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जांच टीम ने पकड़ा 41लाख का घोटाला
Updated Fri, 06 Oct 2017 11:19 PM IST
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बभनान। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वर्ष 2015-16 में उद्यान विभाग की ओर से (माइकोइरीगेशन) विधि से सिंचाई करने के लिए गौर ब्लॉक के तरैनी मंसूर नगर का चयन किया गया था। किसानों से बैंक खाते व खतौनी भी लिए गए। लेकिन गांव वालों को योजना का लाभ नहीं मिला।
डीएम की ओर से गठित जांच टीम शुक्रवार को तरैनी मंसूर नगर में जांच करने पहुंची। ग्राम सभा में फुहारा विधि से सिंचाई के नाम पर 131 किसानों को लाभ मिलना था। मगर जिम्मेदारों ने बड़े पैमाने पर गोलमाल कर दिया। डीएम ने योजना के तहत पूरे जिले में चयनित ग्राम सभाओं की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। जिसमें जांच अधिकारी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट चंद्र मोहन गर्ग व अर्थ सांख्यिकी अधिकारी रमाशंकर पांडे एवं नायब तहसीलदार गौर विजय कुमार सिंह हैं। शुक्रवार को जांच टीम ने चयनित किसानों से पूछताछ की तो किसान हैरान रह गए। उन्हें फुहारा विधि से सिंचाई की योजना के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी। जबकि चयन के समय अधिकारियों व कर्मचारियों ने किसानों से बैंक खाते व खतौनी भी लिए और कहा कि आपके खाते में योजना के तहत रकम भेजी जाएगी। लेकिन दो वर्ष के बाद भी न तो खाते में धन आया और न ही योजना के बारे में चयनित किसानों को बताया गया।
जांच टीम में शामिल नायब तहसीलदार विजय कुमार सिंह ने बताया कि फर्जी बैंक खाते के जरिए लोगों ने रकम की बंदरबांट की है। योजना में पात्रता के अनुसार किसानों का चयन होना था। जिसमें कई तरह की योजनाओं का लाभ मिलना था। लेकिन यहां के किसानों को कोई लाभ नहीं मिला और मोटी रकम भी निकल गई है। कहा कि इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा। उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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डीएम की ओर से गठित जांच टीम शुक्रवार को तरैनी मंसूर नगर में जांच करने पहुंची। ग्राम सभा में फुहारा विधि से सिंचाई के नाम पर 131 किसानों को लाभ मिलना था। मगर जिम्मेदारों ने बड़े पैमाने पर गोलमाल कर दिया। डीएम ने योजना के तहत पूरे जिले में चयनित ग्राम सभाओं की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। जिसमें जांच अधिकारी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट चंद्र मोहन गर्ग व अर्थ सांख्यिकी अधिकारी रमाशंकर पांडे एवं नायब तहसीलदार गौर विजय कुमार सिंह हैं। शुक्रवार को जांच टीम ने चयनित किसानों से पूछताछ की तो किसान हैरान रह गए। उन्हें फुहारा विधि से सिंचाई की योजना के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी। जबकि चयन के समय अधिकारियों व कर्मचारियों ने किसानों से बैंक खाते व खतौनी भी लिए और कहा कि आपके खाते में योजना के तहत रकम भेजी जाएगी। लेकिन दो वर्ष के बाद भी न तो खाते में धन आया और न ही योजना के बारे में चयनित किसानों को बताया गया।
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जांच टीम में शामिल नायब तहसीलदार विजय कुमार सिंह ने बताया कि फर्जी बैंक खाते के जरिए लोगों ने रकम की बंदरबांट की है। योजना में पात्रता के अनुसार किसानों का चयन होना था। जिसमें कई तरह की योजनाओं का लाभ मिलना था। लेकिन यहां के किसानों को कोई लाभ नहीं मिला और मोटी रकम भी निकल गई है। कहा कि इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा। उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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