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Basti News: बंट गया 50 प्रतिशत यूरिया... पर वास्तविक किसानों को नहीं मिला

Mon, 15 Dec 2025 12:11 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 15 Dec 2025 12:11 AM IST
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50% urea was distributed... but actual farmers did not get it.
बस्ती। सहकारी समितियों और निजी क्षेत्र की दुकानों से यूरिया की कालाबाजारी होने का संकेत लगातार मिल रहे हैं। जिले में रबी सीजन में यूरिया वितरण का लक्ष्य इस बार 50454 एमटी निर्धारित है।
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दिसंबर में गेहूं के फसल की पहली सिंचाई के बाद यूरिया की डिमांड बढ़ जाती है। लेकिन, इस पीक समय में किसानों का यूरिया आसानी से नहीं मिल पा रहा है। कई बार समितियों पर चक्कर लगाने के बाद भी किसान मायूस होकर लौट रहे हैं।
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समिति और निजी क्षेत्र की दुकानों से तैयार अभिलेखों में वितरण का ग्राफ कम नहीं हुआ है। अभी तक लगभग 50 प्रतिशत 24871 एमटी यूरिया वितरित हो चुकी है। समिति और निजी क्षेत्र की दुकानों पर आवंटित यूरिया का लगभग 50- 50 प्रतिशत हिस्सा पहुंचाया गया है। सहकारी समितियों ने 11 हजार 115 एमटी और दुकानों के जरिये 13756 एमटी यूरिया इस सीजन में वितरित की गई है। जिले की सौ से अधिक समितियों पर यूरिया क्रमवार आवंटित हो रही है। व्यवहारिक रूप से वितरण 25 से 30 समितियों पर ही रोजाना हो पा रहा है। इसके बाद भी इतने मात्रा में यूरिया की खपत संदेहास्पद बनी हुई है। वहीं निजी क्षेत्र की दुकान भी यूरिया की खेप से खाली हो जा रही है। जानकार बता रहे हैं कि वितरण में सख्ती होने के बाद कालाबाजारी का पैटर्न बदल गया है। अब यूरिया खाद पीओएस मशीन से निर्गत की जा रही है। जोतबही के साथ आने वाले किसानों को पीओएस मशीन पर अंगूठा लगाकर उनके जरूरत के हिसाब एक-दो बोरी यूरिया दी जा रही है। मगर मशीन में उनके नाम अधिक मात्रा में यूरिया निर्गत कर दी जा रही है।
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इसकी जानकारी किसान को भी नहीं हो पा रही है। यही खेल निजी दुकानों पर भी चल रहा है। बाद में पीओएस मशीन में निर्गत हो चुकी यूरिया की खेप गुपचुप ढंग से कालाबाजारियों एवं सुदूरवर्ती प्राइवेट एजेंटों के हाथ अच्छा मुनाफा लेकर बेच दिया जा रहा है। जिससे अनुदानित यूरिया निजी एजेंटों के जरिये 400 से 500 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से मिल रही है। विभागीय जांच में भी इस खेल का खुलासा अक्सर हो रहा है। पिछले 15 दिनों में जिला कृषि अधिकारी की जांच में 15 से अधिक समिति और दुकानों पर जोतबही से ज्यादा मात्रा में यूरिया किसानों के नाम निर्गत किया जाना पाया गया।

जांच के दौरान संबंधित किसानों ने पीओएस मशीन में उनके नाम आवंटित अधिक मात्रा में यूरिया लेने से साफ इनकार दिया। इस आरोप में सिलसिलेवार समितियों और दुकानों पर निलंबन की कार्रवाई भी की जा रही है। बावजूद इसके यूरिया कालाबाजारी का धंधा थमने का नाम नहीं ले रहा है।
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