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खजाना खाली, छह करोड़ की देनदारी
Updated Sun, 06 Aug 2017 11:48 PM IST
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बस्ती। ‘स्वच्छ बस्ती, सुंदर बस्ती’ यह नारा है नगर पालिका परिषद का है। सुविधाओं के नाम पर पांच साल तक जमकर जनता का धन पानी की तरह बहाया गया, मगर शहर की सूरत पहले से ज्यादा खराब हो गई। धनादोहन के चलते पालिका का खजाना खाली हो गया और अंत में 29 जुलाई को पांच साल पूरा होते ही नियमानुसार बोर्ड भंग हो गई, मगर अब भी छह करोड़ की देनदारी पालिका पर है। कर्ज में रहकर सुविधा देने वाले शहर में सड़कों की हालत जर्जर है, नालियां जाम, सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं दिखता। इसे लेकर पालिका प्रशासन परेशान है। बकाया को लेकर जिम्मेदारों पर दबाव बनाया जा रहा है।
नगरपालिका बोर्ड का गठन 19 जुलाई 2012 को हुआ था। बोर्ड की पहली बैठक 29 जुलाई को हुई थी। इसके बाद योजना तैयार कर विकास कार्य होने लगे। शासन से भी खूब धन आया, मगर इस धन का उपयोग पर तमाम सवाल खड़े होते रहे। इसके बाद आधा दर्जन सभासद लोकायुक्त तक अपनी बात रखी, जांच चल रही है। इसी बीच विरोधी खेमे ने बोर्ड की बैठक में अध्यक्ष पर जूता भी उछाला। विरोध लगातार जारी रहा, मगर अध्यक्ष की सेहत पर इसका कोई असर नहीं हुआ। शहर की सड़कों नालियों नालों की स्थिति बदतर होती गई। बोर्ड के सदस्य हर बैठक में चिल्लाते रहे, मगर हालात नहीं बदले। यह जरूर है कि छिटपुट काम कराकर उसका उद्घाटन कराया गया। कुछ कार्य करा लिए गए, मगर सेटिंग गेटिंग न हो पाने के कारण कार्य कराने वालों का भुगतान लंबित हो गया। कार्यकाल बीत जाने के बाद जब नपा ने इसका लेखा जोखा बनाया तो पता चला कि कुल छह करोड़ के करीब देनदारी है।
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यह सही है कि छह करोड़ की देनदारी पालिका के ऊपर है। इसका निस्तारण तो हो जाता मगर पालिका का खजाना खाली है। जैसे-जैसे धन आएगा बकाएदारों को भुगतान होगा।
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-डा. आरपी श्रीवास्तव, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका।
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नगरपालिका बोर्ड का गठन 19 जुलाई 2012 को हुआ था। बोर्ड की पहली बैठक 29 जुलाई को हुई थी। इसके बाद योजना तैयार कर विकास कार्य होने लगे। शासन से भी खूब धन आया, मगर इस धन का उपयोग पर तमाम सवाल खड़े होते रहे। इसके बाद आधा दर्जन सभासद लोकायुक्त तक अपनी बात रखी, जांच चल रही है। इसी बीच विरोधी खेमे ने बोर्ड की बैठक में अध्यक्ष पर जूता भी उछाला। विरोध लगातार जारी रहा, मगर अध्यक्ष की सेहत पर इसका कोई असर नहीं हुआ। शहर की सड़कों नालियों नालों की स्थिति बदतर होती गई। बोर्ड के सदस्य हर बैठक में चिल्लाते रहे, मगर हालात नहीं बदले। यह जरूर है कि छिटपुट काम कराकर उसका उद्घाटन कराया गया। कुछ कार्य करा लिए गए, मगर सेटिंग गेटिंग न हो पाने के कारण कार्य कराने वालों का भुगतान लंबित हो गया। कार्यकाल बीत जाने के बाद जब नपा ने इसका लेखा जोखा बनाया तो पता चला कि कुल छह करोड़ के करीब देनदारी है।
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यह सही है कि छह करोड़ की देनदारी पालिका के ऊपर है। इसका निस्तारण तो हो जाता मगर पालिका का खजाना खाली है। जैसे-जैसे धन आएगा बकाएदारों को भुगतान होगा।
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-डा. आरपी श्रीवास्तव, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका।