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60 मिमी हुई बारिश, अभी और बरसात होने के आसार
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कप्तानगंज सीएचसी परिसर में भरा बारिश का पानी
- फोटो : BASTI
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60 मिमी हुई बारिश, अभी और बरसात होने के आसार
बस्ती। जिले में रविवार सुबह नौ बजे के बाद झमाझम बारिश हुई। पानी सड़कों के ऊपर से बहने लगा। कई जगह किसानों की धान की फसलें डूब गई हैं। एएनडी कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारंगज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ मिश्रा ने बताया कि तकरीबन 60 मिमी बारिश हुई है। मानसून सक्रिय होने से आगे भी बारिश के आसार हैं।
रातभर दक्षिण-पुरवा हवा चलती रही। रातभर बादल बने रहने से न्यूनतम पारा तेजी से गिरा और सुबह नौ बजते ही बूंदाबांदी शुरू हो गई। देखते ही देखते मूसलाधार बारिश होने लगी। दोपहर करीब एक बजे बारिश की बूंद टूटी। तब जाकर सड़क पर थोड़ी चहल-पहल बढ़ी।
बारिश का पानी सड़कों पर भर जाने से चलना मुश्किल हो गया है। शहर से लेकर गांव तक मार्गों पर कीचड़ और जलभराव ही दिख रहा है। शहर के बभनगांवा, दक्षिण दरवाजा, पुरानी बस्ती पचपेड़िया आदि जगहों पर पानी भर गया। निचले हिस्सों के खेतों में रोपी गई धान की फसल पानी में डूब गई है।
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संयुक्त कृषि निदेशक डॉ. संजय कुमार त्रिपाठी बताते हैं कि धान की पौध डूबने से उसमें सड़न पैदा होगी। किसानों को चाहिए की किसी तरह से पानी निकाल दें। अन्यथा पौध खराब हो जाएगी।
कप्तानगंज प्रतिनिधि के अनुसार सीएचसी परिसर में भारी मात्रा में बारिश का पानी भर गया। बारिश खत्म होने के बाद पानी धीरे-धीरे बाहर निकला। गया। गोटवा प्रतिनिधि के अनुसार फ्लाई ओवर के नीचे बारिश का पानी भरने से लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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बस्ती। जिले में रविवार सुबह नौ बजे के बाद झमाझम बारिश हुई। पानी सड़कों के ऊपर से बहने लगा। कई जगह किसानों की धान की फसलें डूब गई हैं। एएनडी कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारंगज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ मिश्रा ने बताया कि तकरीबन 60 मिमी बारिश हुई है। मानसून सक्रिय होने से आगे भी बारिश के आसार हैं।
रातभर दक्षिण-पुरवा हवा चलती रही। रातभर बादल बने रहने से न्यूनतम पारा तेजी से गिरा और सुबह नौ बजते ही बूंदाबांदी शुरू हो गई। देखते ही देखते मूसलाधार बारिश होने लगी। दोपहर करीब एक बजे बारिश की बूंद टूटी। तब जाकर सड़क पर थोड़ी चहल-पहल बढ़ी।
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बारिश का पानी सड़कों पर भर जाने से चलना मुश्किल हो गया है। शहर से लेकर गांव तक मार्गों पर कीचड़ और जलभराव ही दिख रहा है। शहर के बभनगांवा, दक्षिण दरवाजा, पुरानी बस्ती पचपेड़िया आदि जगहों पर पानी भर गया। निचले हिस्सों के खेतों में रोपी गई धान की फसल पानी में डूब गई है।
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संयुक्त कृषि निदेशक डॉ. संजय कुमार त्रिपाठी बताते हैं कि धान की पौध डूबने से उसमें सड़न पैदा होगी। किसानों को चाहिए की किसी तरह से पानी निकाल दें। अन्यथा पौध खराब हो जाएगी।
कप्तानगंज प्रतिनिधि के अनुसार सीएचसी परिसर में भारी मात्रा में बारिश का पानी भर गया। बारिश खत्म होने के बाद पानी धीरे-धीरे बाहर निकला। गया। गोटवा प्रतिनिधि के अनुसार फ्लाई ओवर के नीचे बारिश का पानी भरने से लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।