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जिले में अधूरा है पंचायत सचिवालय का सपना
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250 पंचायत भवनों का निर्माण अधर में
बस्ती। जिले के तमाम ग्राम पंचायतों में अभी भी पंचायत सचिवालय का सपना साकार नहीं हो पा रहा है। इसका प्रमुख कारण उन ग्राम पंचायतों में अब तक पंचायत भवनों का निर्माण पूरा न हो पाना है। लिहाजा जिले में 250 पंचायत भवनों का निर्माण अभी भी अधूरा है। ऐसे में इन ग्राम पंचायतों में अभी पंचायत सचिवालय की स्थापना का सपना पूरा नहीं हो सका है। इन ग्राम पंचायतों के लोगों को अभी भी जरूरी अभिलेख के लिए तहसील व ब्लॉक का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
गांवों को स्मार्ट बनाने के लिए योगी सरकार ने ग्राम पंचायतों में पंचायत भवनों का निर्माण कराकर उन्हें पंचायत सचिवालय के रूप में स्थापित करने का निर्णय पिछले ही कार्यकाल में लिया था। ग्राम पंचायतों में बैठकों का आयोजन, गांव स्तर पर पंचायत सचिव की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इनका निर्माण कराया जाना है। पंचायत भवन में ग्राम पंचायत कार्यालय की स्थापना के साथ ही गांव के लोगों को एक ही छत के नीचे संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराई जानी है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में ही पंचायत भवनों के निर्माण को हरी झंडी देकर जरूरी धनराशि भी उपलब्ध करा दी गई थी।
जिले में 1185 ग्राम पंचायत हैं। इनमें 758 ग्राम पंचायतों में चयन के आधार पर पंचायत भवन का निर्माण कराए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन, पांच ग्राम पंचायतों में जमीन न मिलने के कारण 753 में ही इनका निर्माण कराने के लिए धन अवमुक्त किया गया। अधिकारी लगातार पंचायत सचिवों को पंचायत भवन का निर्माण पूरा कराने का निर्देश देते रहे। मगर अब तक की जो स्थिति है उसके अनुसार अब भी 250 भवन निर्माण की राह देख रहे हैं।
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ब्लॉकवार अधूरे पंचायत भवन
जिले में कुल 250 पंचायत भवनों का निर्माण अब तक अधूरा है। इनमें परशुरामपुर विकास खंड में 35, बस्ती सदर में 27, बहादुरपुर, रुधौली और कुदरहा में 26-26, हर्रैया व बनकटी में 21-21, विक्रमजोत में 16, गौर व साऊंघाट में 13-13, रामनगर में 10, सल्टौआ गोपालपुर में सात, दुबौलिया में छह, कप्तानगंज में तीन पंचायत भवन शामिल हैं।
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जिले में अभी भी 250 पंचायत भवन अपूर्ण हैं। जल्द से जल्द सभी पंचायत भवनों को पूर्ण कर उनमें पंचायत सचिवालय की स्थापना करने का निर्देश संबंधित पंचायत सचिवों को दिया गया है।
डॉ. राजेश कुमार प्रजापति, मुख्य विकास अधिकारी
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बस्ती। जिले के तमाम ग्राम पंचायतों में अभी भी पंचायत सचिवालय का सपना साकार नहीं हो पा रहा है। इसका प्रमुख कारण उन ग्राम पंचायतों में अब तक पंचायत भवनों का निर्माण पूरा न हो पाना है। लिहाजा जिले में 250 पंचायत भवनों का निर्माण अभी भी अधूरा है। ऐसे में इन ग्राम पंचायतों में अभी पंचायत सचिवालय की स्थापना का सपना पूरा नहीं हो सका है। इन ग्राम पंचायतों के लोगों को अभी भी जरूरी अभिलेख के लिए तहसील व ब्लॉक का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
गांवों को स्मार्ट बनाने के लिए योगी सरकार ने ग्राम पंचायतों में पंचायत भवनों का निर्माण कराकर उन्हें पंचायत सचिवालय के रूप में स्थापित करने का निर्णय पिछले ही कार्यकाल में लिया था। ग्राम पंचायतों में बैठकों का आयोजन, गांव स्तर पर पंचायत सचिव की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इनका निर्माण कराया जाना है। पंचायत भवन में ग्राम पंचायत कार्यालय की स्थापना के साथ ही गांव के लोगों को एक ही छत के नीचे संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराई जानी है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में ही पंचायत भवनों के निर्माण को हरी झंडी देकर जरूरी धनराशि भी उपलब्ध करा दी गई थी।
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जिले में 1185 ग्राम पंचायत हैं। इनमें 758 ग्राम पंचायतों में चयन के आधार पर पंचायत भवन का निर्माण कराए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन, पांच ग्राम पंचायतों में जमीन न मिलने के कारण 753 में ही इनका निर्माण कराने के लिए धन अवमुक्त किया गया। अधिकारी लगातार पंचायत सचिवों को पंचायत भवन का निर्माण पूरा कराने का निर्देश देते रहे। मगर अब तक की जो स्थिति है उसके अनुसार अब भी 250 भवन निर्माण की राह देख रहे हैं।
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ब्लॉकवार अधूरे पंचायत भवन
जिले में कुल 250 पंचायत भवनों का निर्माण अब तक अधूरा है। इनमें परशुरामपुर विकास खंड में 35, बस्ती सदर में 27, बहादुरपुर, रुधौली और कुदरहा में 26-26, हर्रैया व बनकटी में 21-21, विक्रमजोत में 16, गौर व साऊंघाट में 13-13, रामनगर में 10, सल्टौआ गोपालपुर में सात, दुबौलिया में छह, कप्तानगंज में तीन पंचायत भवन शामिल हैं।
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जिले में अभी भी 250 पंचायत भवन अपूर्ण हैं। जल्द से जल्द सभी पंचायत भवनों को पूर्ण कर उनमें पंचायत सचिवालय की स्थापना करने का निर्देश संबंधित पंचायत सचिवों को दिया गया है।
डॉ. राजेश कुमार प्रजापति, मुख्य विकास अधिकारी