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खास खबर.... नपेंगे शहर की बदसूरती के जिम्मेदार

Mon, 07 Jan 2019 11:43 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jan 2019 11:43 PM IST
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खास खबर.... नपेंगे शहर की बदसूरती के जिम्मेदार
शहर की बदसूरती के जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई
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डीएम खफा, अब तय होगी जिम्मेदारी
ना-फरमानी में कागजी बने कई नए प्रोजेक्ट
ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसे मुद्दों पर बेअसर रही कवायद
वीरेंद्र पांडेय
बस्ती। शहर की सूरत चमकाने में रोड़ा अटकाने वालों को नाफरमानी भारी पड़ने वाली है। स्वच्छता, सुंदरीकरण, अतिक्रमण, यातायात प्रबंधन जैसी जन सुविधाओं से जुड़ीं सेवाओं में सुधार की जगह नई चुनौतियां गिनाने की संस्कृति पर प्रशासनिक मशीनरी ने तेवर तल्ख कर लिया है। बजट सहित अन्य सभी आवश्यक सामग्री आदि की प्रचुर उपलब्धता के बावजूद बेहतरीन परियोजनाएं कागज से जमीन पर नहीं उतारी जा सकीं। इसकी जिम्मेदारी तय करते हुए जवाब तलब किया जाएगा। साथ ही प्राथमिकता के आधार पर उन्हें पूरा कराने की कवायद भी की जाएगी।

डॉ. राजशेखर के डीएम पद का कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही प्रशासनिक मशीनरी में नई स्फूर्ति देखी गई। टीम का उत्साह देखकर डीएम ने जिले के चौमुखी विकास की परियोजनाओं को न केवल शुरू कराया, अपितु बड़े प्रोजेक्ट पर आवश्यकतानुसार शासन में मंजूरी दिलाने में भी खासी दिलचस्पी दिखाई। इससे जनता का उन पर भरोसा दृढ़ होता गया। बस्ती व वाल्टरगंज चीनी मिल के बकाये मूल्य की वसूली कराने, नई मिल स्थापना, मेडिकल कॉलेज निर्माण में बाधाओं को दूर करने जैसी अनेक उपलब्धि भी हासिल की गई लेकिन डीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट मातहतों की हीलाहवाली एवं नाफरमानी के कारण जमीन पर नहीं उतारे जा सके। जिले का रिपोर्ट कार्ड जारी करते समय डीएम ने उन बिंदुओं को सार्वजनिक भी किया था, जिसमें ऐसी नई पहल की सूची जारी थी, जिन्हें 2018 में मूर्त रूप नहीं दिला पाए। डीएम का कहना है कि इसकी जवाबदेही तय की जाएगी।
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अधूरे रह गए प्रोजेक्ट

ट्रैफिक मैनेजमेंट, अतिक्रमण हटाने में विफलता।
शहर को साफ-सुथरा रखने में नाकाम रहे।
महत्वपूर्ण स्थानों पर कूड़े के बड़े कंटेनर डस्टबिन और सार्वजनिक शौचालय नहीं बना पाए।
व्यवस्थित शहर की प्लानिंग और विकास के लिए कुछ नहीं किया गया।
सड़क सुरक्षा के मुद्दे पर बहुत कुछ नहीं कर सके।
विकास प्राधिकरण को पूर्णरूप से क्रियाशील नहीं किया जा सका।
सार्वजनिक शौचालयों, अच्छे पार्कों, वॉकिंग ट्रैक और ओपन जिम नहीं बने।
किसानों से संबंधित मुद्दों पर प्रभावी पहल नहीं हो पाई।
समाधान दिवस एवं सीएम हेल्प लाइन पर शिकायतों का सम्यक समाधान सुनिश्चित करना शेष।
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