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रेलवे अस्पताल: काम चलाऊ दवाओं से चल रही ओपीडी
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
Updated Fri, 07 Dec 2018 10:09 PM IST
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रेलवे अस्पताल।
- फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। जिला मुख्यालय पर स्थापित रेलवे अस्पताल के लकदक भवन में केवल सामान्य रोगों का इलाज संभव है। शेष गंभीर रोग में यहां रेलवे कर्मी मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल के दवा भंडार में भी केवल काम चलाऊ दवाएं ही हैं। ऐसे में यदि कोई मरीज ऐसा आया, जिसके लिए दवा नहीं होगी उसे भी रेफर कर पीछा छुड़ा लिया जाता है।
रेलवे के कर्मियों की स्वास्थ्य सुविधा के लिए अस्पताल खोला गया है। इस अस्पताल में यूं तो स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति होनी चाहिए, फिलहाल एक संविदा डॉक्टर तैनात किया गया है। कागजों में यहां डॉक्टर हर दिन सुबह साढ़े आठ से दोपहर 12.30 बजे तक तथा शाम को चार से पांच बजे तक सेवा देते हैं, लेकिन रेलवे के कर्मचारी बताते हैं कि डॉक्टर सप्ताह में मात्र तीन ही दिन आते हैं। बृहस्पतिवार शाम की पाली में अमर उजाला ने इसकी पुष्टि की तो पता चला कि आज डॉक्टर किसी कार्य से गए हैं। शाम की पाली में नहीं आएंगे।
सूत्रों की मानें तो अस्पताल में दवाओं का भी टोटा है। जरूरत की छिटपुट दवाओं को छोड़ दिया जाए तो यहां भंडार खाली है। ऐसे में रेलवे कर्मी मरीज यहां छिटपुट ही आते हैं। अस्पताल कर्मी बताते हैं कि हर दिन औसतन पंद्रह मरीजों का इलाज ओपीडी में होता है, मगर रेलवे कर्मी बताते हैं कि जब अस्पताल में दवा व भर्ती की व्यवस्था नहीं है तो ऐसे में कोई बीमार होने के बाद वहां क्यों जाएगा। अस्पताल में तैनात डॉ. इकबाल अहमद खान ने तो मोबाइल नहीं उठाया, मगर फार्मासिस्ट पवन कुमार मिश्र ने कहा कि यह सही है कि अस्पताल में छिटपुट दवाएं ही हैं, मगर जो है, उसे मरीजों को उपलब्ध कराया जाता है। यदि किसी मरीज को उन दवाओं की जरूरत पड़ गई, जो यहां भंडार में नहीं हैं तो उसे तत्काल गोरखपुर अथवा गोंडा रेफर कर दिया जाता है। रही डॉक्टर की बात तो आज वे किसी कार्य से बाहर गए हैं। वैसे वे अवकाश को छोड़ हर दिन यहां सेवा देते हैं।
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रेलवे के कर्मियों की स्वास्थ्य सुविधा के लिए अस्पताल खोला गया है। इस अस्पताल में यूं तो स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति होनी चाहिए, फिलहाल एक संविदा डॉक्टर तैनात किया गया है। कागजों में यहां डॉक्टर हर दिन सुबह साढ़े आठ से दोपहर 12.30 बजे तक तथा शाम को चार से पांच बजे तक सेवा देते हैं, लेकिन रेलवे के कर्मचारी बताते हैं कि डॉक्टर सप्ताह में मात्र तीन ही दिन आते हैं। बृहस्पतिवार शाम की पाली में अमर उजाला ने इसकी पुष्टि की तो पता चला कि आज डॉक्टर किसी कार्य से गए हैं। शाम की पाली में नहीं आएंगे।
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सूत्रों की मानें तो अस्पताल में दवाओं का भी टोटा है। जरूरत की छिटपुट दवाओं को छोड़ दिया जाए तो यहां भंडार खाली है। ऐसे में रेलवे कर्मी मरीज यहां छिटपुट ही आते हैं। अस्पताल कर्मी बताते हैं कि हर दिन औसतन पंद्रह मरीजों का इलाज ओपीडी में होता है, मगर रेलवे कर्मी बताते हैं कि जब अस्पताल में दवा व भर्ती की व्यवस्था नहीं है तो ऐसे में कोई बीमार होने के बाद वहां क्यों जाएगा। अस्पताल में तैनात डॉ. इकबाल अहमद खान ने तो मोबाइल नहीं उठाया, मगर फार्मासिस्ट पवन कुमार मिश्र ने कहा कि यह सही है कि अस्पताल में छिटपुट दवाएं ही हैं, मगर जो है, उसे मरीजों को उपलब्ध कराया जाता है। यदि किसी मरीज को उन दवाओं की जरूरत पड़ गई, जो यहां भंडार में नहीं हैं तो उसे तत्काल गोरखपुर अथवा गोंडा रेफर कर दिया जाता है। रही डॉक्टर की बात तो आज वे किसी कार्य से बाहर गए हैं। वैसे वे अवकाश को छोड़ हर दिन यहां सेवा देते हैं।
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