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कंकरीले रास्ते से नंगे पांव पहुंचे श्रद्धालु
basti
Updated Mon, 02 Apr 2018 11:42 PM IST
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भंडारे में भोजन करते साधु-संत।
- फोटो : amar ujala
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दुबौलिया।
जनश्रद्धा का अद्भुत नजारा सोमवार को देखने को मिला। कंकरीले रास्ते, तेज धूप और नंगे पांव 84 कोसी परिक्रमा के श्रद्धालु हनुमान बाग चकोही पड़ाव पर पहुंचे। जिले में परिक्रमा का यह अंतिम पड़ाव था। जहां रात्रि विश्राम के बाद मंगलवार की भोर में शेरवा घाट से नदी उस पार स्थिति शृंगी ऋषि के आश्रम के लिए रवाना होंगे।
जिले के अंतिम पड़ाव स्थल हनुमान बाग चकोही में सोमवार की भोर से ही परिक्रमा में शामिल श्रद्धालुओं का जत्था पहुंचना शुरू हुआ। जय श्रीराम और जय अयोध्या धाम के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा। पड़ाव स्थल रामरेखा से सुबह से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हुआ जो 10 बजे तक चलता रहा। अगुवाई कर रहे संत गया दास ने बताया कि विश्राम के बाद मंगलवार सुबह शेरवा घाट से नदी उस पार स्थिति शृंगी ऋषि के आश्रम में यात्री पहुंचेंगे। संत ने बताया कि 84 कोसी परिक्रमा का महत्व पुराणों में वर्णित है। अयोध्या धाम में संतों और स्थानीय जनमानस की ओर से तीन परिक्रमाएं की जाती हैं। इसमें 14 कोसी, पंच कोसी के साथ 84 कोसी परिक्रमा विशेष मानी जाती है। 14 कोसी और पंचकोसी परिक्रमा अयोध्या धाम में होती है। जबकि 84 कोसी फैजाबाद, बस्ती और फिर फैजाबाद तथा बाराबंकी के दरियाबाद बेलखरा होते हुए गोंडा में प्रवेश कर नवाबगंज होते हुए पुन: अयोध्या धाम प्रवेश करते हैं। बस्ती में यह यात्रा करीब 50 किलोमीटर की होती है। मान्यता है इस परिक्रमा से 84 लाख योनियों में जन्म लेने से मानव को मुक्ति मिल जाती है। परिक्रमा में झारखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान, नागालैंड, और पड़ोसी देश नेपाल के भी श्रद्धालु शामिल रहे। परिक्रमा में शामिल करीब दो दर्जन श्रद्धालु किन्हीं कारणों से पड़ाव स्थल पर नहीं रुके। वह नदी पार कर शृंगी ऋषि आश्रम के लिए रवाना हो गए।
चिकित्सा शिविर और जगह-जगह भंडारे
हनुमान बाग चकोही में पहुंचे श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य की जांच डॉ. डीके चौधरी, प्रवीण सिंह, राजवंत सिंह ने की। जरूरतमंदों में निशुल्क दवाएं वितरित की गईं। साधु-संतों की सेवा के लिए स्थानीय लोग भी श्रद्धा भाव से जुटे रहे। साथ ही भंडारे का आयोजन कई जगहों पर हुआ। समौड़ा में चंद्रभान शुक्ला, रिंकू शुक्ला, शांति देवी, हरिजी व पीयूष तो पड़ाव स्थल पर रामकुमार पाण्डेय, वेदनाथ सिंह, प्रभावती देवी ने भी भंडारे का आयोजन किया।
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पुलिस के साथ क्षेत्रीय जनता ने की सेवा
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष पंकज गुप्ता, एसआई एसके श्रीवास्तव श्रद्धालुओं की सुरक्षा के अपनी टीम के साथ मुस्तैद रहे। राजमंगल पाठक, राज्य महिला आयोग की सदस्य इंद्रवास सिंह, गणेश पाठक, चतुर्गुन राजभर, भगवान बक्स सिंह, सुरेंद्र सिंह, रामजीत यादव, श्रीनेवास पाठक, प्रेम सागर पाठक, दिनेश पांडेय, शिव प्रसाद सिंह, मुन्नू पांडेय, राजेश सिंह, शैलेंद्र सिंह, समीर चौहान, शोभा मणि त्रिपाठी, श्रीराम सिंह, अमरजीत सिंह आदि जुटे रहे।
मेले में भीड़ देखकर गदगद हुए व्यापारी
लालगंज।
महर्षि उद्दालक मुनि की तपोभूमि पर चल रहे पांच दिवसीय मेले के दूसरे दिन सोमवार को जमकर भीड़ उमड़ी। खरीदारी से व्यापारियों में उत्साह बढ़ा रहा। सर्वाधिक बिक्री गट्टा, लैय्या, खजला और केले की रही।
ऐतिहासिक मेले में व्यापारी से लेकर आमजन तक दूर- दराज क्षेत्रों से पहुंचते हैं। मनवर और कुआनो के संगम तट पर चल रहे मेले में घरेलू सामान की सर्वाधिक बिक्री होती है। संगम तट पर नौका विहार और ऊंचे-ऊंचे झूलों के अलावा, जादू, मौत का कुआं, कठपुतली समेत तमाम अन्य मनोरंजन के साधन हैं। बच्चों और महिलाओं की सर्वाधिक भागीदारी होती है। लाला वर्मा ने बताया कि सफाई व्यवस्था नहीं होने से काफी परेशानी हो रही है। सियाराम वर्मा ने कहा कि गेहूं की कटाई विलंब होने के कारण भीड़ और खरीदारी बढ़ी है। मेला स्थल को पर्यटक स्थल बनाने की मांग की।
मौत का कुआं और काला जादू का आकर्षण
सोमवार को मेले का दूसरा दिन था। युवाओं और बच्चों की भीड़ मौत का कुआं और काला जादू के स्थल पर ज्यादा दिखी। देखने के लिए लोग कतारों में नजर आए। झूले के लिए भी भीड़ इंतजार करती रही। महिलाओं ने शृंगार प्रसाधन और घरेलू सामान की खरीदारी की। देसी पीले केले के विक्रेता भुल्लर ने बताया इस बार बिक्री बढ़ी हुई है। खजला के दुकानदार रामजी का कहना था कि हर साल से इस बार बिक्री अच्छी है। फ़ैजाबाद के लकड़ी व्यवसायी सीताराम, वीरेंद्र कुमार आदि दुकानदारों का कहना था कि अवैध वसूली पर लगाम से अब मेले के प्रति रुझान बढ़ रहा है।
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जनश्रद्धा का अद्भुत नजारा सोमवार को देखने को मिला। कंकरीले रास्ते, तेज धूप और नंगे पांव 84 कोसी परिक्रमा के श्रद्धालु हनुमान बाग चकोही पड़ाव पर पहुंचे। जिले में परिक्रमा का यह अंतिम पड़ाव था। जहां रात्रि विश्राम के बाद मंगलवार की भोर में शेरवा घाट से नदी उस पार स्थिति शृंगी ऋषि के आश्रम के लिए रवाना होंगे।
जिले के अंतिम पड़ाव स्थल हनुमान बाग चकोही में सोमवार की भोर से ही परिक्रमा में शामिल श्रद्धालुओं का जत्था पहुंचना शुरू हुआ। जय श्रीराम और जय अयोध्या धाम के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा। पड़ाव स्थल रामरेखा से सुबह से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हुआ जो 10 बजे तक चलता रहा। अगुवाई कर रहे संत गया दास ने बताया कि विश्राम के बाद मंगलवार सुबह शेरवा घाट से नदी उस पार स्थिति शृंगी ऋषि के आश्रम में यात्री पहुंचेंगे। संत ने बताया कि 84 कोसी परिक्रमा का महत्व पुराणों में वर्णित है। अयोध्या धाम में संतों और स्थानीय जनमानस की ओर से तीन परिक्रमाएं की जाती हैं। इसमें 14 कोसी, पंच कोसी के साथ 84 कोसी परिक्रमा विशेष मानी जाती है। 14 कोसी और पंचकोसी परिक्रमा अयोध्या धाम में होती है। जबकि 84 कोसी फैजाबाद, बस्ती और फिर फैजाबाद तथा बाराबंकी के दरियाबाद बेलखरा होते हुए गोंडा में प्रवेश कर नवाबगंज होते हुए पुन: अयोध्या धाम प्रवेश करते हैं। बस्ती में यह यात्रा करीब 50 किलोमीटर की होती है। मान्यता है इस परिक्रमा से 84 लाख योनियों में जन्म लेने से मानव को मुक्ति मिल जाती है। परिक्रमा में झारखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान, नागालैंड, और पड़ोसी देश नेपाल के भी श्रद्धालु शामिल रहे। परिक्रमा में शामिल करीब दो दर्जन श्रद्धालु किन्हीं कारणों से पड़ाव स्थल पर नहीं रुके। वह नदी पार कर शृंगी ऋषि आश्रम के लिए रवाना हो गए।
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चिकित्सा शिविर और जगह-जगह भंडारे
हनुमान बाग चकोही में पहुंचे श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य की जांच डॉ. डीके चौधरी, प्रवीण सिंह, राजवंत सिंह ने की। जरूरतमंदों में निशुल्क दवाएं वितरित की गईं। साधु-संतों की सेवा के लिए स्थानीय लोग भी श्रद्धा भाव से जुटे रहे। साथ ही भंडारे का आयोजन कई जगहों पर हुआ। समौड़ा में चंद्रभान शुक्ला, रिंकू शुक्ला, शांति देवी, हरिजी व पीयूष तो पड़ाव स्थल पर रामकुमार पाण्डेय, वेदनाथ सिंह, प्रभावती देवी ने भी भंडारे का आयोजन किया।
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पुलिस के साथ क्षेत्रीय जनता ने की सेवा
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष पंकज गुप्ता, एसआई एसके श्रीवास्तव श्रद्धालुओं की सुरक्षा के अपनी टीम के साथ मुस्तैद रहे। राजमंगल पाठक, राज्य महिला आयोग की सदस्य इंद्रवास सिंह, गणेश पाठक, चतुर्गुन राजभर, भगवान बक्स सिंह, सुरेंद्र सिंह, रामजीत यादव, श्रीनेवास पाठक, प्रेम सागर पाठक, दिनेश पांडेय, शिव प्रसाद सिंह, मुन्नू पांडेय, राजेश सिंह, शैलेंद्र सिंह, समीर चौहान, शोभा मणि त्रिपाठी, श्रीराम सिंह, अमरजीत सिंह आदि जुटे रहे।
मेले में भीड़ देखकर गदगद हुए व्यापारी
लालगंज।
महर्षि उद्दालक मुनि की तपोभूमि पर चल रहे पांच दिवसीय मेले के दूसरे दिन सोमवार को जमकर भीड़ उमड़ी। खरीदारी से व्यापारियों में उत्साह बढ़ा रहा। सर्वाधिक बिक्री गट्टा, लैय्या, खजला और केले की रही।
ऐतिहासिक मेले में व्यापारी से लेकर आमजन तक दूर- दराज क्षेत्रों से पहुंचते हैं। मनवर और कुआनो के संगम तट पर चल रहे मेले में घरेलू सामान की सर्वाधिक बिक्री होती है। संगम तट पर नौका विहार और ऊंचे-ऊंचे झूलों के अलावा, जादू, मौत का कुआं, कठपुतली समेत तमाम अन्य मनोरंजन के साधन हैं। बच्चों और महिलाओं की सर्वाधिक भागीदारी होती है। लाला वर्मा ने बताया कि सफाई व्यवस्था नहीं होने से काफी परेशानी हो रही है। सियाराम वर्मा ने कहा कि गेहूं की कटाई विलंब होने के कारण भीड़ और खरीदारी बढ़ी है। मेला स्थल को पर्यटक स्थल बनाने की मांग की।
मौत का कुआं और काला जादू का आकर्षण
सोमवार को मेले का दूसरा दिन था। युवाओं और बच्चों की भीड़ मौत का कुआं और काला जादू के स्थल पर ज्यादा दिखी। देखने के लिए लोग कतारों में नजर आए। झूले के लिए भी भीड़ इंतजार करती रही। महिलाओं ने शृंगार प्रसाधन और घरेलू सामान की खरीदारी की। देसी पीले केले के विक्रेता भुल्लर ने बताया इस बार बिक्री बढ़ी हुई है। खजला के दुकानदार रामजी का कहना था कि हर साल से इस बार बिक्री अच्छी है। फ़ैजाबाद के लकड़ी व्यवसायी सीताराम, वीरेंद्र कुमार आदि दुकानदारों का कहना था कि अवैध वसूली पर लगाम से अब मेले के प्रति रुझान बढ़ रहा है।