती का अतिरिक्त प्रभार तीन अक्टूबर 2012 तक रहा। उसके बाद गोरखपुर से आए विपिन राय को बस्ती का प्रभारी जिला खाद्य विपणन अधिकारी बनाया गया। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि निलंबन की कार्रवाई उस अधिकारी के खिलाफ क्यों और कैसे की गई, जिसके कार्यकाल में घोटाला ही नहीं हुआ।
पहले भी हो चुकी है विभाग की किरकिरी
अनाज घोटालों में कार्रवाई के मामले में विभाग के दोहरा मापदंड अपनाने को लेकर पहले भी किरकिरी हो चुकी है। सिद्धार्थनगर में उसका/खेसरहा केंद्र पर वर्ष 2012-13 में 1.32 करोड़ रुपये का 11000 कुंटल गेहूं का गबन हुआ। डुमरियागंज गोदाम में 40 लाख रुपये का 4000 कुंटल अनाज गायब हुआ। फिर शोहरतगढ़ केंद्र पर 51 लाख का बैंक ड्राफ्ट, 41 लाख का फर्जी गेहूं भुगतान और 40 लाख रुपये का अनाज गायब होना मिला। यह सभी घोटाला जिस प्रभारी जिला खाद्य विपणन अधिकारी के कार्यकाल में हुआ उसके विरुद्ध सिर्फ विभागीय जांच की ही कार्रवाई की गई। वहीं जिस जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने घोटाला उजागर किया, उसके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई।
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बता दें कि डीएसओ पूरन सिंह ने 25 अक्टूबर 2012 को परशुरामपुर गोदाम के स्टाक की जांच की। बकौल डीएसओ, नवंबर के लिए पीडीएस के तहत आवंटित 5267.41 कुंटल गेहूं, 3126 कुंटल चावल और 1179 कुंटल चीनी के स्टाक का सत्यापन किया, जिसमें 2500 कुंटल गेहूं, 1800 कुंटल चावल और 487 कुंटल चीनी कम मिली। नियमत: 22 अक्टूबर तक आवंटन के सापेक्ष शत-प्रतिशत अनाज पहुंच जाना चाहिए। अब सवाल उठ रहा है जब अनाज की निकासी कोटेदारों को नहीं दी गई तो अनाज गायब हुआ कैसे? सूत्र बताते हैं कि अनाज गोदाम तक पहुंचा ही नहीं, रास्ते में ही अनाज माफियाओं ने गायब कर दिया। अभिलेखों के मुताबिक, निलंबित जिला खाद्य विपणन अधिकारी के पास बस्ती का अतिरिक्त प्रभार तीन अक्टूबर 2012 तक रहा। उसके बाद गोरखपुर से आए विपिन राय को बस्ती का प्रभारी जिला खाद्य विपणन अधिकारी बनाया गया। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि निलंबन की कार्रवाई उस अधिकारी के खिलाफ क्यों और कैसे की गई, जिसके कार्यकाल में घोटाला ही नहीं हुआ।
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पहले भी हो चुकी है विभाग की किरकिरी
अनाज घोटालों में कार्रवाई के मामले में विभाग के दोहरा मापदंड अपनाने को लेकर पहले भी किरकिरी हो चुकी है। सिद्धार्थनगर में उसका/खेसरहा केंद्र पर वर्ष 2012-13 में 1.32 करोड़ रुपये का 11000 कुंटल गेहूं का गबन हुआ। डुमरियागंज गोदाम में 40 लाख रुपये का 4000 कुंटल अनाज गायब हुआ। फिर शोहरतगढ़ केंद्र पर 51 लाख का बैंक ड्राफ्ट, 41 लाख का फर्जी गेहूं भुगतान और 40 लाख रुपये का अनाज गायब होना मिला। यह सभी घोटाला जिस प्रभारी जिला खाद्य विपणन अधिकारी के कार्यकाल में हुआ उसके विरुद्ध सिर्फ विभागीय जांच की ही कार्रवाई की गई। वहीं जिस जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने घोटाला उजागर किया, उसके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई।
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