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धान खरीद: सभी राइस मिलें होंगी संबद्ध

Tue, 25 Sep 2018 11:50 PM IST
Updated Tue, 25 Sep 2018 11:50 PM IST
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धान खरीद: सभी राइस मिलें होंगी संबद्ध
धान खरीद : सभी राइस मिलें होंगी संबद्ध
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पंजीकरण की तिथि अब 15 अक्तूबर तक
किसानों को मिलेंगे उतरवाई मद में 20 रुपये
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। शासन ने इस बार धान खरीद के लिए तमाम नई नीति लागू कर दी है। नई नीति के तहत इस बार क्रियाशील सभी राइस मिलें खरीद में संबद्ध की जाएंगी। ये राइस मिलें स्वयं केंद्रों से धान के परिवहन की भी जिम्मेदारी निभाएंगी। अब राइस मिलों का संबद्धीकरण आरएफसी के बजाय डीएम करेंगे। यही नहीं किसानों के पंजीकरण की तिथि अब 15 अक्तूबर तक बढ़ा दी गई है।

धान खरीद को लेकर जहां बिचौलियों को दूर करने के लिए शासन ने ताना-बाना बुन दिया है। अभी तक धान लेकर किसी भी केंद्र पर पहुंचने पर उसकी खरीद हो जाती थी, मगर अब ऐसा नहीं हो सकेगा। क्योंकि शासन ने नई नीति में ग्रामों के संबद्धीकरण के निर्देश दिए हैं। इसके तहत किसान अपने गांव से सबसे नजदीक के क्रय केंद्र पर धान बेचेगा। किसानों को जहां धान की प्रति क्विंटल कीमत 1750 रुपये तय की गई है वहीं अब तक उतरवाई छनवाई के मद में मिलने वाले 15 रुपये को बढ़ा कर 20 रुपये कर दिया गया है। यही नहीं अब तक धान खरीद में अपने को दूर करने वाले क्रियाशील राइस मिल इस बार संबद्ध किए जाएंगे, वे यह कह कर बच नहीं सकेंगे कि उनकी मिल भुजिया चावल उत्पादित करती है, क्योंकि सरकार ने इस बार भुजिया चावल भी खरीदने की योजना बना ली है। यानी क्रियाशील मिलों को सरकार के कस्टम हालिंग का कार्य करना होगा। और तो और लघु व सीमांत किसानों के लिए इस बार खरीद के दिन शासन ने तय किए हैं। लघु किसान का अर्थ दो हेक्टेयर या उससे ऊपर की खेती वाले जबकि सीमांत किसान एक हेक्टेयर या उससे ऊपर के खेत वाले किसानों के लिए शासन ने मंगलवार व शुक्रवार को अनिवार्य रूप से खरीद की व्यवस्था बनाई है। डिप्टी आरएमओ गोरखनाथ त्रिपाठी ने कहा कि शासन की क्रय नीति तय हो गई है। इसके अनुसार इस बार तमाम नए फार्मूले पर खरीद की जाएगी। परंपरागत नीति के अलावा सभी राइस मिलों को इसमें सहभागिता करनी होगी। इसके अलावा परिवहन का कार्य उन्हें स्वयं करना होगा। अब तक राइस मिलों का संबद्धीकरण आरएफसी करते थे, मगर इस बार शासन ने यह जिम्मेदारी डीएम को दे दी है। फिलहाल, जिले का लक्ष्य अभी निर्धारित नहीं हुआ है, मगर सूबे का लक्ष्य पचास लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है।
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