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यूक्रेन में फंसे जिले के दो छात्र, वहां कर रहे मेडिकल की पढ़ाई
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यूक्रेन में फंसे मेडिकल की पढ़ाई कर रहे जिले के दो छात्र
हर्रैया (बस्ती)। यूक्रेन में रूसी हमले के बीच मेडिकल की पढ़ाई करने गए बस्ती के दो छात्र भी फंसे हैं। दोनों छात्रों के परिजन रोज उनसे फोन पर बात कर कुशल क्षेम पूछ रहे हैं और उन्हें वापस लाने के लिए सरकार से गुहार लगा रहे हैं।
हर्रैया क्षेत्र के महुघाट गांव निवासी छात्र मोहित कुमार गौड़ फंस गए हैं। वह यू्केन के टरनोपिल में रहते हैं। हालांकि, वह यूक्रेन की राजधानी कीव से करीब छह सौ किमी दूर है और अभी तक वहां कोई बमबारी व सैन्य कार्रवाई नहीं हुई है, मगर शहर में रेड अलर्ट होने के कारण बैंक व एटीएम बंद हैं। इससे नकदी की किल्लत हो गई है और खाने- पीने की वस्तुओं कमी होने लगी है। मोहित ने फोन पर बताया कि भारतीय राजदूतावास को यहां फंसे छात्रों को अगल -बगल के देशों की सीमाओं में पहुंचाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन पर दवाब बनाना चाहिए, जिससे छात्रों की सकुशल घर वापसी हो सके।
मोहित कुमार गौड़ पुत्र विजय कुमार 2017 में एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन के टरनोपिल गए थे। वे छठे सेमेस्टर की पढ़ाई पिछले वर्ष पूरी होने के बाद इंटरनशिप कर रहे हैं। पिता विजय ने बताया कि परिवार में मां दुर्गा के अलावा छोटी बहन रंजीता व भाई शिवम हैं। दोनों स्वास्थ्य सेवा से ही जुड़े हैं। रूस के हमले के बाद से ही घर के लोग चिंतित हैं। मोहित लगातार परिजनों के संपर्क में भी है मगर परिजन हर पल यूक्रेन की हालत पर नजर गड़ाए टीवी व अन्य माध्यमों से जुड़े हैं।
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फ़ोन पर संवाददाता से बात करते हुए मोहित ने बताया कि मेडिकल कॉलेज से दो किमी दूर किराए के फ्लैट में गोंडा की एक छात्रा व दो अन्य छात्रों के साथ रह रहे हैं। शहर में रेड अलर्ट है। रात 10 बजे से सुबह सात बजे तक बाहर निकलने पर पाबंदी है। खाने- पीने के सामानों की किल्लत के साथ कैश भी खत्म होने से परेशानी बढ़ने वाली है। बताया कि अगले एक दो दिन का ही राशन व सब्जी बचा है। हवाई सेवा बंद होने से चिंता बढ़ गई है। शहर के मेयर ने आपात स्थिति के लिए लोगों को आगाह करते हुए अलार्म बजने पर घरों के नीचे बने शेल्टरों में जाने की सलाह दी है। बृहस्पतिवार रात में अचानक अलार्म बजने पर सभी सहम गए और शेल्टरों में दुबक गए थे, मगर कोई सैन्य कारवाई व बमबारी नहीं होने से राहत की सांस ली। कहा कि शहर से बाहर निकलकर हंगरी, रोमानिया, पोलैंड जैसे देश की सीमा में प्रवेश के लिए कोई वाहन व वैध कागजात नहीं है। कहा कि करीब दो सौ अधिक भारतीय छात्र इस मेडिकल कालेज में पढाई करते हुए अभी तक फंसे हुए है। रोहित ने भारतीय दूतावास के अधिकारियों से मांग की है उनके जैसे भारतीय छात्रों को दूसरे देशों की सीमा तक पहुंचाने में मदद के लिए दवाब बनाए, जिससे सभी सकुशल देश वापस लौट सकें।
इसी क्रम में जिले के छावनी क्षेत्र के रूपगढ़ गांव निवासी एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र मुलायम सिंह यादव यूक्रेन में फंस गए हैं। इनका परिवार सप्ताह भर से मुलायम के घर वापसी के लिए हवाई टिकट पाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल सकी है। मुलायम सिंह यादव के पिता सत्यप्रकाश यादव गांव में ही इंटर कॉलेज के निदेशक हैं। इलाहाबाद से इंटरमीडिएट करने के बाद वे एमबीबीएस करने के लिए 14 दिसंबर 2020 में यूक्रेन गए थे। इस साल मार्च में उनके चौथे समेस्टर की परीक्षा भी तय थी। वह टर्नोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं। छह वर्ष के कोर्स में उन्हें कुल 12 समेस्टर की पढ़ाई करनी है। मुलायम के पिता सत्य प्रकाश यादव ने कहा कि भारत सरकार को चाहिए कि वह अपने छात्रों व नागरिकों को वापस लाने का प्रयास करे। पूरा परिवार उनके लौटने की दुआ कर रहा है।
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हर्रैया (बस्ती)। यूक्रेन में रूसी हमले के बीच मेडिकल की पढ़ाई करने गए बस्ती के दो छात्र भी फंसे हैं। दोनों छात्रों के परिजन रोज उनसे फोन पर बात कर कुशल क्षेम पूछ रहे हैं और उन्हें वापस लाने के लिए सरकार से गुहार लगा रहे हैं।
हर्रैया क्षेत्र के महुघाट गांव निवासी छात्र मोहित कुमार गौड़ फंस गए हैं। वह यू्केन के टरनोपिल में रहते हैं। हालांकि, वह यूक्रेन की राजधानी कीव से करीब छह सौ किमी दूर है और अभी तक वहां कोई बमबारी व सैन्य कार्रवाई नहीं हुई है, मगर शहर में रेड अलर्ट होने के कारण बैंक व एटीएम बंद हैं। इससे नकदी की किल्लत हो गई है और खाने- पीने की वस्तुओं कमी होने लगी है। मोहित ने फोन पर बताया कि भारतीय राजदूतावास को यहां फंसे छात्रों को अगल -बगल के देशों की सीमाओं में पहुंचाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन पर दवाब बनाना चाहिए, जिससे छात्रों की सकुशल घर वापसी हो सके।
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मोहित कुमार गौड़ पुत्र विजय कुमार 2017 में एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन के टरनोपिल गए थे। वे छठे सेमेस्टर की पढ़ाई पिछले वर्ष पूरी होने के बाद इंटरनशिप कर रहे हैं। पिता विजय ने बताया कि परिवार में मां दुर्गा के अलावा छोटी बहन रंजीता व भाई शिवम हैं। दोनों स्वास्थ्य सेवा से ही जुड़े हैं। रूस के हमले के बाद से ही घर के लोग चिंतित हैं। मोहित लगातार परिजनों के संपर्क में भी है मगर परिजन हर पल यूक्रेन की हालत पर नजर गड़ाए टीवी व अन्य माध्यमों से जुड़े हैं।
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फ़ोन पर संवाददाता से बात करते हुए मोहित ने बताया कि मेडिकल कॉलेज से दो किमी दूर किराए के फ्लैट में गोंडा की एक छात्रा व दो अन्य छात्रों के साथ रह रहे हैं। शहर में रेड अलर्ट है। रात 10 बजे से सुबह सात बजे तक बाहर निकलने पर पाबंदी है। खाने- पीने के सामानों की किल्लत के साथ कैश भी खत्म होने से परेशानी बढ़ने वाली है। बताया कि अगले एक दो दिन का ही राशन व सब्जी बचा है। हवाई सेवा बंद होने से चिंता बढ़ गई है। शहर के मेयर ने आपात स्थिति के लिए लोगों को आगाह करते हुए अलार्म बजने पर घरों के नीचे बने शेल्टरों में जाने की सलाह दी है। बृहस्पतिवार रात में अचानक अलार्म बजने पर सभी सहम गए और शेल्टरों में दुबक गए थे, मगर कोई सैन्य कारवाई व बमबारी नहीं होने से राहत की सांस ली। कहा कि शहर से बाहर निकलकर हंगरी, रोमानिया, पोलैंड जैसे देश की सीमा में प्रवेश के लिए कोई वाहन व वैध कागजात नहीं है। कहा कि करीब दो सौ अधिक भारतीय छात्र इस मेडिकल कालेज में पढाई करते हुए अभी तक फंसे हुए है। रोहित ने भारतीय दूतावास के अधिकारियों से मांग की है उनके जैसे भारतीय छात्रों को दूसरे देशों की सीमा तक पहुंचाने में मदद के लिए दवाब बनाए, जिससे सभी सकुशल देश वापस लौट सकें।
इसी क्रम में जिले के छावनी क्षेत्र के रूपगढ़ गांव निवासी एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र मुलायम सिंह यादव यूक्रेन में फंस गए हैं। इनका परिवार सप्ताह भर से मुलायम के घर वापसी के लिए हवाई टिकट पाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल सकी है। मुलायम सिंह यादव के पिता सत्यप्रकाश यादव गांव में ही इंटर कॉलेज के निदेशक हैं। इलाहाबाद से इंटरमीडिएट करने के बाद वे एमबीबीएस करने के लिए 14 दिसंबर 2020 में यूक्रेन गए थे। इस साल मार्च में उनके चौथे समेस्टर की परीक्षा भी तय थी। वह टर्नोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं। छह वर्ष के कोर्स में उन्हें कुल 12 समेस्टर की पढ़ाई करनी है। मुलायम के पिता सत्य प्रकाश यादव ने कहा कि भारत सरकार को चाहिए कि वह अपने छात्रों व नागरिकों को वापस लाने का प्रयास करे। पूरा परिवार उनके लौटने की दुआ कर रहा है।