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Basti News: मंडलीय प्रयोगशाला में हुई 16 हजार जांच, पीने लायक मिला बस्ती का पानी

Fri, 09 Jan 2026 01:08 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 09 Jan 2026 01:08 AM IST
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16,000 tests conducted in the divisional laboratory, slum water found fit for drinking
बस्ती। पेयजल की गुणवत्ता को लेकर अब बस्तीवासियों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ रहा है। जिले की मंडलीय जल जांच प्रयोगशाला को राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल ) से मान्यता प्राप्त हो गई है। इससे अब भारतीय मानकों के अनुरूप पानी की जांच स्थानीय स्तर पर ही प्रमाणिक रूप से हो रही और इसकी रिपोर्ट राष्ट्रीय स्तर पर मान्य है। इसी लैब से जनपद के 16500 सैंपल की जांच हुई, जिसमें पानी ठीक पाया गया है। बस्ती के पानी को पीने लायक बताया गया है।
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पहले जिले में पानी की गुणवत्तापरक जांच के लिए सैंपल लखनऊ या किसी अन्य शहर में भेजना पड़ता था, जिससे प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली हो जाती थी। कई बार लोग बिना जांच के ही पानी के उपयोग को विवश हो जाते थे। लेकिन अब एनएबीएल प्रमाणित प्रयोगशाला के जरिए यह जांच बस्ती में ही हो हो रही है, जिससे समय और संसाधनों की बचत हो रही है। बताया गया कि प्रयोगशाला के इंचार्ज एक्सईएन जलनिगम ग्रामीण योगेंद्र कुमार ने बताया कि इस प्रयोगशाला को कुल 14 मानकों पर जल परीक्षण की मान्यता प्राप्त हुई है। इसके तहत नल-जल योजना, हैंडपंप, आरओ और घरेलू जल स्रोतों की शुद्धता की सटीक जांच संभव है।
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लैब इंचार्ज प्रतिमा का कहना है कि रोजाना औसतन पानी के 40 सैंपल जांच के लिए प्राप्त होते हैं। इसमें जीवाणु और रसायनिक जांच की सुविधा है। टीडीएस, पीएच समेत अन्य जांचें हो रही हैं। 24 घंटे में जांच रिपोर्ट प्राप्त हो जाती है, जिसके बाद संबंधित को रिपोर्ट सौंप दी जाती है। लैब असिस्टेंट अंकित का कहना था कि खुद भी सैंपल लेने टीम जाती है। नगर पालिका, नगर पंचायतों और गांव-कस्बों के साथ निजी स्रोत से भी लोग पानी सैंपल लेकर जांच के लिए आते हैं। जागरूकता बढ़ी है। चूंकि, अब आसानी से बस्ती में ही प्रमाणित जांच हो जा रही है।
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माइक्रो बॉयोलाजिस्ट उपासना का कहना है कि पानी सैंपल में बैक्टीरिया जांच हो रही है। इससे पानी में पता चल जाता है कि कौन जीवाणु रहते हैं। साधारण जांच के लिए कोई भी एक लीटर पानी सैंपल लेकर जांच करवा सकता है। साथ ही यदि सभी 14 पैरामीटर पर जांच के लिए कम से कम डेढ़ लीटर पानी की जरूरत पड़ती है।
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हर नागरिक करा सकेगा पानी की जांच

कोई भी नागरिक अपने घर या आसपास के क्षेत्र के पानी का सैंपल किसी साफ डब्बे में भरकर प्रयोगशाला में जमा कर सकता है। 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट प्रदान कर दी जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि पीने योग्य पानी स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है या नहीं।

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नियमित जांच से सुनिश्चित होगी सुरक्षित जल आपूर्ति

नगर पालिका और जलनिगम अधिकारियों के अनुसार, जिले की हर नल-जल योजना के पानी की गुणवत्ता की नियमित अंतराल पर जांच की जा रही है। जहां गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्र हैं, वहां हर माह जांच की जाती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में हर चार महीने पर परीक्षण होता है।

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स्वस्थ जीवन के लिए शुद्ध जल अनिवार्य

स्वास्थ्य विशेषज्ञों डॉ. रामजी सोनी, डॉ. विजय तिवारी, एमडी डॉ. पीएल गुप्ता के मुताबिक, शुद्ध पेयजल से पेट संबंधी बीमारियों में कमी आती है। खासतौर पर अत्यधिक आयरन युक्त पानी कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। 0.3 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक आयरन होने पर पानी का स्वाद और रंग बदल जाता है, साथ ही बर्तनों व कपड़ों पर दाग भी छोड़ता है।

कोट
अप्रैल से दिसंबर तक 16500 सैंपल एकत्र करके जांच कराई गई। सैंपल मानक में आए हैं। रिपोर्ट दे दी गई है। किसी रिपोर्ट में कमी नहीं है। बस्ती का पानी पीने लायक है।
-योगेंद्र कुमार, एक्सईएन, जलनिगम ग्रामीण, बस्ती।
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